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साउथ इंडिया के एजुकेशन हब गुंटूर में क्या है एजुकेशन के अलावा

By Syedbelal

वर्तमान आंध्र प्रदेश में आंध्र प्रदेश के पूर्व के दो क्षेत्रों रायलसीमा और तटीय आंध्र को शामिल किया गया है। ज्ञात हो कि जून 2014 में भारतीय संसद में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम बिल के तहत राज्य से तेलंगाना को निकाल के एक प्रथक राज्य घोषित कर दिया गया है। बात अगर पर्यटन की हो तो इस राज्य में ऐसा बहुत कुछ है जो किसी भी पर्यटक का मन मोह सकता है। आज आंध्र प्रदेशपर्यटन का हब बन गया है, जहां ज्यादातर पर्यटक तिरुपति की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

ज्ञात हो कि आज तिरुपति का शुमार आंध्र प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थल के तौर पर होता है। आज अपने इस आर्टिकल में हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं आंध्र प्रदेश के एक ऐसे डेस्टिनेशन से जिसे एजुकेशन यानी शिक्षा का शहर कहा जाता है। जी हां हम बात कर रहे हैं गुंटूर की।

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गुंटूर, दक्षिण भारतीय राज्‍य, आंध्र प्रदेश में स्थित एक शहर है जो बंगाल की खाड़ी से लगभग 60 किमी. दूरी पर स्थित है। यह शहर आंध्र प्रदेश की राजधानी, हैदराबाद के दक्षिण पूर्वी हिस्‍से में स्थित है। टूर, आंध्र प्रदेश राज्‍य का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है जिसे यहां का सीखने और प्रशासन का उद्गम स्‍थल माना जाता है। इसे राज्‍य के सबसे विकसित शहरों में से एक माना जाता है क्‍योंकि यहां कई शिक्षण और प्रशासनिक संगठन है। तो आइये आज आपको बताते हैं कि अपनी गुंटूर यात्रा पर आपको क्या क्या अवश्य देखना चाहिए।

कोन्‍दाविदु किला

कोन्‍दाविदु किला, गुंटूर शहर की समृद्ध ऐतिहासिक अतीत का हिस्‍सा है। यह किला, गुंटूर के बाहरी इलाके में 17 मील की दूरी पर स्थित है और यहां तक सड़क मार्ग के द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस किले का निर्माण 14 वीं सदी की शुरूआत में रेड्डी राजा के द्वारा शुरू करवाया गया था। इस किले में 21 संरचनाएं शामिल है। इस किले का अधिकांश: भाग वर्तमान में खंडहर में बदल चुका है लेकिन आज भी यहां समृद्ध इतिहास की झलक देखने को मिलती है। कई पर्यटक, इस किले के अलावा यहां के प्राकृतिक दृश्‍यों की सुंदरता भी निहारने आते है, जो किले के आसपास मौजूद है।

कोटाप्‍पाकोंदा

कोटाप्‍पाकोंदा एक छोटा सा गांव है जो गुंटूर शहर के दक्षिण - पश्चिम किनारे पर स्थित है और यह मुख्‍य शहर से 40 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह गांव, नारसाराओपेट के बेहद समीप स्थित है और यहां तक सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस गांव को पहले कोंदाकावुरू के नाम से जाना जाता था लेकिन बाद में इसे कोटाप्‍पाकोंदा कहकर पुकारा जाने लगा। कोटाप्‍पाकोंदा को त्रिकुटापारवतम के नाम से भी जाना जाता है क्‍योंकि यहां तीन नुकीली पहाडियां स्थित है। इस गांव के आसपास कई पहाडि़यां स्थित है लेकिन यहां की सबसे प्रसिद्ध पहाडी़ त्रिकुचाचलम है।

