उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक कई एक्सप्रेसवे (Expressway) का निर्माण किया है, जिसमें से लगभग 6 एक्सप्रेसवे चालू हैं और 7 एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन हैं। इनमें से ही एक एक्सप्रेसवे है गंगा-एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway)। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अंतर्गत बन रही यह एक एक्सप्रेसवे राज्य के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे का निर्माण अगले साल होने वाले महाकुंभ मेले को ध्यान में रखकर ही किया जा रहा है। अभी तक कितना काम हुआ है और कितना बाकी रह गया है? क्या महाकुंभ-2025 से पहले तैयार हो जाएगा गंगा-एक्सप्रेसवे? क्या है इसका रूट और इसकी लंबाई?

क्या है लंबाई और कितना बाकी है काम?
गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण महाकुंभ 2025 को ध्यान में रखते हुए ही किया जा रहा है। मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 594 किमी है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बारिश की वजह से एक्सप्रेसवे निर्माण के काम में काफी परेशानियां आ चुकी हैं। बताया जाता है कि एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई में से 80 प्रतिशत हिस्से में मिट्टी भराई का काम पूरा किया जा चुका है।
यानी 594 किमी में से 300 किमी की लंबाई (मेरठ से उन्नाव ) में मिट्टी भराई का काम पूरा हो चुका है। बाकी के लगभग 150 किमी का काम बारिश की वजह से पूरा नहीं हो सका था, जिसे अब जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिशें की जा रही हैं।
क्या महाकुंभ 2025 से पहले तैयार हो जाएगा एक्सप्रेसवे?
गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण ही महाकुंभ मेले को ध्यान में रखते हुए ही किया जा रहा है। इसलिए UPEIDA की पूरी कोशिश है कि वह इसे 31 दिसंबर तक चालू कर दें। News18 की एक रिपोर्ट में UPEIDA की वेबसाइट के हवाले से बताया गया है कि मुख्य कैरिजवे में 81% मिट्टी का काम पूरा हो चुका है। डेंस बिटुमिनस मैकाडम बिछाने का 54 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है।
एक्सप्रेसवे के रास्ते में आने वाली छोटी-बड़ी पुल-पुलिया आदि के 1481 संरचनाओं में से 1295 का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं UPEIDA के अतिरिक्त सीईओ श्रीहरी शाही ने मीडिया से बात करते हुए आश्वस्त किया कि एक्सप्रेसवे को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी प्रयास किये जा रहे हैं।
क्या है गंगा एक्सप्रेसवे का रूट?

594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक जाएगी। यह राज्य के 12 जिलों के 518 गांवों से होकर गुजरेगी। बताया जाता है इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से बन जाने के बाद मेरठ से प्रयागराज के बीच की दूरी को महज 6 घंटों में ही पूरा किया जा सकेगा।
इस एक्सप्रेसवे पर 120 किमी की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेंगी। बताया जाता है कि शुरुआत में इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 6 लेन में किया जा रहा है। लेकिन भविष्य में अगर गाड़ियों का ट्रैफिक बढ़ता है तो इसे बढ़ाकर 8 लेन का भी किया जा सकता है। कई चरणों में बन रहे गंगा एक्सप्रेसवे का पहला चरण में जिन शहरों और जिलों से होकर ये गुजरेगा वो हैं :
- मेरठ
- हापुड़
- बुलंदशहर
- अमरोहा
- संभल
- बदायूं
- शाहजहांपुर
- हरदोई
- उन्नाव
- रायबरेली
- प्रतापगढ़
- प्रयागराज
इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में गंगा एक्सप्रेसवे को प्रयागराज से आगे मिर्जापुर के रास्ते बिहार की सीमा पर मौजूद बलिया तक बढ़ाया जाएगा। ऐसा करने से गंगा एक्सप्रेसवे का दूसरा चरण 350 किमी लंबा हो जाएगा और दोनों चरणों को मिलाकर इसकी कुल लंबाई 950 किमी हो जाएगी। प्रयागराज से आगे बलिया तक यह एक्सप्रेसवे 5 और जिलों से गुजरेगा जिसमें मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया शामिल है। बलिया तक बढ़ा देने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बन जाएगा।
कितनी लागत?
मिली जानकारी के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का कुल बजट ₹56,000 करोड़ है। इसके पहले चरण के निर्माण में लगभग ₹37,350 करोड़ की आनुमानिक लागत आएगी। इसमें से लगभग ₹9,500 करोड़ सिर्फ भूमि अधिग्रहण पर ही खर्च हुए हैं। गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार बलिया तक हो जाने से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार वालों को भी बलिया के रास्ते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक का सफर आसान हो जाएगा। बिहारवासी आसानी से सड़क मार्ग से बलिया के रास्ते दिल्ली से जुड़ सकेंगे।



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