पूरी दुनिया में संभवतः भारत ही एक ऐसा देश है जहां आप बर्फबारी, ज्वालामुखी, पहाड़ से लेकर घास के मैदानी इलाके सब कुछ देख सकेंगे। सर्दियों के मौसम में जब देश का एक हिस्सा बर्फबारी की वजह से ठिठुर रहा होता है तो देश का दूसरे हिस्से में लोग उस समय समुद्रतटों पर Chill करते हैं। शायद इसी लिए भारत की प्रसिद्धी एक बायोडाइवर्सिटी के तौर पर ही है।
उसी तरह सर्दियों के मौसम में भारत के कई हिस्से रंग-बिरंगी फूलों से ढंक जाते हैं। बड़ी संख्या में देश ही नहीं विदेशों से भी इन जगहों पर पर्यटक भी इन मौसमी फूलों का दीदार करने के लिए आते हैं।

हम आपको भारत के ऐसी 5 जगहों के बारे में बता रहे हैं, जहां आपको सर्दियों के शुरुआत से लेकर अंत तक मौसमी फूलों की रंग-बिरंगी चादर जरूर बिछी मिलेगी।
1. दिल्ली
इस लिस्ट की शुरुआत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करते हैं। हम सभी को पता है कि दिल्ली में कई ऐसे गार्डन हैं, जहां सर्दियों के मौसम में बड़े ही सुन्दर फूल खिलते हैं। इनमें मुगल गार्डन (जिसे अब राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान कहा जाता है), का नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध है। लगभग 15 एकड़ के क्षेत्र में फैला यह बगीचा हमारे देश के राष्ट्रपति भवन की शान कहलाता है।

यूं तो इस बगीचा में जनता को प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है लेकिन साल में दो बार, फरवरी-मार्च और अगस्त-सितंबर के समय इसे आम जनता के लिए खोला जाता है। इस साल अगर आप सर्दियों के मौसम में दिल्ली में रहने वाले हैं तो एक बार अमृत उद्यान में खिलने वाले कई प्रजातियों और रंगों की गुलाब, गेंदा, डहेलिया, ट्यूलिप आदि फूलों का दीदार जरूर करें।
2. ट्यूलिप गार्डन
मौसमी फूलों या सर्दियों के फूलों की जब बात होगी तो श्रीनगर का ट्यूलिप गार्डन उस लिस्ट में जरूर शामिल होगा...है न। श्रीनगर का इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन है। डल झील के ठीक सामने मौजूद इस ट्यूलिप गार्डन में पिछले कई सालों से बॉलीवुड की कई फिल्मों और सीरियल्स की शूटिंग हो चुकी है।

यहां हर साल हजारों की संख्या में ट्यूलिप के फूल खिलते हैं। मार्च के महीने में हर साल यहां ट्यूलिप फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है, जिस दौरान यहां बड़ी संख्या में देसी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं।
3. कास पठार
महाराष्ट्र का वैली ऑफ फ्लावर्स या कास पठार भी मौसमी फूलों के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। राज्य के सातारा जिले में स्थित इस पठारी क्षेत्र में मानसून की बारिश के बाद सिर्फ हरियाली ही नहीं बल्कि प्रकृति के अनगिनत रंग भी बिखरने लगते हैं। यहां छोटे आकार के कई फूल ऐसे खिलते हैं जिनका रंग आपको बड़ा ही चटकिला लगेगा, लेकिन वास्तव में ये जंगली फूलों के पौधे होते हैं।

इसके अलावा कास पठार का मुख्य आकर्षण ऑर्किड के फूल, फूलों की घनी झाड़ियां आदि होते हैं। क्या आप जानते हैं, कास पठार में आपको कई ऐसे पौधे भी देखने को मिलेंगे जो मांसभक्षी होते हैं। घबराईए नहीं, ये इंसानों को अपना शिकार नहीं बनाते हैं। ढूंढने पर छोटी-छोटी कीट-पतंगों को खाने वाले ये पौधे आपको कास पठार पर जरूर मिल जाएंगे।
4. नीलगिरी हिल्स
तमिलनाडु का नीलगिरी हिल्स भी मानसून की बारिश के बाद ही ताजगी से भर जाता है। क्या आपको पता है अगस्त-सितंबर के महीने में नीलगिरी हिल्स पर ही नीलाकुरिंजी फूल खिलते हैं। लेकिन ये फूल आपको हर साल देखने को नहीं मिलेंगे। बल्कि प्राकृतिक नियमानुसार 12 सालों में एक बार ये फूल खिलते हैं। तमिलनाडु के अलावा केरल का इडुक्की भी नीलाकुरिंजी फूलों के लिए विख्यात है।

हालांकि आप अगर इन फूलों को देखने के लिए अगले साल जाने की योजना बना रहे हैं तो शायद आपको थोड़ी निराशा होगी क्योंकि पिछली बार ही ये फूल खिल चुके हैं। इसलिए अब इन फूलों को दोबारा खिलते हुए देखने के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
5. फूलों की घाटी
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी (Valley of Flowers) एक UNESCO विश्व धरोहर है। यह एक शानदार जगह है, जहां तक पहुंचने के लिए ट्रैकिंग करने की जरूरत होती है। हर साल जून से लेकर सितंबर तक यहां मानो फूलों की चादर ही बिछ जाती है। केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ धाम या फिर पहाड़ों पर मौजूद किसी और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल की तरह ही फूलों की घाटी की ट्रैकिंग भी बड़ी संख्या में एडवेंचर के शौकिन करते हैं।

फूलों की घाटी में आपको कई प्रजातियों के फूल देखने को मिलेंगे जिसमें ऑर्किड, पॉपी और गेंदे के फूल बड़े ही आम हैं। अपनी प्राकृतिक सुन्दरता और धरोहरों के कारण उत्तराखंड की यह घाटी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है।



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