सीतानागरम

सीतानागरम, गुंटूर जिले का छोटा सा शहर है जो भारत के पूर्वी तट पर स्थित है। गुंटूर से सीतानागरम की दूरी 18 मील की है। यह नगर, कृष्‍णा नदी के किनारे पर स्थित है। माना जाता है कि यह शहर 16 लाख साल पहले समाप्‍त हो गया था, जब त्रेतायुग चल रहा था। इस शहर का उल्‍ल्‍ेख, हिंदू धर्म के पुराणों में देखने को मिलता है। सीतानागरम शहर, यहां स्थित सोमेश्‍वरा स्‍वामी मंदिर के कारण जाना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार, यही वही स्‍थान है जहां भगवान रोए थे, जब उन्‍हे पता चला था कि लंका नरेश ने उनकी पत्‍नी का अपहरण कर लिया था। इस शहर का नाम सीता माता के नाम पर रखा गया था।

मंगलगिरी

मंगलगिरि, आंध्र प्रदेश राज्‍य के गुंटूर जिले का एक छोटा सा शहर है जो गुंटूर शहर से 21 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह एक प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल है जो गुंटूर और विजयवाड़ा से बराबर दूरी पर स्थित है। मंगलगिरि का शाब्दिक अर्थ होता है - पवित्र पहाड़ी। मंगलगिरि, यहां स्थित मंदिरों और पहाडियों के कारण जाना जाता है। यहां के सूती वस्‍त्र, उच्‍च गुणवत्‍ता के कारण काफी प्रसिद्ध है। इस शहर में विख्‍यात लक्ष्‍मी नारायण मंदिर स्थित है और हर साल भारी संख्‍या में पर्यटक यहां दर्शन करने आते है।

उप्‍पलापादू प्रकृति संरक्षण

गुंटूर में क्या ख़ास है आपके लिए

उप्‍पलापादू प्रकृति संरक्षण, गुंटूर शहर के बाहर के दक्षिणी इलाके से 4 मील की दूरी पर स्थित है। इस स्‍थान पर प्रवासी पक्षियों की भारी संख्‍या रहती है जिनका संरक्षण किया जाता है। यहां एक प्रसिद्ध पानी का टैंक है जिसे देखने दूर - दूर से लोग आते है। यहां दूसरे देशों से प्रवासी पक्षी आते है और सर्दियों के महीनों में कुछ हफ्तों तक ठहरते है। यहां कई प्रकार के लुप्‍त पक्षी जैसे - स्‍पॉट - बिल्‍ड पेलीकॉन्‍स और एक्‍जियोटिक पेंटेड स्‍टॉर्क आदि पाएं जाते है।

कैसे जाएं गुंटूर

फ्लाइट द्वारा

गुंटूर में कोई एयरपोर्ट नहीं है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट, हैदराबाद का राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट, देश के कई हिस्‍सों से नियमित उड़ानों के द्वारा जुड़ा रहता है। बाहरी देशों से भी यह एयरपोर्ट अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है। पर्यटक, यहां से गुंटूर तक आने के लिए टैक्‍सी ले सकते है। ज्ञात हो कि हैदराबाद से गुंटूर तक आने में साढ़े चार घंटे का समय लग जाता है।

ट्रेन द्वारा

गुंटूर में रेलवे स्‍टेशन है जो देश के कई शहरों और राज्‍य के कई नगरों से अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है। यह दक्षिण रेलवे का ठोस नेटवर्क है। यहां से नई दिल्‍ली, बंगलौर, मुंबई, चेन्‍नई, कोलकाता, हैदराबाद, विजयवाड़ा और अन्‍य शहरों के लिए नियमित ट्रेन चलती है। इस रेलवे स्‍टेशन से गुंटूर शहर की यात्रा के लिए, टैक्‍सी, बस या रिक्‍शा भी किराए पर किया जा सकता है।

सड़क मार्ग द्वारा

गुंटूर राज्य सड़क परिवहन प्रणाली के लिए क्षेत्रीय मुख्यालय है। इसलिए, शहर के लिए कई बस सेवाएं है। यह शहर, चेन्‍नई, कोलकाता और हैदराबाद से आने वाले लोगों के मार्ग में पड़ता है क्‍योंकि यह राष्‍ट्रीय राजमार्ग के मार्ग में निहित है। इस राजमार्ग के रास्‍ते से दिल्‍ली और मुंबई तक भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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