बैंगलोर से 460 किमी दूर है कर्नाटक के कुमता जिले में स्थित याना गांव। कारस्ट पत्थरों की संरचना के कारण ये गांव पर्यटकों के बीच बहुत मशहूर है। यहां के पत्थरों का रंग काला है इसलिए इन चट्टानों के चारों ओर जमीन पर कीचड़ भी पूरी तरह से काली है।
दो चट्टानी पर्वत भैरवेश्वर शिखर और मोहिनी शिखर सहयाद्रि पर्वत की पृष्ठभूमि में स्थित है और ये जगह हरे-भरे घने जंगलों से घिरा है। प्रकृति प्रेमियों के लिए ये जगह जन्नत से कम नहीं है।

याना आने का सही समय
याना आने का सही समय सितंबर से फरवरी तक है। मॉनसून के दौरान याना के जंगलों में आना खतरनाक रहता है और गुफाओं में ट्रैक करना भी मुश्किल होता है।
बैंगलोर से याना का रूट
रूट 1 : राजाजीनगर - एनएच 48 - सिरसी - हावेरी रोड़ - बाहर निकलें NH 48 से - याना (456 किमी - 7 घंटे 30 मिनट)
रूट 2 : सीएनआर राव अंडरपास / सीवी रमन रोड़ - एनएच 75 - अर्सिकेरे - बारगुर - अर्सिकेरे से दाएं मुड़ें - मैसूर रोड़ पर मुड़ें - एनएच 69 - सिद्धपुर - तलगुप्पा रोड़ - याना (489 किमी - 9 घंटे 30 मिनट)

तुमकुर के पर्वत
तुमकुर में मधुगिरि और देवरासनदुर्ग दो लोकप्रिय पर्वत हैं जहां आप ट्रैकिंग का मज़ा ले सकते हैं। बैंगलोर से टुमकुर 70 किमी दूर है।
देवरायनदुर्ग पहाड़ी इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है और इसकी पर्वत चोटि पर कई मंदिर स्थित हैं जिनमें से अनेक मंदिर योगनरस्मिहा और भोगनरसिम्हा को समर्पित हैं। पर्वत की तलहटी में बसा है प्राकृतिक झरना जिसे नमादा चिलुमे कहते हैं। किवदंती है कि वनवास काल के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने इस पर्वत पर शरण ली थी।
मधुगिरि पर्वत के किले में दरवाज़े से प्रवेश करने के बाद सीढियां हैं। ऊपर की चढ़ाई करते हुए ट्रैक और मुश्किल होता जाता है। इस पूरे ट्रैक में 3 घटे का समय लगता है।PC:Sangrambiswas

हिरियूर
तुमकुर से 90 किमी दूर है हिरियूर शहर। इस छोटे से गांव में विजयनगर राजवंश का तेरु मल्लेश्वरा मंदिर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में रामायण और पुराणों के कई चित्र बनाए गए हैं।
हिरियूर में वेदावथी नदी में वाणी विलास सागरा और मारी कानिवे बांध बने हैं। ये बांध आजादी से पूर्व के बने हुए हैं। इस बांध के साथ एक गार्डन भी है जहां आप पिकनिक भी मना सकते हैं।PC:Dineshkannambadi

चित्रादुर्ग
चित्रादुर्ग में आपको चालुक्य राजवंश के स्मारक दिखाई देंगें। चंद्रावल्ली और चित्रादुर्ग किला होने के कारण इस शहर का ऐतिहासिक महत्व है।
चंद्रावल्ली की खुदाई में कई राजवंशों के सिक्के और अन्य कलाकृतियां पाई गईं हैं। चंद्रावल्ली की भूमिगत गुफाएं पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। भूमि से 80 फीट नीचे स्थित ये गुफाएं अंकाली मठ के नाम से जानी जाती हैं। इस जगह के पास स्थित झील इसे और भी ज्यादा खूबसूरत बनाती है।
चित्रादुर्ग किले को इस शहर पर शासन करने वाले कई राजाओं द्वारा बनवाया और विकसित किया गया है। इस किले में अनेक मंदिर हैं और इसे कल्लिना कोटे भी कहा जाता है।PC:Bhat.veeresh

