फतेहपुरी मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां की पत्नी फतेहपुरी बेगम ने 1650 में करवाया था। उन्हीं के नाम पर इसका नाम फतेहपुरी मस्जिद पड़ा। ये बेगम फतेहपुर से थीं। ताज महल परिसर में बनी मस्जिद भी इन्हीं बेगम के नाम पर है।
लाल पत्थरों से बनी यह मस्जिद मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है। मस्जिद के दोनों ओर लाल पत्थर से बने स्तंभों की कतारें हैं। इस मस्जिद में एक कुंड भी है जो सफेद संगमरमर से बना है। यह मस्जिद कई धार्मिक वाद-विवाद की गवाह रही है।

किसने बनवाई?
फतेहपुरी मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां की पत्नी फतेहपुरी बेगम ने 1650 में करवाया था। उन्हीं के नाम पर इसका नाम फतेहपुरी मस्जिद पड़ा।PC:Varun Shiv Kapur

मंदिर के तीन दरवाजे
मस्जिद के तीन द्वार हैं जिसका फाटक लाल किले के सामने है, और अन्य दो एक उत्तर में और दूसरा मस्जिद के दक्षिण में है। मस्जिद के आंगन में एक बहुत बड़ा टैंक देखा जा सकता हैं जो संगमरमर से बना है। टैंक को स्नान के लिए प्रयोग किया जाता है मस्जिद के अंदर स्थित पुलाव, संगमरमर का बना है और चार चरणों का है। लाल पत्थर खंभे की पंक्तियाँ हैं, जो मस्जिद के दोनों तरफ खड़े हैं।PC: Varun Shiv Kapur

मस्जिद के अंदर कब्रगाह
मस्जिद के थोड़ा आगे इस्लामी विद्वानों के 20 से अधिक कब्र हैं हजरत नानू शाह, मुफ्ती मोहम्मद, मज़हर उल्लाह शाह, मौलाना मोहम्मद आदि की कब्र, मौजूद है।PC: Varun Shiv Kapur

फ़तेहपूरी मस्जिद का इतिहास
अंग्रेज़ों ने इस मस्जिद को 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद, नीलाम कर दिया था, जिसे राय लाला चुन्ना मल ने मात्र 11000 रुपए में खरीद लिया था। जिनके वंशज आज भी चांदनी चौक में चुन्नामल हवेली में रहते हैं। , जिन्होंने इस मस्जिद को संभाले रखा था। बाद में 1877 में सरकार ने इसे चार गांवों के बदले में वापस अधिकृत कर मुसलमानों को दे दिया, जब उन्हें दिल्ली में रहने का दोबारा अधिकार दिया गया था। ऐसी ही एक दूसरी मस्जिद, अकबरबादी बेगम द्वारा बनवाई गई थी, जिसे अंग्रेज़ों ने बर्बाद करवा दिया था।
PC:Varun Shiv Kapur

आसपास क्या घूमे
फतेहपुरी मस्जिद का निकट आकर्षण लाल किला और जामा मस्जिद हैं। यहाँ पास ही में एशिया का सबसे बड़ा मसाला बाजार खारी बावली भी पास में ही मौजूद है।PC:Diego Delso

कब आयें
इस मस्जिद में सभी मुस्लिम त्यौहार बड़े हर्षौल्लास से मनाये जाते है...आप इस मस्जिद में कभी भी जा सकते हैं।इस्लाम धर्म के अनुनायी आज भी अपने दो प्रमुख त्योहारों ईद - उल - फितर और ईद - उल - जुहा को बड़ी ही भव्यता के साथ आज भी इस मस्जिद में मानते हैं।
PC:Varun Shiv Kapur

कैसे आयें
बस द्वारा
भारत के कई राज्यों से सीधी बसे दिल्ली आती है। ये बसे दिल्ली में अलग अलग जगह पर रूकती है। वहां से पर्यटक लोटस टेम्पल आने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था टेक्सी जीप इत्यादि करनी पड़ती है। अतः टेक्सी इत्यादि की बजाय आप मेट्रो रेल से भी आ सकते है। मेट्रो त्वरित, सुविधाजनक व ए.सी. युक्त है। कालका मंदिर के पास मेट्रो स्टेशन है। कालका जी मेट्रो स्टेशन से लोटस टेम्पल आप चल कर भी आ सकते है।
ट्रेन द्वारा
दिल्ली में दो मुख्य रेलवे स्टेशन है। दिल्ली रेलवे स्टेशन पुरानी दिल्ली में। तथा न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन पहाड़गंज, कनॉट प्लेस के पास दिल्ली में। दिल्ली में एक निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन भी है जो सुरेंदर नगर के दक्षिण में है।
हवाई जहाज द्वारा
दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यहाँ कई कम्पनियो के हवाई जहाज देश विदेश में जाने की सुविधा प्रदान करते है। यहां पर्यटक टैक्सी और मेट्रो द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं।
PC: wikimedia.org
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