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आखिर क्यों जीवन में एकबार मथुरा-वृन्दावन की होली का हिस्सा बनना चाहिए?

साल 2018 में होली का पर्व पूरे भारत में 1 और 2 मार्च को बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जायेगा, बात होली की हो और मथुरा वृन्दावन की होली की बात ना की जाये, ये तो मुमकिन ही नहीं है बॉस।

मथुरा-वृन्दावन की होली सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी लोकप्रिय है, विदेशी यात्री होली के दौरान भरी तादाद में वहां की होली को देखने पहुंचते हैं।

सिर्फ मथुरा वृन्दावन ही क्यों, मथुरा जिले में स्थित बरसाने की लट्ठमार होली भी पर्यटकों को खूब अपनी ओर आकर्षित करती है। पर्यटकों के अलावा मथुरा और वृन्द्वान के होली रंग फोटोग्राफर को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जिन्हें वह अपने कैमरे में कैद करने का कोई मौका नहीं गंवाते हैं।

भगवान कृष्ण की है जन्मभूमि

भगवान कृष्ण की है जन्मभूमि

पौराणिक कथा के मुताबिक, मथुरा भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है और इस प्रकार, इस जगह में होली के उत्सव लोगों के दिलों और दिमागों में एक विशेष स्थान हैं। हजारों साल के इतिहास और पौराणिक कथाएं प्रमुख कारक हैं जो मथुरा में होली को बहुत खास बनाती हैं।

Pc:Shahnoor Habib Munmun

मथुरा के घाटों पर ले होली का असली मजा

मथुरा के घाटों पर ले होली का असली मजा

मथुरा की होली

लट्ठमार होली

लट्ठमार होली

सामान्य रंगों के अलावा आप मथुरा के कस्बे बरसाने में लट्ठमार होली को भी देख सकते हैं। लट्ठमार होली डंडो और ढाल से खेली जाती है, जिसमे महिलाएं पुरुषों को डंडे से मारती हैं और पुरुष खुद को ढाल से बचाने का प्रयास करते हैं। Pc:Narender9

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क्यों मनाते हैं लट्ठमार होली?

क्यों मनाते हैं लट्ठमार होली?

लट्ठमार होली पौराणिक काल से जुड़ी हुई है, कहा जाता है कि, कृष्ण अपने काले रंग से परेशान थे,वह अक्सर अपनी मां यशोदा से कहते थे , मां राधा क्यों गोरी और मै क्यों काला इस पर मां यशोदा ने कहा तुम रंग ले जाओ और राधा को रंग दो फिर वह भी तुम्हारी जैसी हो जाएगी। मां की बात मानकर कृष्ण रंग लेकर राधा को रंगने बरसाने पहुंच गये, जैसे ही कृष्ण ने राधा को रंगने का प्रयास किया तो सभी सखी सहेली कृष्ण को डंडा लेकर मारने के लिए दौड़ पड़ी। जिसके बाद सदियों से लट्ठमार होली का आयोजन बरसाने में किया जाता है। Pc:Narender9

वृन्दावन की होली

वृन्दावन की होली

वृंदावन में होली का उत्सव महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह ऐसा स्थान है जहां भगवान कृष्ण ने अपने जीवन के कई वर्ष बिताये। अगर आप वृन्दावन की होली में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो यहां स्थित बांके बिहारी मंदिर जरुर जाएँ। यहां पानी और गुलाल के रंगों से होली खेली जाती है। मंदिर के पुजारी रंग से भरी बाल्टी और रंगो को भक्तों के उपर रंग छिडकते हैं। मंदिर में भक्त भगवान के भजनों पर नृत्य कर होली का आनन्द उठाते हैं। इस साल, बांके -बिहारी मंदिर में होली का आयोजन 25 फरवरी से शुरू होगा। Pc:J.S. Jaimohan

लट्ठमार होली

लट्ठमार होली

बरसाने और नंदगांव में लट्ठमार होली का आयोजन 24 और 25 फरवरी को किया जायेगा। Pc:Narender9

फूलों वाली होली

फूलों वाली होली

वृन्दावन में आयोजित होने वाली फूलों वाली होली 26 फरवरी को बांके बिहारी मंदिर में होगी।

वृन्दावन में विधवायों की होली

वृन्दावन में विधवायों की होली

27 फरवरी को वृन्दावन में विधवा महिलाएं होली के रंग में सराबोर होकर नाचेंगी। वृन्दावन में इस होली को मानने के पीछे उद्देश्य है कि, विधवाओं को भी जीने का अधिकार है साथ ही इन महिलाओं ने समाज को ये भी सन्देश दिया कि जीवन रुकने का नहीं बल्कि चलते रहने का नाम है।

बांके बिहारी मंदिर

बांके बिहारी मंदिर

1 मार्च को वृन्दावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में होली खेली जाएगी।

होली का पर्व

होली का पर्व

2 मार्च को पूरे मथुरा में होली गुलाल सहित पानी आदि से खेली जाएगी। Pc:Narender9

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