देवानगेरे में बेन्ने दोसे
कर्नाटक आए हैं तो इस शहर की लोकप्रिय डिश बेन्ने दोसे जरूर खाएं। इस जगह की खास डिश है बेन्ने दोसे जोकि काफी स्वादिष्ट भी है। देवानगेरे आएं तो इस डिश को खाना बिलकुल ना भूलें।
देवानगेरे में कई दर्शनीय मंदिर भी हैं जैसे हरिहरेश्वर मंदिर और दुर्गांबिका मंदिर।PC:Irrigator

रनेबेन्नुर ब्लैक बक अभ्यारण्य
देवानगेरे से 45 किमी दूर है रनेबेन्नुर ब्लैक बक अभ्यारण्य। इस राज्य में कई ब्लैकबक और कृष्णमुर्ग पाए जाते हैं। यहां 6000 ब्लैकबक पाए जाते हैं। इस अभ्यारण्य में यूकेलिप्टस के खेतों से घिरा है और यहां पर कई तरह के जानवर जैसे सियार, लंगूर, लोमड़ी आदि।
दुर्लभ प्रजाति का पशु ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भी यहां पाया जाता है।PC:Tejas054

हावेरी के मंदिर
रनेबेन्नुर से हावेरी 33 किमी दूर है। इस शहर में भी कई देवी-देवताओं के अनेक मंदिर हैं। हुक्केरी मठ, तारकेश्वर मंदिर, कादंबेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, नागरेश्वर मंदिर आदि जैसे मंदिर इस जिले में देख सकते हैं।
हावेरी में मंदिरों के अलावा बनकापुरा मोर अभ्यारण्य भी लोकप्रिय स्थल है। देश में मोरों को संरक्षित करने के लिए बहुत ही कम अभ्यारण्य हैं और ये उनमें से ही एक है। इसके अलावा यहां पक्षियों की भी कई प्रजातियां जैसे पैराकीट, किंगफिशर, स्पॉट वुडपैकर्स आदि देख सकते हैं।PC:Manjunath Doddamani Gajendragad

सिरसी के झरने
हावेरी से 80 किमी दूर है सिरसी जहां मधुकेश्वर और मारिकंबा मंदिर देख सकते हैं। इसके अलावा सिरसी से 50 से 60 किमी दूर कई खूबसूरत झरने भी हैं। उनछल्ली झरना, सथोड़ी झरना, बेन्ने होल झरना आदि सिरसी के नज़दीक स्थित झरने हैं। पश्चिमी घाट में सहसाद्रि पहाडियों में स्थित उनछल्ली झरना बेहद खूबसूरत है। इसके अलावा यहां 116 मीटर की ऊंचाई से अग्नाशिनी नदी भी बहती है।
यहां से अगला स्टॉप याना है।
PC: Sachin Bv

याना रॉक गुफाएं
याना रॉक की गुफाओं में भौरवेश्वर शिखर जोकि 390 फीट और 300 फीट ऊंचा मोहिनी शिखर है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राक्षस भस्मासुर को भगवान शिव से वरदान मिला था कि वो जिस भी चीज़ को स्पर्श करेगा वो भस्म हो जाएगा। उसे अपनी इस शक्ति का दुरुपयोग करने के बारे में सोचा और भगवान शिव को भस्म करने चला था। भगवान विष्णु के जाल में फंस कर भस्मासुर ने खुद के ही सिर पर हाथ रख लिया और भस्म हो गया।
PC:Ramya suresh

गुफाओं में हाइकिंग
कुछ किलोमीटर पैदल चलने के बाद 260 सीढियां आती हैं। इन सीढियों पर चढ़ने के बाद याना के काले पत्थर आते हैं।
याना गुफाओं में हाइकिंग के बाद इसके अंदर जाएं, वहां भी 900 सीढियां हैं। इस ट्रैक में आपको 3 घंटे का समय लगेगा।
PC:Ramya suresh

विभूति झरना
याना का खूबसूरत झरना है विभूति जोकि हरियाली से घिरा हुआ है। 30 फीट की ऊंचाई से ये झरना पश्चिमी घाट में बहता है। चूना पत्थर की रॉक संरचनाओं से "विभूति" नाम मिला है।
याना की गुफाओं से 61 किमी दूर स्थित विभूति झरने को माग्बी झरने के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसके पास माग्बी गांव स्थित है। इस झरने के आसपास बांस के पेड़ और जंगली फूल हैं। मॉनसून और सर्दी के मौसम यानि अक्टूबर से मार्च तक यहां आना सही रहता है क्योंकि इस दौरान झरने में पानी भरा रहता है।PC:SachinRM



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