यह मालवा और बुंदेलखंड की सीमाओं से लगा हुआ है। यहाँ कई ऐतिहासिक स्मारक और प्राकृतिक चमत्कार हैं। यह हरे भरे जंगलों और सुन्दर झीलों से घिरा हुआ है तथा विंध्य की पहाड़ियों पर स्थित है।
चंदेरी का प्राचीन नाम 'चंद्रगिरि' था। चंदेरी में बुंदेल राजपूतों और मालवा के सुल्तानों द्वारा बनवाई गई अनेक इमारतें यहाँ देखी जा सकती है। इस ऐतिहासिक नगर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। 11वीं शताब्दी में यह नगर एक महत्त्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी यहीं से होकर गुजरते थे। वर्तमान में बुन्देलखण्डी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिये चंदेरी काफी मशहूर है।
आइये स्लाइड्स में जानते हैं चंदेरी के मशहूर दर्शनीय स्थल

चंदेरी किला
चंदेरी किला चंदेरी का सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। यह किला शहर से 71 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाडी पर स्थित है। यह किला 5 किमी. लंबी दीवार से घिरा हुआ है। चंदेरी के इस महत्वपूर्ण स्मारक का निर्माण राजा कीर्ति पाल ने 11 वीं शताब्दी में करवाया था। इस किले पर कई बार आक्रमण किये गए और अनेक बार इसका पुन: निर्माण किया गया।इस किले में तीन प्रवेश द्वार हैं। सबसे ऊपर के द्वार को हवापुर दरवाज़ा कहा जाता है और सबसे नीचे के द्वार को खूनी दरवाज़ा कहा जाता है। किले के दक्षिण पश्चिम में एक रोचक दरवाज़ा है जिसे कट्टी-घट्टी कहा जाता है।
PC:LRBurdak

कोशक महल
इस महल को 1445 ई. में मालवा के महमूद खिलजी ने बनवाया था। यह महल चार बराबर हिस्सों में बंटा हुआ है। कहा जाता है कि सुल्तान इस महल को सात खंडों में बनवाना चाहते थे, लेकिन मात्र तीन खंड ही बनवा सके। महल के हर खंड में बालकनी, खिड़कियाँ और छत पर की गई शानदार नक्काशियाँ हैं।PC:Prasoon Kaushik

चंदेरी पुरातात्विक संग्रहालय
चंदेरी पुरातात्विक संग्रहालय का निर्माण चंदेरी के इतिहास और संस्कृति को जीवित रखने के लिए किया गया है। इस संग्रहालय के द्वार आम जनता के लिए 3 अप्रैल,1999 को खोले गए। इस संग्रहालय में पाए जाने वाले स्थापत्य स्मारक और मूर्तियाँ चंदेरी और इसके आसपास के स्थानों से लाए गए हैं तथा स्थानीय लोगों द्वारा किये गए संग्रह से एकत्रित किये गए हैं। चंदेरी और बुड्ढी चंदेरी में तथा इसके आसपास स्थित किलों, महलों और मंदिरों के अवशेष प्राचीन काल का समृद्ध इतिहास प्रदर्शित करते हैं।

जामा मस्जिद
यह मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार है।

बूढ़ी चन्देरी
ओल्ड चन्देरी सिटी को बूढ़ी नाम से जाना जाता है। 9वीं और 10वीं शताब्दी में बने जैन मंदिर यहां के मुख्य आकर्षण हैं। जिन्हें देखने हेतु हर साल बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी आते हैं।

बत्तीसी बावड़ी
गोल, चौकोर और समकोण बावड़ियों से भरे इस नगर में अफगान वास्तुकला की दूसरी जगमगाती निशानी चार मंजिला घाटों से सजी यह बावड़ी है। इसकी सुंदर सीढ़ियों के ऊपर, बीच में पटे हुए स्वागत द्वारों ने इसे भव्य बना दिया है। 60-60 फीट लंबी-चौड़ी यह बावड़ी आज भी नयनाभिराम है। यहाँ पर फारसी में लिखा है, जिसका अर्थ है- ‘जो स्वर्ग की एक झलक देखना चाहता है, वह यहाँ आकर थोड़ा विश्राम करे, क्योंकि स्वर्ग इसी के समान हैं'।

कब जाएं
कभी-भी जा सकते हैं। मौसम सुहावना रहता है। गर्मी, जाड़ा और अपने समय के अनुसार होती है।

कैसे जाएं
वायुमार्ग- ग्वालियर चंदेरी का निकटतम एयरपोर्ट है। जो लगभग 227 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।
रेलमार्ग- अशोक नगर, ललितपुर चंदेरी का निकटतम रेलवे स्टेशन है। यहाँ से बसों और टैक्सियों की सुविधा है।
सड़क मार्ग- राज्य के अधिकांश हिस्सों से सड़क मार्ग द्वारा चंदेरी पहुँच सकते हैं। झाँसी, ग्वालियर, टीकमगढ़ आदि शहरों से नियमित बस एवं टैक्सी की सुविधा रहती है।
- ये हैं मुगलों का आखिरी मकबरा
- छत्तीसगढ़- जहां गिरते झरने में उबल जाते हैं अंडे..वहीं पत्थर से निकलती धुनें
- गुलाबी नगरी छोड़िये..और घूमिये राजस्थान की ब्लू सिटी को..
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