गोवा एक लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, जहां हर साल लाखों लोग घूमने और Chill करने जाते हैं। गोवा घूमने आने वाले पर्यटकों में सबसे अधिक संख्या यंगस्टर्स की होती है, जो यहां क्लब और बीच पार्टी के लिए आते रहते हैं। यहां कोंकणी और गोवन व्यंजनों के लिए उत्तर भारतीय व्यंजन भी काफी फेमस है।
खास तौर पर समुद्र तट के रेस्तरां में सर्दियों के मौसम में गोभी मंचूरियन Must Have व्यंजन बन जाता है। लेकिन अब गोवा के किसी भी रेस्तरां में गोभी मंचूरियन नहीं मिलेगा। इसे गोवा में बैन कर दिया गया है।
क्यों बैन हुआ गोभी मंचूरियन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मापुसा म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (MMC) ने पिछले महीने यहां मिलने वाले गोभी मंचूरियन के स्टॉल्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। कहा जा रहा है कि स्टॉल्स पर गोभी मंचूरियन बड़े ही अनहाईजैनिक तरीके से पकाया और बेचा जा रहा है। गोभी मंचूरियन को बैन करने की वजहों के बारे में दावा किया जा रहा है कि इसमें जिस सॉस का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें कृत्रिम रंग होते हैं।
इसके अलावा वॉशिंग पाउडर और बैटर को तैयार करने में कुछ ऐसे पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है जिससे गोभी तो लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है लेकिन वह काफी ज्यादा अनहेल्दी बन जाती है। इस वजह से गोभी मंचूरियन को बैन करने का फैसला लिया गया है।
चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत में कौन-कौन से व्यंजन बैन हैं :
न पिज्जा, न बर्गर और न ही कोई जंक फूड
जंक फूड बच्चों के स्वास्थ्य और उनके विकास के लिए अस्वास्थकर होते हैं। इसलिए पंजाब के स्कूल और राजस्थान के कई कॉलेजों के कैंटिन या परिसर के आसपास भी जंक फूड को बेचने पर पूरी तरह से पाबंदी लगायी गयी थी। हालांकि महिला व शिशु विकास मंत्रालय के इस फैसले का विरोध भी काफी किया गया था लेकिन मंत्रालय ने बैन को लागू करने का अपना फैसला बनाए रखा। मंत्रालय का कहना था कि बैन लगाने का मुख्य उद्देश्य युवाओं और बच्चों को शुरुआती दौर से ही स्वास्थकर खाद्य-पदार्थओं की आदत लगवाना है।
बिस्कुट, वेफर और च्वींगम पर भी बैन
क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों के पसंदीदा चिप्स, वेफर, बिस्कुट या फिर च्वींगम तक पर बैन लग सकता है? जी हां, हिमाचल प्रदेश के हाई कोर्ट के आदेश पर वहां चिप्स, वेफर्स, बिस्कुट, नमकीन, कैंडी, च्वींगम, आईसक्रीम, चॉकलेट, नूडल्स, सॉफ्ट ड्रिंक, फ्रुट जूस और केक जैसे खाद्य पदार्थ। पर जरा रुकिए, यहां एक ट्विस्ट भी है और वह ये है कि इन सभी खाद्य पदार्थों को प्लास्टिक या नॉन-बायोडिग्रेडेबल पैक्स में बेचने पर पाबंदी है।
मांसाहार पर बैन

भारत में कई शहरों को धार्मिक शहर होने का टैग मिला हुआ है। उन शहरों में मंदिरों के निर्धारित दायरे के बाद मांस, मछली या अंडा आदि बेचने की अनुमति होती है। लेकिन गुजरात के पालीताना को पूरी तरह से शाकाहारी शहर घोषित किया जा चुका है। यह शहर जैन धर्म का प्रमुख धार्मिक शहर है। 2014 के जून माह में करीब 200 जैन धर्म के अनुयायीयों ने भूख हड़ताल की थी, जिसमें उन्होंने इस धार्मिक शहर में मांसाहारी खाद्य-पदार्थों को नहीं बेचने की मांग उठायी थी। गुजरात सरकार ने बाद में इसे स्वीकार भी कर लिया था।
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फोई ग्रेस
जुलाई 2014 में सरकार ने फोई ग्रेस के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया। यह मूल रूप से पूर्वी देशों में मुज़ की तरह खाया जाता है। लेकिन इसे तैयार करने के लिए जानवरों की हत्या और उनके खिलाफ होने वाले हिंसात्मक अत्याचारों के खिलाफ पशु सुरक्षा संस्थाओं की तरफ से विरोध जताने के बाद सरकार ने इसके आयात पर बैन लगा दिया।



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