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स्वतंत्रता दिवस पर दिल्लीवाले लाल किला नहीं अमृतसर के वाघा बॉर्डर पर देखें झंडा फहराने का समारोह

अगले सप्ताह ही हम आजादी के 77 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाले हैं। स्वतंत्रता दिवस ऐसा मौका है जब घर में बच्चों से लेकर मम्मी-पापा तक और दोस्तों की पूरी टोली की छुट्टी होगी। इसलिए इस दिन कहीं घूमने जाने का प्लान बनाया ही जा सकता है। दिल्लीवालों के लिए आसपास में घूमने के कई विकल्प हैं, जिनमें से एक विकल्प है अमृतसर।

इस साल लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने का कार्यक्रम न देखकर अगर अमृतसर के वाघा-अटारी बॉर्डर पर रिट्रिट कार्यक्रम में हिस्सा लिया जाए तो कैसा रहेगा।

wagah boarder

आइए आपको स्वतंत्रता दिवस की छुट्टियों में अमृतसर में घूमने वाली जगहों के बारे में विस्तार से बताते हैं :

वाघा-अटारी बॉर्डर

यह अमृतसर घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए मस्ट विजीट है। लेकिन स्वतंत्रता दिवस के समय अगर आप वाघा बॉर्डर पर परेड देखने जाने का प्लान बना रहे हैं, तो ध्यान रखें भीड़ बहुत ज्यादा मिलने वाली है। वाघा-अटारी बॉर्डर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के जवान भी परेड में हिस्सा लेते हैं। परेड शान को 6-6:30 बजे के बीच शुरू होती है, लेकिन अच्छी सीट चाहिए तो दोपहर को 2 से 2.30 बजे के बीच वाघा बॉर्डर के लिए निकल पड़ना होगा। यहां एंट्री बिल्कुल निःशुल्क होती है।


वाघा-अटारी बॉर्डर पर परेड देखने जाने से संबंधित सारी जानकारियों और किन बातों का ध्यान रखना होगा, इनके बारे में जानने के लिए हमारा ये आर्टिकट जरूर पढ़े :


जालियांवाला बाग

jalianwala bagh

बचपन में हम सबने जालियांवाला बाग हत्याकांड और अंग्रेज अफसर जनरल डायर की क्रुरता की कहानियां जरूर पढ़ी है। जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अमृतसर में हो, तो जालियांवाला बाग को अपनी आंखों से देखने का मौका कैसे गंवाया जा सकता है। लगभग 6.5 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस बाग में इतने सालों बाद भी आज हर तरफ उस नरसंहार के निशान देखने को मिलते हैं।

बाग के आसपास की दीवारों पर गोलियों के निशान देख सकते हैं। यहां आने के बाद ही आप समझ सकेंगे कि हिंदुस्तान के स्वतंत्रता संग्राम के उस काले अध्याय को जब रचा गया, तो लोगों ने कितना दर्द सहा होगा। यहां आप स्वतंत्रता संग्रामियों को श्रद्धांजलि भी दे सकते हैं।

नोट - यह बाग सुबह 6.30 से शाम 7.30 बजे तक खुला रहता है। कोई एंट्री फीस नहीं लगती है।

स्वर्ण मंदिर

golden temple

अमृतसर का नाम पूरी दुनिया में जिस स्वर्ण मंदिर की वजह से मशहूर है, उसे अनुभव किये बिना दिल्ली से अमृतसर जाने का टूर पूरा कैसे हो सकता है। 16वीं सदी में बना स्वर्ण मंदिर सिर्फ सिखों का प्रमुख धार्मिक स्थान ही नहीं है बल्कि यह भारत के उन चुनिंदा मेगा किचन में से एक है, जहां हर दिन सैंकड़ों-हजारों लोगों का खाना बनता है। सोने की चादर से ढंके स्वर्ण मंदिर में आपको कलाकारी का उत्कृष्ट नमूना भी देखने को मिलेगा।

यहां आपको न सिर्फ कांच पर की गयी कलाकारी बल्कि मीनाकारी और कई दूसरे कीमती पत्थरों का काम भी मिलेगा। स्वर्ण मंदिर में मिलने वाले आटा के हलवे का प्रसाद ऐसा है, जिसका स्वाद आप जिंदगी में कभी नहीं भूलना चाहेंगे। और हां, मौका मिले तो स्वर्ण मंदिर का लंगर जरूर खाएं, जहां भोजन पूरी तरह से शाकाहारी और सात्विक ही मिलता है।

दुर्गीयाना मंदिर

durgiana temple

अमृतसर में घूमने जाने वाले प्रमुख मंदिरों में दुर्गियाना मंदिर भी एक लोकप्रिय नाम है। इस मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर, शीतला मंदिर, दुर्गा तीर्थ और भी न जाने कितने नामों से पुकारा जाता है। इस मंदिर की वास्तुकला और शिल्पकला शानदार है। मंदिर के सामने मौजूद तालाब आपको स्वर्ण मंदिर की याद दिलाएगा, लेकिन यहीं तालाब इस मंदिर की सुन्दरता में चार चांद लगा देता है। हालांकि इस मंदिर का वातावरण स्वर्ण मंदिर से काफी अलग होता है।

नोट - यह मंदिर सुबह 6 से रात 10 बजे तक हर दिन खुला रहता है। मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता है।

अकाल तख्त

akal takht

यह सिखों का एक और प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर का महत्व भी सिखों में उतना ही है, जितना स्वर्ण मंदिर का है। अकाल तख्त मंदिर स्वर्ण मंदिर के ठीक विपरित में स्थित है। 5 मंजिला यह मंदिर पूरी तरह से सफेद रंगों में रंगा हुआ है। इसका गुंबद पर सोने जड़ा हुआ है, जो इसकी सुन्दरता को बढ़ाता है। स्वर्ण मंदिर में आने वाले बड़ी संख्या में पर्यटक और सिख धर्म में विश्वासी लोग, अकाल तख्त मंदिर में जरूर जाते हैं।

नोट - यह मंदिर दोपहर 2.30 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में कोई एंट्री शुल्क नहीं लगता है।

माता लाल देवी मंदिर

mata lal temple

20वीं सदी में बना यह मंदिर पर लोगों की आस्था बहुत गहरी है। यह मंदिर एक संत महिला, जिन्हें माता लाल देवी के नाम से जाना जाता था, को समर्पित है। दूसरी मंदिरों की तुलना में यह मंदिर काफी अलह है। यह मंदिर रंगीन कांच से सजाया हुआ है। मंदिर में कई गलियारे हैं, जो इधर-उधर घूमते हुए आगे बढ़ते हैं। इसके अलावा कई सुरंग हैं और एक गुफा भी है।

नोट - यह मंदिर में सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में कोई एंट्री शुल्क नहीं है।

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