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बड़ा रंगीन होता है गोवा का शिग्मोत्सव - होली के रंगों के साथ ढोल-नगाड़ों की गूंज, कब होगा आयोजित!

होली के मौके पर गोवा में आयोजित होने वाला शिग्मो फेस्टिवल यहां पुर्तगाली औपनिवेशक इतिहास से अलग अपने आप में कोंकणी विरासत को समेट कर एक अलग ही पहचान रखता है। यह कोंकण की स्थानीय संस्कृति और प्रथाओं को बढ़ावा देने वाला एक उत्सव है।

इस फेस्टिवल का केंद्र बिंदू विभिन्न हिंदु पौराणिक कथाएं, उन कहानियों के आधार पर नृत्य नाटिका और लोककथाएं हैं जो पुर्तगाली-उपनिवेश स्थापित होने से काफी पहले की रीति-रिवाजों आदि को दर्शाती हैं। यह वसंत ऋतु के आगमन का त्योहार है।

क्या है ऐतिहासिक महत्व

भारत के अधिकांश पर्व-त्योहारों की तरह ही गोवा के शिग्मोत्सव का भी ऐतिहासिक महत्व है। इस उत्सव को दशहरा के बाद लड़ने के रवाना होने वाले उन योद्धाओं का स्वागत करने के लिए मनाया जाता था, जो आक्रमणकारियों से युद्ध कर अपनी मातृभूमि की रक्षा किया करते थे।

जब योद्धा लड़ाई से वापस लौटते थे, तो उनके सम्मान नृत्य और गीत का आयोजन किया जाता था, जिसने इस उत्सव की भव्यता कई गुना बढ़ा दी। वहीं दूसरी ओर शिग्मो उत्सव सर्दियों के खत्म होने और सर्दियों के फलों के पकने का भी प्रतिक माना जाता है।

शिग्मो उत्सव के दो प्रकार हैं :

  • धाक्तो शिग्मो (छोटा शिग्मो), जिसे मुख्य रूप से किसान, मजदूर और ग्रामीण मनाते थे।
  • व्हाडलो शिग्मो (बड़ा शिग्मो), इसे व्यापक रूप से मनाया जाता था, जिसमें सभी शामिल होते थे।

कब मनाया जाता है शिग्मोत्सव

गोवा में शिग्मोत्सव की शुरुआत होली के दिन से होती है। यह 14 दिनों तक चलने वाला एक उत्सव है। यह उत्सव एक कार्निवल की तरह ही होता है जिसमें गोवा की स्थानीय संस्कृति और लोककथाओं के आधार पर झांकियां तैयार की जाती हैं। इस साल गोवा में शिग्मोत्सव की शुरुआत 26 मार्च से हो रही है जो 8 अप्रैल 2024 तक चलेगी।

कहां देख सकते हैं शिग्मोत्सव

शिग्मोत्सव का मुख्य आकर्षण 15 दिनों तक गोवा के विभिन्न इलाकों में निकाली जाने वाली जुलूस होती है जिसमें गोवा व मराठा संस्कृति और पौराणिक कथाओं को दिखाया जाता है। यह जुलूस पोंडा से पणजी के बीच निकाली जाती है। इस साल जिन 14 जगहों पर शिग्मोत्सव कार्निवल देख सकेंगे वो निम्न हैं -

  • पोंडा
  • कैलंगुट
  • सैंक्वलम
  • वालपोई
  • पणजी
  • पोरवोरिम
  • बिचोलिम
  • पेरनेम
  • कैनाकोना
  • वास्को
  • शिरोडा/कार्चोरेम
  • क्यूपेम/धारबंदोरा
  • मडगांव
  • मापुसा/संगुएम
  • कनकोलिम

कैसे मनाया जाता है शिग्मोत्सव

शिग्मोत्सव के पहले दिन गांव के देवता को स्नान करवाकर उन्हें अच्छी तरह से सजाया जाता है। उत्सव के 5वें दिन रंग पंचमी होती है, जिस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं। इस दिन से ही कार्निवल या जुलूस निकालना शुरू होता है, जिसमें लोग मंदिर परिसर में नाचते-गाते और गुलाल उड़ाते हैं। लोग रंग-बिरंगे परिधानों में तैयार होकर हाथों में बड़े-बड़े झंडे लेकर इस जुलूस का हिस्सा बनते हैं।

इस दौरान कुछ लोग राजा-महाराजा जैसे पोशाक में भी तैयार होते हैं जिनके हाथों में कृत्रिम तलवारें भी होती हैं। यह जुलूस जिन इलाकों से भी गुजरता है वह ढोल, ताशा, बांसुरी, नगाड़ों से गूंजने लगता है। गोवा के इस देसी कार्निवल के दौरान लोग घोडे-मोरनी (Horse Dance), फुगड़ी, रोम्माटमेल आदि डांस करते हैं। यह देखने में इतना सुन्दर और रंगीन होता है कि बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

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