ISRO का मिशन चंद्रयान-3 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आज दोपहर 2:35:17 पर इसरो के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे लॉन्च किया जाएगा। ISRO इसके बारे में हर पल की जानकारी ट्वीटर पर साझा कर रहा है। इसका काउंटडाउन भी शुरू हो चुका है।

अगर चंद्रयान -3 चांद पर सॉफ्ट लैंड करने में कामयाब हो जाता है तो ऐसा करने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव पर अपने चंद्रयान उतारने में सफल हो चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग कैसे होगी? किसके कंधे पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवाने की जिम्मेदारी है? और चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन क्या है?
आइए आपको चंद्रयान से जुड़ी ये खास बातें बताते हैं :
कैसे होगी सॉफ्ट लैंडिंग?
अब तक तो आपको पता चल ही चुका होगा कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग हुई थी, जिस वजह से उसका संपर्क ISRO से टूट चुका था। इस कारण चंद्रयान -2 को विफल करार दिया गया था। चंद्रयान-2 की गलतियों से सबक लेते हुए ISRO ने चंद्रयान-3 की तैयारियां की हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग आखिर होगी कैसे? दरअसल, चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग किसी इंसान के हाथों में नहीं है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की सतह अभी तक पूरी तरह से हमारे लिए अनजान है।

इसलिए यहां चंद्रयान-3 को लैंड करवाना भी एक बड़ी चुनौती ही है। यह एक ऑटोनॉमस या यूं कहे ऑटोमेटिक प्रक्रिया है। इसके लिए कोई व्यक्ति कमांड नहीं देता है। चंद्रमा की सतह पर लैंड कहां करना है, इसे ऑन-बोर्ड कम्प्यूटर ही तय करता है। ऑन-बोर्ड कम्प्यूटर में लगे सेंसर्स ही लोकेशन, हाइट और वेलोसिटी का अंदाजा लगाकर सभी फैसले लेता है। इसीलिए कहा जा रहा है कि चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग तभी संभव होगी, जब ऑन-बोर्ड कम्प्यूटर के सभी सेंसर्स एक साथ सही काम करते हुए बिल्कुल सटिक अंदाजा लगाकर सही फैसले ले सकेंगे।
चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन
अब आपको बताते हैं चंद्रयान-3 का लखनऊ कनेक्शन क्या है। चंद्रयान-3 की जिम्मेदारी जिन वैज्ञानिकों ने अपने कंधों पर उठा रखी है, उनमें शामिल है ऋतु करिधाल। जानकारी के मुताबिक ऋतु करिधाल चंद्रयान-3 की मिशन डाईरेक्टर हैं। चंद्रयान-3 के प्रोजेक्ट डाइरेक्टर पी. वीरा मुथुवेल हैं। ऋतु करिधाल को देश की 'रॉकेट वुमन' के नाम से भी जाना जाता है। वह इससे पहले मंगलयान और चंद्रयान-2 के वैज्ञानिकों की टीम में भी शामिल रह चुकी हैं।

अब ऋतु करिधाल के कंधों पर ही चंद्रयान-3 की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है। ऋतु करिधाल मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ के सेंट एग्नीस स्कूल और लखनऊ यूनिवर्सिटी से Physics से MSc. किया। इसके बाद ऋतु करिधाल एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक करने के लिए बैंगलोर के भारतीय विज्ञान संस्थान में चली गयी। M. Tech के बाद ऋतु ने PHD करना शुरू ही किया था, लेकिन इस बीच उन्हें ISRO में नौकरी मिल गयी और उन्होंने वहां बतौर साइंटिस्ट ज्वाइन कर लिया।
क्यों चंद्रयान -3 को दक्षिण ध्रुव पर ही उतारा जाएगा?
इससे पहले चंद्रयान-2 को भी चांद की दक्षिण ध्रुव पर ही उतारने की कोशिश की गयी थी। अब ISRO एक बार फिर से चंद्रयान-3 को दक्षिण ध्रुव पर ही उतारने की कोशिशें करने वाला है। ऐसे में यह सवाल जरूर मन में आता होगा कि आखिर क्यों भारत दक्षिण ध्रुव पर ही चंद्रयान को उतारने की बार-बार कोशिशें कर रहा है। इसका जवाब भारत के चंद्रयान 1 से जुड़ा हुआ है।
मिशन चंद्रयान के दौरान साल 2008 में पहली बार भारत ने ही यह ढूंढ निकाला था कि चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर पानी के अंश मौजूद है। उस समय भारत की इस खोज ने दुनिया भर में हलचल मचा दी थी। इसी वजह से भारत हर बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ही अपना चंद्रयान लैंड करवाने की कोशिश करता है ताकि इस बारे में भी ज्यादा से ज्यादा जानकारियां हाथ लग सकें।



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