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लद्दाख के Snow Leopards भी निभाते हैं सरहद पर देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका, जानिए कैसे?

लद्दाख में शानदार पर्वतीय नजारे दिखते हैं, दुर्गम चढ़ाई है और बेहद सुन्दर व शांत झीले हैं। लेकिन इसके साथ एक और चीज है जिसे हम अक्सर नजरंदाज कर जाते हैं। जी हां, वह है दुर्गम परिस्थितियों में सरहद पर देश की रखवाली करते भारतीय सेना के जवान। सीमा पर परिस्थितियां इतनी ज्यादा दुर्गम होती हैं कि कोई भी आम व्यक्ति 5 मिनट से ज्यादा वहां रुक ही नहीं सकता है। लेकिन...

ladakh scouts

Snow Leopards बर्फ से ढंके पहाड़ों पर सीमा की रखवाली करते हुए डटे रहते हैं। चौंक गये ना...हम यहां हिम तेंदुआ या स्नो बाघ की नहीं बल्कि भारतीय सेना के रेजिमेंट Snow Leopards की बात कर रहे हैं, जिन्हें भारत का गार्जियन भी कहा जाता है।

सेना के बहादुर जवान Snow Leopards

लद्दाख स्काउट्स, जिन्हें अक्सर Snow Leopards भी कहा जाता है, भारतीय सेना का वह रेजिमेंट है जो मुख्य तौर पर पैदल ही चलता है। लद्दाख की ऊंची चोटियों पर जहां सांस लेना भी मुश्किल होता है, वैसी दुर्गम जगहों पर पहरा देने के लिए ही इस रेजिमेंट को खास तौर पर तैयार किया जाता है। पहाड़ों पर लड़ाई करने के विशेष प्रशिक्षण के साथ ही इन्हें विपरित मौसम में भी लड़ाई के गुर सिखाए जाते हैं। Snow Leopards या Snow Warriors के नाम से पहचाने जाने वाले भारतीय सेना का यह रेजिमेंट सिर्फ बॉर्डर की सुरक्षा में ही नहीं बल्कि कारगिल के युद्ध में भी इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

कब हुआ था इस रेजिमेंट का गठन

ladakh regiment

Snow Leopards रेजिमेंट या लद्दाख स्काउट्स का गठन वर्ष 1963 में, भारत-चीन युद्ध के बाद हुआ था। 1948 में जब लद्दाख के योद्धाओं को लेकर नुब्रा गार्ड्स बनाए गये थे, तब वे जम्मु और कश्मीर के पहाड़ों पर मौजूद भारत की सीमाओं की सुरक्षा करते थे। 1959 को इन्हें जम्मु और कश्मीर मिलिशिया से जोड़ दिया गया था लेकिन 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद उन्हें नुब्रा गार्ड्स से अलग कर दिया गया। इसके बाद ही 1963 में लद्दाख स्काउट्स का गठन किया गया। लद्दाख स्काउट्स में आमतौर पर लद्दाखी या फिर तिब्बती नागरिकों की भर्ती की जाती है जो वहां के वातावरण से अच्छी तरह से परिचित होते हैं। यह रेजिमेंट भारत के सबसे ज्यादा डेकोरेटिव रेजिमेंट्स में से एक है।

इस रेजिमेंट को अब तक जो पुरस्कार मिल चुके हैं, वो हैं :

  • 1 अशोक चक्र
  • 2 महावीर चक्र
  • 2 कीर्ति चक्र
  • 2 एवीएसएम
  • 26 वीर चक्र
  • 6 शौर्य चक्र
  • 3 वाईएमएम
  • 64 सेना मेडल
  • 13 विशिष्ट सेवा मेडल और
  • दर्जनों चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड

भारत-पाक युद्ध में शानदार प्रदर्शन

Snow Leopards या लद्दाख स्काउट्स के जवानों ने कई युद्धों में अपना लोहा मनवाया है। 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्धों के दौरान लद्दाख स्काउट्स को कॉम्बैट में नियुक्त किया गया, जिसके साथ उन्होंने युद्ध लड़ने की शुरुआत की थी। 1984 में ऑपरेशन मेघदूत में तीसरे कुमाऊं रेजिमेंट के साथ मिलकर लद्दाख स्काउट्स ने सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा किया था। दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर लड़े गए इस लड़ाई में दोनों रेजिमेंट ने ही कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

snow tiger

इसके बाद बारी आयी कारगिल युद्ध की। यहीं वह समय था जब लद्दाख के इन Snow Tigers की दहाड़ पड़ोसी मुल्क के साथ-साथ पुरी दुनिया ने सुनी। ऑपरेशन विजय में सबसे पहले जिन यूनिट्स को तैनात किया गया था, उनमें लद्दाख स्काउट्स भी शामिल था। इस रेजिमेंट की वीरता के बदौलत ही कारगिल की लड़ाई में भारत ने प्वाएंट 5000, डॉग हिल और पद्मा गो जैसे युद्ध जीते।

इन वीरों को श्रद्धांजलि देते हुए ही लद्दाख में The Ladakh Scouts War Memorial का निर्माण किया गया। भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने 21 अगस्त 2017 को इस मेमोरियल का उद्धाटन किया था। मेमोरियल में पत्थरों से बनी एक दीवार भी है, जहां युद्धों में शहीद जांबाजों के नाम लिखे हुए हैं। यहां लद्दाखी सैनिक का एक ब्रॉन्ज की मूर्ति भी स्थापित है जिसने अपने कंधे राइफल और दूसरे हाथ में तिरंगा थामा हुआ है। यह इनके कर्तव्यपरायनता का प्रतिक है।

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