Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »इन रहस्यमय जगहों पर पर्यटक कर चुके हैं, आत्माओं का सामना

इन रहस्यमय जगहों पर पर्यटक कर चुके हैं, आत्माओं का सामना

भारत में कई ऐसे स्थल आज भी मौजूद हैं, जो खूबसूरती के साथ-साथ अपने रहस्यमयी इतिहास के लिए भी जाने जाते हैं। आधे-अधूरे पन्नों पर लिखी गई इनकी कहानी, एक पल के लिए किसी को भी हैरान कर सकती है। राजा-महाराजाओं के दौर से अबतक के सफर के बीच, भारत कई रहस्यमय घटनाओं का अकेला साक्षी रहा है। 

आज हम आपको भारत की कुछ चुनिंदा जगहों से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिनका डरावना मंजर, विज्ञान को भी चुनौती दे चुका है। पैरानॉर्मल गतिविधियों से भरे यह प्लेस दुनिया के लिए बने हुए हैं 'सबसे बड़ा रहस्य'। 

राजस्थान का भानगढ़

राजस्थान का भानगढ़

PC-Parth.rkt

भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्य, राजस्थान में ढेरों ऐतिहासिक भवन व किले मौजूद हैं, जिनमें से कुछ अच्छी अवस्था में हैं, जबकि बहुत से भवन व किले खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। उन्हीं में एक खंडहरनुमा किला है 'भानगढ़', जो यहां रात के वक्त होने वाली 'पैरानॉर्मल गतिविधियों' के लिए कुख्यात है। जब भी भारत में डरावनी जगहों की बात आती है, भानगढ़ का नाम शीर्ष पर होता है। यहा किला अब भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। यहां होने वाली अजीबो-गरीब हरकतों के चलते यहां शाम के 6 बजे के बाद प्रवेश प्रतिबंधित है। स्थानीय निवासी व जानकारों की मानें तो इस किले में अब भूतों का बसेरा है, जिसका संबंध इतिहास में घटित एक घटना से बताया जाता है। कहा जाता है, यहां कभी एक तांत्रिक को राज्य की राजकुमारी रत्नावती से प्रेम हो गया था।

तांत्रिक का श्राप

तांत्रिक का श्राप

PC-C980040

राजकुमारी के यौवन के रस में डूबा तांत्रिक, किसी भी हालत में उसे पाना चाहता था। एक बार राजकुमारी रत्नावती इत्र की दुकान पर इत्र खरीदने गई, जिसके बाद उस जादूगर तांत्रिक ने राजकुमारी को वश में करने के लिए उस इत्र की बोतल पर जादू कर दिया। पर वो इत्र की बोतल रत्नावती के हाथ से गिर गई, और उसका इत्र तांत्रिक की ओर बढने लगा , जिसके नीचे आकर उस जादूगर तांत्रिक की मौत हो गई, लेकिन उसने मरते-मरते यह श्राप दिया, कि यहां सब तहस-नहस हो जाएगा, कोई नहीं बचेगा। तब से आज तक यह जगह वीरान पड़ी हुई है, जहां अब शैतानी शक्तियों का गढ़ बताया जाता है।

राजस्थान का कुलधारा

राजस्थान का कुलधारा

PC- Suryansh Singh (DarkUnix)

जैसलमेर से लगभग 18 किमी की दूरी पर स्थित कुलधारा, बुरी शक्तियों का गढ़ माना जाता है। जानकारों की मानें तो यहां कभी हंसता-खेलता गांव हुआ करता था, पर आज यह जगह रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं। हालांकि यहां पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है, पर कई बार उन्हें भी अजीबो-गरीब आवाजों का आभास हुआ है। जैसे, किसी के चलने की आहट, चूड़ियों व पायलों की आवाज। इस जगह के कई ऐसे कोने हैं, जो दिन में भी काफी ज्यादा भयावह लगते हैं। यहां शाम के वक्त, फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता ।

 रातों रात वीरान

रातों रात वीरान

PC- Archan dave

कहा जाता है यह गांव रातों रात विरान हो गया। जिसकी वजह यहां का लंपट दीवान सालम सिंह था। जिसकी गंदी नजर यहां गांव के किसी पंडित की बेटी पर पड़ गई। काम उत्तेजना में पागल उस दीवान ने पंडित की बेटी को उठा ले जाने का संदेश तक भिजवा दिया। बेटी की इज्जत बचाने के चलते सभी गांव वाले एक मंदिर में इकट्ठा हुए, और गांव छोड़ने का फैसला कर दिया। जिसके बाद उन सभी ने गांव रातों-रात खाली कर दिया। और जाते-जाते यह श्राप भी दिया की यह गांव कभी बस नहीं पाएगा। जिसके बाद ये गांव एक खंडहर में बदल गया, जहां अब शैतानी हुकूमत है।

