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स्वतंत्रता संग्राम का ऐतिहासिक नगर, जहां रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजों को चटाई थी धूल

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बात जब स्वतंत्रता संग्राम की हो, और झाँसी की रानी के नाम का जिक्र ना हो ये तो मुमकिन ही नहीं है। जब जब बात 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई की बात होती है तो गर्व से महारानी लक्ष्मी बाई का नाम लिया जाता है। लेकिन एक मिनट, क्या आपने आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाली लक्ष्मी बाई के शहर यानी झांसी की सैर की है।अगर नहीं की है, तो यह जगह आपकी अगली हॉलिडे डेस्टिनेशन अवश्य होनी चाहिए, इस जगह को घूमने का मजा तब और दुगना हो जाता है, जब आपको इतिहास के बारे में जानने में दिलचस्पी हो।

1857 के दौरान स्वतंत्रता संग्राम के दौरान झाँसी ने एक अहम भूमिका निभाई थी, पहले झाँसी चन्देल वंश की सत्तारूढ़ सीट थी, लेकिन बाद में राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद लक्ष्मी बाई ने इस पर शासन किया।

झाँसी, उत्तर प्रदेश के औधोगिक नगरी कानपुर के पास स्थित है , और यह शहर बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रमुख शहरों में से एक है। आज भी झाँसी की वीर गाथाएं पर्यटकों को इस जगह को देखने और जानने पर मजबूर करती है, तो अगर अप भी झांसी के गौरव पूर्ण इतिहास को जानना और समझना चाहते हैं, तो इसकी सैर अवश्य करें

कब जाएँ झाँसी

कब जाएँ झाँसी

गर्मियों के मौसम में झांसी बेहद गर्म रहता है, झांसी की यात्रा करने का बेस्ट सीजन सर्दी है, आप यहां की यात्रा अक्टूबर से लेकर मार्च तक कर सकते हैं, इस दौरान यहां का मौसम बेहद सुखद रहता है।

झांसी में घूमने की जगह

झांसी में घूमने की जगह

झांसी में घूमने की कई जगहें हैं, अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी है, तो आपको यहां की खास जगहों को जरुर देखना चाहिए।Pc:Wikijib

झांसी किला

झांसी किला

अगर आप झाँसी के शौर्य को समझना चाहते हैं, तो आपको झाँसी किला अवश्य घूमना चाहिए, एक पहाड़ी के उपर स्थित, झांसी किला शहर के गौरवशाली अतीत को दर्शाता है, उस दौरान यह किला लक्ष्मीबाई और चंदेल वंश का निवास-स्थान था।

झाँसी के किले ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई क्योंकि यह 1857 के भारत के स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र था। किले की दीवारों पर बने हुए चित्र झाँसी की रानी द्वारा अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़ी गई लड़ाई का चित्रण करते हैं।Pc:Rahul Khare

सरकारी संग्रहालय

सरकारी संग्रहालय

सरकारी संग्रहालय झांसी में एक बहुत ही लोकप्रिय स्थान है जहां कई हथियार, कपड़े, मूर्तियों, पेंटिंग और सिक्कों का संग्रह है। संग्रहालय में प्रदर्शित सामग्री चंदेल वंश के राजाओं के जीवन और समय को सजीवता से दर्शाते हैं तथा साथ ही साथ बुंदेलखंड शहर और क्षेत्र के इतिहास और विरासत को भी प्रस्तुत करते हैं। इस म्यूजियम में हथियारों, शस्त्रों और गोला बारूद का प्रदर्शन भी किया गया है, जिसका उपयोग ब्रिटिश सेना ने 1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम को दबाने के लिए किया था।

 गंगाधर राव का मकबरा

गंगाधर राव का मकबरा

इसका निर्माण रानी लक्ष्मीबाई द्वारा 21 नवंबर 1853 को रानी लक्ष्मीबाई द्वारा उनके पति महाराजा गंगाधर राव के निधन के पश्चात करवाया गया था। लक्ष्मी ताल या तालाब के बाजू में स्थित यह छतरी झाँसी शहर का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्मारक है। गंगाधर राव महरानी लक्ष्मी बाई के पति और झांसी के राजा थे।Pc:Ravi94555

कैसे पहुंचे झाँसी

कैसे पहुंचे झाँसी

हवाई जहाज द्वारा- झांसी का नजदीकी हवाई अड्डा ग्वालियर है, ग्वालियर हवाई अड्डे से पर्यटक बस या कैब के जरिये झाँसी आसानी से पहुंच सकते हैं। ग्वालियर से झांसी की दूरी करीबन 97 किमी है।

ट्रेन द्वारा-झांसी का अपना स्टेशन है, जो देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। पर्यटक झांसी के लिए किसी भी शहर से सीधी ट्रेन ले सकते हैं।

सड़क द्वारा - झांसी राज्य के सभी मुख्य मार्गों से जुड़ा हुआ है, यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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