पर्यटन के क्षेत्र में गुजरात में पिछले कई सालों में कई विकास हुए हैं, जिनकी वजह से इसका नाम वैश्विक स्तर पर रोशन हो चुका है। हाल ही में 26 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बड़े ही धुमधाम से मनायी गयी। तो क्यों न गुजरात में श्रीकृष्ण से ही जुड़े किसी ऐसी जगह के बारे में बात की जाए जिसका विकास कार्य जल्द ही शुरू होने वाला है। जी नहीं, हम श्रीकृष्ण के राज्य द्वारका के बारे में आज बात नहीं कर रहे हैं।
हम बात करने वाले हैं श्रीकृष्ण के निवास बेट द्वारका के बारे में। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुजरात के इस छोटे से द्वीप बेट द्वारका आते रहते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने बेट द्वारका के सुन्दरीकरण और विकास कार्यों पर ध्यान देने का फैसला लिया है।

बता दें, इस साल के शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की मुख्य भूमि से बेट द्वारका को जोड़ने वाली सुदर्शन सेतु का उद्घाटन किया था जो भारत की सबसे लंबी केबल ब्रिज है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार बेट द्वारका का विकास 3 चरणों में किया जाएगा। इसके पहले चरण के लिए ₹150 करोड़ आवंटित किये गये हैं।
इन तीनों चरणओं में द्वारकाधीश मंदिर परिसर, उसके आसपास का इलाका और समुद्रतटिय क्षेत्रों का विकास किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावे के अनुसार गुजरात के पर्यटन विभाग ने अहमदाबाद की एक जानी-मानी कंपनी को बेट द्वारका के विश्वस्तरीय विकास का मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
कौन से चरण में होगा कितना विकास
पहला चरण (₹150 करोड़ रुपए आवंटित)
- द्वारकाधीश मंदिर
- सड़कों का सुन्दरीकरण
- हेरिटेज स्ट्रीट का विकास
- शंख नारायण मंदिर और तालाब का विकास
- नॉर्थ बीच और पब्लिक बीच का विकास
- टूरिस्ट विजिटर सेंटर और हाट बाजार का विकास
- हिलॉक पार्क का व्यूइंग डेक समेत विकास
बेट द्वारका के दूसरे चरण का विकास
- हनुमान मंदिर और समुद्रतटों का विकास
- अभय माता मंदिर और सनसेट पार्क
- नेचर और मरीन इंटरप्रेशन सेंटर
- कौशल विकास सेंटर
- कम्यूनिटी लेक का विकास
- सड़क और संकेत

तीसरे और अंतिम चरण में बेट द्वारका विकास परियोजना
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
- कम्यूनिटी लेक का विकास
- लेक अराईवल प्लाजा
₹150 करोड़ की लागत से होगा पहले चरण का विकास
बेट द्वारका के पहले चरण के विकास में मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों का विकास किया जाएगा। मंदिर में प्रवेश के चार दिशाओं में अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाएं जाएंगे। तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए मंदिर में विभिन्न सामानों, लोकल क्राफ्ट, भोजन के लिए स्टॉल और दूसरी दुकानें भी बनायी जाएंगी।
जूते और मोबाइल रखने के लिए लॉकर, प्रसाद वितरण केंद्र और सार्वजनिक शौचालयों के साथ-साथ अत्याधुनिक सुविधाओं वाले भोजनालय, प्रतिक्षाकक्ष, भजन-कीर्तन के लिए 2 हॉल का निर्माण भी पहले चरण में ही किया जाएगा।
नॉर्थ बीच
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार बेट द्वारका के उत्तरी समुद्र तट की प्राकृतिक और पर्यावरण की सुन्दरता को ध्यान में रखते हुए यहां विकास के लिए डिजाइन तैयार किया गया है। समुद्र तट पर पार्किंग की सुविधा, फूड स्टॉल, बच्चों के खेलने के उपकरण, शौचालय आदि की सुविधा आदि उपलब्ध करवायी जाएगी।
बता दें, बेट द्वारका का नॉर्थ बीच सर्दियों के मौसम में डॉल्फिन देखने के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बहुत सुन्दर दिखाई देता है। इस बीच पर खास तौर पर एक विशेष शंख पदम पाया जाता है जिस कारण इसका नाम पदम बीच भी है।

टूरिस्ट विजिटर सेंटर
जानकारी के अनुसार सुदामा सेतु से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर टूरिस्ट विजिटर सेंटर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियों से पर्यटक रु-ब-रु हो सकेंगे। यहां वेटिंग एरिया, शौचालय, लॉकर की सुविधा और लजीज गुजराती व्यंजन परोसने वाला एक रेस्तरां और साथ में एक हाट भी बनाया जाएगा, जहां से पर्यटक स्थानीय स्तर पर बनी चीजों को खरीद सकेंगे।
सड़कों का होगा विकास
बेट द्वारका में कई ऐतिहासिक मंदिर हैं। इन मंदिरों को जोड़ने वाली हेरिटेज सड़क पर मुख्य रूप से द्वारकाधीश मंदिर, शंख नारायण मंदिर और हनुमान दांडी मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों को जोड़ने वाली सड़क विकास हेरिटेज की थीम पर किया जाएगा। सड़कों के दोनों ओर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा भित्ति चित्र, बैठने की सुविधाएं आदि भी बनायी जाएंगी ताकि यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों को ऐतिहासिक अनुभव हो सकें।
हिलॉक पार्क
बेट द्वारका का हिलॉक पार्क मुख्य रूप से ऐसी जगह है जहां से लोग सूर्योदय और सूर्यास्त को एंजॉय करते हैं। मास्टर प्लान के अनुसार इस स्थान को पब्लिक पार्क के तौर पर विकसित किया जाएगा जहां से सुदामा सेतु साफ-साफ दिखाई देगा। इसके साथ ही यहां भी शौचालय, वॉकवे, फूड स्टॉल आदि का सुविधाएं तैयार की जाएंगी। बताया जाता है कि बेट द्वारका को विश्वस्तरीय धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनायी गयी है।

बता दें, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बेट द्वारका को ही मूल द्वारका नगरी मानी जाती है जिसे श्रीकृष्ण ने बसाया था। कहा जाता है कि बेट द्वारका के पास समुद्र के अंदर जो नगर डूबा हुआ मिला है उसकी वैज्ञानिक जांच करने पर वह हड़प्पा सभ्यता युग से मौर्य युग के बीच का बताया जाता है। द्वारका से महज 32 किमी की दूरी पर बेट द्वारका एक छोटा सा द्वीप है, जहां आने के लिए पहले नाव का सहारा लिया जाता था लेकिन अब सुदर्शन सेतु से होकर लोग आसानी से यहां पहुंच जाते हैं।
मंदिर में भीड़ न हो इसलिए बेट द्वारका मास्टर प्लान में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग दर्शन की लाइनें बनायी जाएंगी। मास्टर प्लान को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि दिव्यांगों को कोई परेशानी न हो। पेय जल की व्यवस्था, बैठने की सुविधा, श्रीकृष्ण की जीवनी पर आधारित चित्रों से सजाया जाएगा। मास्टर प्लान के लिए टेंडरिंग का काम चल रहा है।



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