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गजब! भू स्खलन से 4-5 घंटे पहले जानकारी देगा GSI का नया ऐप, पहाड़ों पर जिंदगी अब होगी आसान

बारिश का मौसम या मानसून के आते ही पहाड़ों की मुश्किल जिंदगी और भी मुश्किल भरी बन जाती है। मानसून या बारिश के मौसम में पर्यटक भी पहाड़ों पर जाने से कतराते हैं क्योंकि न जाने कब तेज बारिश अपना असर दिखाएगी और पहाड़ों सरकते हुए नीचे आने लगेंगे। जी हां, भू स्खलन। पहाड़ों से नीचे आने वाला चट्टानों और पत्थरों का मलबा। पिछले कुछ दिनों से जैसा हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में देखा गया है।

पहाड़ों से टूट कर नीचे आने वाले चट्टानों के मलबे की वजह से न जाने कितनी जगहों पर सड़कें टूट-फूट गयी, हजारों की तादाद में पर्यटक जहां-तहां फंस गये और पहाड़ों पर रहने वाले आम लोगों की जिन्दगियां भी मुश्किलों भरी बन गयी।

landslide

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब भू स्खलन से लगभग 4-5 घंटे पहले ही ऐप के माध्यम से इसकी जानकारी मिल जाएगी। भारतीय जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के वैज्ञानिकों ने ऐसा ही ऐप और पोर्टल लॉन्च किया है। GSI के वैज्ञानिकों ने शुक्रवार (19 जुलाई) को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लैंडस्लाइड के बारे में पूर्व सूचना देने वाला ऐप 'भूस्खलन' और वेब पोर्टल 'भू संकेत' को लॉन्च किया। इस मौके पर केंद्रीय कोयला मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने कोलकाता के सॉल्टलेक सेक्टर 5 में मौजूद GSI के ऑफिस में नेशनल लैंडस्लाइड फोरकास्टिंग सेंटर (NLFC) का भी उद्घाटन किया।

कैसे काम करेगा यह ऐप?

मोबाइल ऐप 'भू स्खलन' और वेब पोर्टल 'भू संकेत' लैंडस्लाइडिंग से कुछ घंटे पहले यह संकेत देना शुरू करेगा कि किन इलाकों में भू स्खलन होने की संभावना है या ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं। कोलकाता में नया खुला NLFC मध्यम या शॉर्ट रेंज वाले भू स्खलन की भविष्यवाणी देगा, जिसे मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा।

landslide in chamoli himachal pradesh

इस बाबत Times of India की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार GSI ने 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 4.3 लाख वर्गकिमी के ऐसे क्षेत्र को चिह्नित करने का काम पूरा कर लिया है जहां भू स्खलन होने की संभावनाएं ज्यादा है। यह जानकारी क्षेत्रीय स्तर पर प्रोटोटाइप तकनीक के माध्यम से बारिश की वजह से होने वाले भू स्खलन की जानकारी देगा, जिससे लैंडस्लाइड होने की संभावनाओं की भविष्यवाणी की जा सकेगी।

किन-किन राज्यों में काम करेगा यह ऐप-पोर्टल?

GSI के डेप्यूटि डायरेक्टर शैबाल घोष के हवाले से बताया गया कि सबसे पहले पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और तमिलनाडु के नीलगिरी के लिए मानसून 2020 के समय से प्रयोगात्मक रूप से भू स्खलन की भविष्यवाणियां की जा रही थी। लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाया गया है जिसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और केरल के 16 जिलों को शामिल किया गया है। हालांकि अभी तक अरुणाचल प्रदेश, जहां सबसे ज्यादा भू स्खलन की घटनाएं घटती हैं, को इसमें शामिल नहीं किया जा सका है।

उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मदद की वजह से धीरे-धीरे इस भविष्यवाणी मॉडल को विकसित किया जा रहा है। एक परफेक्ट मॉडल को विकसित होने में लगभग 10 और सालों का वक्त लग सकता है लेकिन तब हम इंतजार नहीं कर सकते हैं। इसलिए हमने बीच का रास्ता अपनाया है और हमने गणित मॉडल को विकसित किया और इसे लगातार विकसित करने का काम कर रहे हैं।

landslide forecast app

घोष ने बताया कि इस ऐप पर कलर कोड चेतावनियां आएंगी। अगर कोई परिवार मानसून के समय, जब सबसे ज्यादा भू स्खलन की घटनाएं घटती हैं, घूमने या किसी काम से सिलिगुड़ी से दार्जिलिंग या सिक्किम की ओर जा रहा है तो वे इस ऐप के माध्यम से भू स्खलन की संभावनाओं के बारे में पहले से जान सकेंगे। अगर ऐप में कोई इलाका हरा दिखा रहा है, तो भू स्खलन की संभावनाएं काफी कम है।

अगर ऑरेंज या लाल है तो अगले 2 दिनों के अंदर भू स्खलन होने की संभावना हैं। दरअसल, यह ऐप या NLFC भू स्खलन से पहले भूमि में होने वाली कंपन का अध्ययन कर, भू स्खलन की संभावनाओं की भविष्यवाणी करता है। बताया जाता है कि फिलहाल यह ऐप सिर्फ भू संकेत पोर्टल पर ही उपलब्ध है लेकिन जल्द ही यह गूगल प्ले स्टोर से भी डाउनलोड किया जा सकेगा।

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