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द्वारकाधीश मंदिर से लेकर भड़केश्वर महादेव का मंदिर तक, द्वारका जाएं तो इन जगहों पर जरूर घूमें

श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका...जो बड़ा चार धाम में से एक है। गुजरात के द्वारका में भगवान कृष्ण को समर्पित द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के लिए हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आपने भी गुजरात के इस समुद्रतटीय शहर द्वारका में घूमने जाने की योजना बनायी है, तो आपको बता दें - यहां सिर्फ द्वारकाधीश का मंदिर ही नहीं बल्कि ऐसी कई और भी जगहें हैं जिन्हें मिस नहीं किया जा सकता है।

द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर के अलावा भड़केश्वर महादेव का मंदिर भी है जिसकी अपनी अलग ही खासियत है। इस मंदिर के साथ-साथ द्वारका का बेट द्वारका द्वीप भी है जहां बिना घूमें द्वारकाधीश मंदिर का दर्शन ही अधूरा माना जाता है। पर इतना क्यों महत्वपूर्ण है यह द्वीप?

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द्वारका में घूमने वाली जगहें

1. द्वारकाधीश मंदिर

द्वारका में घूमने की सबसे पहली जगह है द्वारकाधीश मंदिर। गोकुल का नटखट और चंचल कान्हा द्वारका में आकर धीर और गंभीर द्वारकाधीश बना था। मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण ने लगभग 5000 साल पहले द्वारका नगरी को बसाया था। हालांकि भगवान कृष्ण द्वारा बसायी गयी द्वारका नगरी समुद्र में समा चुकी है लेकिन कालांतर में श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रभान ने द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण करवाया था।

इस मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार भी किया गया है। यह मंदिर एक 7 मंजिला इमारत है, जिसके 4 दिशाओं में 4 द्वार हैं। मंदिर के उत्तर में मोक्ष द्वार और दक्षिण में स्वर्ग द्वार प्रमुख हैं। मंदिर के शिखर पर 84 फुट की बहुरंगी धर्मध्वजा लहराती है जिसे दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) बदला जाता है। मंदिर के गर्भगृह में श्यामवर्ण की श्रीकृष्ण की चतुर्भूज मूर्ति सिंहासन पर विराजमान हैं।

dwarkadhish temple

2. देवी रुक्मिणी का मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर से 2 किमी की दूरी पर मौजूद है देवी रुक्मिणी का मंदिर। यह मंदिर तत्कालिन द्वारका नगरी के बाहर स्थित है। देवी रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी थी। कहा जाता है ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण देवी रुक्मिणी को द्वारका नगरी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी।

इसलिए उनका मंदिर द्वारकाधीश मंदिर से दूर बनाया गया। इस मंदिर की वास्तुकला बेहद शानदार है। इस मंदिर के अंदर कई और मंदिर भी हैं, जिनमें बलराम-रेवती, सत्यभामा, जाम्वंती आदि स्थापित हैं। रुक्मिणी देवी का यह मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है और रात 9.30 बजे बंद हो जाता है।

3. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

गुजरात के सौराष्ट्र तट पर स्थित गोमती द्वारका और बेट द्वारका द्वीप के बीच में स्थित है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर, जो भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक ही नहीं बल्कि द्वादश ज्योतिर्लिंग का पहला है। इस मंदिर में भगवान शिव की 80 फीट ऊंची एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। महाशिवरात्रि के मौके पर यहां भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है।

4. भड़केश्वर महादेव का मंदिर

जी नहीं, यहां महादेव भड़के हुए यानी गुस्से में नहीं रहते हैं। इस मंदिर की खासियत इसकी भौगोलिक स्थिति है। भड़केश्वर महादेव का मंदिर अरब सागर के किनारे स्थित है जिसका शांत वातावरण देखने लायक स्थान है। कहा जाता है कि यह मंदिर भी लगभग 5000 साल पुराना है, जो एक स्वयंभू शिवलिंग है।

हर साल मानसून के महीने में इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग समुद्र में डूब जाता है। भक्त इसे प्रकृति द्वारा किया जाने वाला अभिषेक मानते हैं। भड़केश्वर महादेव का मंदिर सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है।

5. बेट द्वारका

श्रीकृष्ण ने अगर द्वारका पर शासन किया था तो बेट द्वारका में उनका निवास स्थान था। बेट द्वारका एक छोटा सा द्वीप है, जो द्वारका के पास ही मौजूद है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बेट द्वारका ही वह जगह है जहां भगवान हनुमान पहली बार अपने बेटे मकरध्वज से मिले थे। कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति ने द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने के बाद बेट द्वारका जाकर दर्शन नहीं किया तो द्वारका की उसकी यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी।

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6. सुदर्शन सेतु

गुजरात की मुख्य भूमि से कच्छ की खाड़ी को जोड़ने वाला ओखा-बेट द्वारका सुदर्शन सेतु भी इन दिनों द्वारका के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस सेतु का निर्माण ₹978 करोड़ की लागत से किया गया है। 4 लेन वाला यह एक केबल ब्रिज है, जिसपर लोग पैदल भी चल सकते हैं।

इस सेतु को श्रीकृष्ण के पसंदीदा मोरपंख की डिजाइन से सजाया गया है और इसपर गीता के श्लोक भी लिखे गये हैं। यह भारत का सबसे लंबा, लगभग 900 मीटर, केबल-स्टे ब्रिज है। ब्रिज पर 152 केबल लगाए गये हैं जिनका वजन लगभग 1500 टन है।

7. एडवेंचर एक्टिविटी

द्वारका में कई तरह की एडवेंचर एक्टिविटी भी की जाती है, जिसमें स्कूबा डाइविंग, स्नोर्केलिंग आदि कर सकते हैं। इसके साथ ही स्कूबा डाइवर्स के साथ पानी के अंदर जाकर आप समुद्र में जलसमाधी ले चुकी द्वारका नगरी के दर्शन भी कर सकते हैं, जैसा इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। कुछ ही महीनों में द्वारका में सबमरीन टूरिज्म भी शुरू होने वाला है, जिसमें सबमरीन में बैठाकर समुद्र में डूबी द्वारका नगरी के दर्शन करवाए जाएंगे।

8. क्या खाएं और शॉपिंग?

गुजरात आएं हैं, तो ऑथेंटिक गुजराती व्यंजनों को ट्राई करना बनता है। अपने शहर में आपने खम्मन ढोकला और फाफड़ा-जलेबी जरूर खाया होगा, लेकिन द्वारका में एक बार ढोकला, खांडवी, थेपला, खाखरा, हडवो, लस्सी, छाछ और छास जरूर ट्राई करें। यकीन मानिए इनका स्वाद आप कभी नहीं भूल पाएंगे और वापस लौटकर भी गुजरात के ऑथेंटिक व्यंजन ही अपने शहर में भी ढूंढेंगे।

द्वारका में खरीदारी करते समय बकेट लिस्ट में पटोला साड़ियां जरूर रखें। इसके साथ ही पटोला सिल्क की कुर्तियां, सलवार कमीज, पारंपरिक घाघरा चोली, गुजराती कढ़ाई वाली साड़ियां, घाघरा और जूते जरूर खरीदें। और हां, इन सबकी खरीदारी द्वारका के स्थानीय बाजारों से ही करें।

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