मेरठ का जीपी ब्लॉक

मेरठ का जीपी ब्लॉक

PC- RIMIM

उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित 'जीपी ब्लॉक', दुनिया के सबसे भूतिया बंगलों में से एक है। इस खंडहरनुमा बंगले को भारत के 10 टॉप हॉन्टेड प्लेस में शामिल किया गया है। यह बंगला किसका है, कौन यहां रहता था, इस विषय में किसी को कोई जानकारी नहीं। जानकारों का कहना है कि इस बंगले को इसके मालिक ने कभी ब्रिटिश अफसरों को किराए पर दे दिया था। जिसे 1930 के बाद हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।

अजीबो-गरीब आवाजें

अजीबो-गरीब आवाजें

PC-James Ryen

अब इस बंगले के आसपास कोई नहीं भटकता, जिसका कारण नेगेटिव एनर्जी का यहां होना । स्थानीय निवासियों का मानना है कि यहां रात के वक्त लाल रंगे के लिबास में कोई महिला टहलते हुए दिखाई देती है। कई बार यहांअजीबो-गरीब आवाजें भी सुनी गई हैं। जिस वजह से यहां कोई गलती से भी नहीं भटकता । रात के समय यह बंगला बहुत ही डरावना लगता है।

शनिवार वाडा किला

शनिवार वाडा किला

PC- Rahul Soni 23

महाराष्ट्र के पुणे स्थित 'शनिवार वाडा किला' भले ही अपनी भव्यता व ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता हो, पर इसके काले इतिहास से मुंह नहीं फेरा जा सकता है। इस किले का निर्माण कभी पेशवा शासकों ने करवाया था। जिनसे इस किले की सबसे अहम कड़ी जुड़ी हुई है। कहते हैं, मराठा साम्राज्य के पांचवे शासक 18 वर्षीय 'नारायण राव ' को एक षड्यंत्र के तहत उन्हीं से रिश्तेदारों ने मौत के घाट उतार दिया था। जिसके बाद से उनकी आत्मा इस किले में आज तक भटक रही है।

 'चाचा मुझे बचा लो'

'चाचा मुझे बचा लो'

PC- Harshdw

यहां के लोगों को कई बार रोने-चीखने 'चाचा मुझे बचा लो' जैसे शब्द भी सुनाई दिए हैं। शाम होते ही किले के मुख्य दरवाजे को सुबह तक के लिए बंद कर दिया जाता है। रात होते ही यहां अजब सा सन्नाटा पसर जाता है। यहां रात के समय कोई जल्दी आने की हिम्मत नहीं करता। इसलिए इसे देश के सबसे डरावनी जगहों में गिना जाता है। अगर आप यहां आना चाहते हैं, तो सुबह या दोपहर के समय का प्लान बनाएं, इस दौरान आप पूरे किले की सैर आराम से कर सकते हैं।

रहस्यमयी जट‌िंगा वैली

रहस्यमयी जट‌िंगा वैली

PC- U.S. Fish and Wildlife Service Headquarters

असम के गुवाहटी से तकरीबन 330 किमी की दूरी पर स्थित 'जंटिगा वैली' अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। यह वैली बर्ड सेंचुरी के लिए भी जानी जाती है। जहां ढेरों प्रजाति के पक्षियों को देखा जा सकता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह खूबसूरत वैली किसी और एक चीज के लिए भी जानी जाती है, वो है 'पक्षियों की आत्महत्याएं'। जी हां यह सोचना जरा सोच से परे होगा कि भला पक्षी कैसे आत्महत्या कर सकते हैं। पर यह सच्चाई है कि यहां शाम से देर रात के बीच आत्महत्या का दौर शुरू हो जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां पक्षी समुह में अपनी जान देते हैं।

आत्महत्या बनी रहस्य

आत्महत्या बनी रहस्य

PC- U.S. Fish and Wildlife Service Headquarters

इस वैली में पक्षियों की आत्महत्या एक रहस्य बनी हुई है। जिसके बारे में आज तक किसी को कुछ नहीं पता चल सका। इन आत्महत्याओं के पीछे कई शोध भी हो चुके हैं, जिसमें यह तर्क रखा गया है, कि यह घाटी चुंबकीय शक्तियों से भरी हुई है, जिस कारण पक्षी थोड़ा अलग बर्ताव करने लगते हैं, जो उनकी मौत का कारण बन जाता है। इस बात में कितनी सच्चाई है, इस बात का और कोई तर्क मौजूद नहीं। पर पक्षियों का इस तरह मर जाना दुनिया के लिए रहस्य बना हुआ है।

यात्रा पर पाएं भारी छूट, ट्रैवल स्टोरी के साथ तुरंत पाएं जरूरी टिप्स

We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Nativeplanet sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Nativeplanet website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more