Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »गुजरात की वो लाजवाब ऐतिहासिक संरचनाएं जिन्हें देखने के लिए यहां खींचे चले आते हैं पर्यटक

गुजरात की वो लाजवाब ऐतिहासिक संरचनाएं जिन्हें देखने के लिए यहां खींचे चले आते हैं पर्यटक

गुजरात में कई मशहूर पर्यटन स्थल हैं, जिनका अपना अलग ही ऐतिहासिक महत्व है। कोई कच्छ के रण का दीवाना है तो किसी को हड़प्पा-मोहनजोदाड़ो सभ्यात की लोथल और धौलावीरा के इतिहास में झांकना पसंद करता है। लेकिन जब भी आप नजरें उठाकर देखेंगे सबसे पहले गुजरात में कुछ ऐसी शानदार संरचनाएं दिखाई देंगी जो आपको सम्मोहित करने के लिए काफी होती हैं।

इन शानदार संरचनाओं में मंदिर से लेकर किले और बावड़ियां तक शामिल हैं। आज हम आपको गुजरात की इन्हीं लाजवाब संरचनाओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में देसी और विदेशी पर्यटक गुजरात में खींचे चले आते हैं :

1. लक्ष्मी विलास पैलेस

वडोदरा में स्थित लक्ष्मी विलास पैलेस शाही गायकवाड़ परिवार का घर है। इसका निर्माण लगभग 1890 में महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ III ने करवाया था और इसे पूरा होने में करीब 12 सालों का समय लग गया था। बताया जाता है कि यह शानदार पैलेस 700 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है यानी ब्रिटेन के बकिंग्घम पैलेस से भी यह कई गुना ज्यादा बड़ा है।

पैलेस के निर्माण में उस समय करीब 60 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस पैलेस में 170 से ज्यादा कमरे हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा निजी निवास स्थान कहलाता है। इंडो-सारसेनिक शैली में बने इस पैलेस में आज भी गायकवाड़ परिवार के सदस्य रहते हैं।

2. अंबाजी मंदिर

गुजरात-राजस्थान की सीमा पर स्थित अम्बाजी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान श्रीराम भी दर्शन और पूजा करने आ चुके हैं और भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन इसी मंदिर में करवाया गया था। मान्यता है यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है, लेकिन कई बार इसके जीर्णोद्धार का काम भी किया गया है। सफेद रंग के संगमरमर से बनी इस मंदिर की शोभा देखते ही बनती है। मंदिर के शिखर पर 358 स्वर्ण कलश हैं जो इसकी मंदिर को और भी भव्य बना देते हैं। मंदिर के शिखर पर पहुंचने के लिए 999 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।

3. महाबत का मकबरा

जूनागढ़ में स्थित मोहब्बत का मकबरा आपको आगरा के ताजमहल की याद दिलाएगा। यह इमारत इंडो-इस्लामिक और फ्रेंच तीनों ही वास्तुकला का मिश्रण है। इतिहासकारों का कहना है कि इसका निर्माण 1878 में महाबत खानजी के आदेश पर शुरू हुआ था।

महाबत खानजी जूनागढ़ के छठवें नवाब थे। लेकिन इसका निर्माण उनके उत्तराधिकारी बहादुर कांजी ने करवाया था। इस मकबरे के फर्श से लेकर लिंटेल तक फ्रेंच वास्तुकला है लेकिन दरवाजे और स्तंभों में गॉथिक वास्तुकला देखने को मिलेगी।

4. रानी की वाव

गुजरात के पाटन शहर को 'रानी की वाव' के कारण ही पूरी दुनिया में प्रसिद्धि मिलती है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल रानी की वाव एक बावड़ी है, जिसकी वास्तुकला लोगों को हैरान कर देती है। सरस्वती नदी के किनारे बनी 7 तलों वाली इस बावड़ी की गहराई 27 मीटर, लंबाई 64 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर है। इस बावड़ी में 30 किमी लंबी एक सुरंग भी है जो पाटन से सिद्धपुर में जाकर निकलती है।

कहा जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण वर्ष 1063 में सोलंकी राजवंश की रानी उदयमती ने अपने स्वर्गवासी पति राजा भीमदेव की याद में करवाया था। बावड़ी की सीढ़ियों पर पौराणिक और धार्मिक कहानियों को बड़ी ही खूबसूरती के साथ उकेरा गया है। कहा जाता है कि बावड़ी के पानी में औषधीय गुण हुआ करते थे जिससे बुखार और दूसरी बीमारियां ठीक की जाती थी।

5. द्वारकाधीश मंदिर

भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह मंदिर गुजरात के द्वारका में स्थित है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लगभग 2500 साल पहले भगवान श्रीकृष्ण के परपोते वज्रनाभ ने करवाया था। कहा जाता है कि वर्ष 1472 में द्वारकाधीश मंदिर को बड़े पैमाने पर विनाश का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में द्वारका में जो मंदिर की संरचना है वह 16वीं सदी में चालुक्य वास्तुकला से प्रेरित है, जो मूल मंदिर से काफी अलग है।

यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 50 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। मुख्य मंदिर 5 मंजिला इमारत है, जिसे सहारा देने के लिए कुल 72 खंभे हैं। दीवारें काफी मोटी है और उनमें घनी नक्काशी की गई है। इन नक्काशियों में पौराणिक प्राणियों और कई लोककथाओं का उल्लेख किया गया है। मंदिर के शिखर पर 52 गज का झंडा लहराता है जिसपर सूर्य और चंद्रमा के प्रतीक बने हुए हैं।

6. सोमनाथ मंदिर

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर गुजरात के वेरावल के प्रभास पाटन में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण हजारों साल पहले किया गया था लेकिन कई बार इसे नष्ट भी किया गया है। सोमनाथ मंदिर को सबसे ज्यादा नुकसान महमूद गजनवी ने वर्ष 1024-25 में पहुंचाया था, जब उसने अपने 5000 साथियों के साथ इस मंदिर पर हमला किया था। कहा जाता है कि मंदिर की रक्षा के लिए हजारों आम लोग निहत्थे ही दौड़ पड़े थे जिन्हें गजनवी और उसके साथियों ने मौत के घाट उतार दिया था।

कहा जाता है गजनवी ने उस समय इस मंदिर से दुर्लभ शिवलिंग, लाल चंदन से बना मंदिर का मुख्य दरवाजा, 6 टन सोना, 2 मन सोने की जंजीर समेत कई कीमती सामान लुट कर अफगानिस्तान ले गया था, जिसकी वर्तमान कीमत आज 5 अरब से भी ज्यादा बतायी जाती है। इसके अलावा सोमनाथ मंदिर पर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने भी आक्रमण कर उसे लुटा था।

More News

Read more about: gujarat travel
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+