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यात्री गण कृपया ध्‍यान दें, यात्रा के दौरान आपके फोन से जुड़ी जरूरी सूचना...

यात्री गण कृपया ध्‍यान दें, हम आपके मोबाइल फोन से जुड़ी एक जरूरी सूचना देने जा रहे हैं। अगर आज आप ट्रेन, बस या विमान से सफर कर रहे हैं, तो आपके पास सुनहरा मौका है अपनी स्‍क्रीन से दूर रहने का। जी हां जिस तरह के आंकड़े सामने आये हैं, उससे साफ है कि भारत के अधिकांश लोग अपनी ऑंखों, दिमाग और कानों को आराम नहीं दे रहे हैं।

हाल ही में एक रिपोर्ट जारी हुई है जिसके अनुसार भारत में रहने वाले लोग दिन के 24 घंटों में से करीब 7 घंटे केवल स्‍क्रीन पर बिताते हैं। अगर आप उनमें से एक हैं तो कम से कम सफर करते वक्त अपने फोन से दूर रहें। फोन से दूर रह कर आपको क्या करना है हम यह भी आपको बताएंगे।

using mobile while travelling

6 घंटे 49 मिनट स्क्रीन पर

डाटा आधारित रिसर्च प्रस्‍तुत करने वाली वेबसाइट कम्‍पेरिटेक द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लोग दिन भर में औसतन 6 घंटे 49 मिनट स्‍क्रीन के सामने बिताते हैं। यह स्‍क्रीन मोबाइल फोन, डेस्कटॉप, टीवी, टैब, आदि हैं। वेबसाइट में जो चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आये वह भी आपको जरूर जानना चाहिए-

  • भारत में लोग रोज़ाना औसतन 4 घंटे 4 मिनट केवल मोबाइल पर बिताते हैं। ये लोग अपना ज्‍यादातर समय मैसेजिंग में, रील-वीडियो आदि देखने में, बिताते हैं।
  • भारत में लोग औसतन 2 घंटे 52 मिनट लैपटॉप या डेस्कटॉप की स्‍क्रीन के सामने बिताते हैं। यह स्‍क्रीन टाइम ज्‍यादातर ऑफिस वर्क में जाता है।
  • देश में लोग अपने कीमती समय के औसतन 2 घंटे 28 मिनट सोशल मीडिया पर बिताते हैं। मतलब फेसबुक, इंस्‍टा, स्‍नैपचैट, आदि।
  • अगला है गेमिंग कंसोल, जिस में औसतन 1 घंटा 31 मिनट जाता है। इसमें केवल बच्‍चे ही नहीं बल्कि बड़े भी शामिल हैं, जो मोबाइल पर गेम खेलने में बिज़ी रहते हैं।
  • लोग 1 घंटा 19 मिनट ऑनलाइन पोडकास्ट सुनने में देते हैं। यह वो लोग होते हैं जो मोबाइल पर न्‍यूज, करेंट अफेयर्स सुनना पसंद करते हैं।
  • देश में लोग अपने दिन का 1 घंटा 49 मिनट केवल ऑनलाइन म्यूजिक सुनने में बिता देते हैं। इनमें ज्‍यादातर लोग हेडफोन लगाकर म्‍यूजिक सुनते रहते हैं। हालांकि इसमें कार, बस आदि में बजने वाले ऑडियो भी शामिल हैं।
child using mobile in train

अब बात सफर की

ज़रा सोचिए अगर आप बस या ट्रेन में सफर कर रहे हैं और आपका सफर उत्तर में दिल्ली से लेकर दक्षिण के शहर बेंगलुरु तक का है। और इस सफर के दौरान अगर आप अपना ज्‍यादातर समय मोबाइल पर गुज़ार देते हैं, तो आप क्या-क्या मिस कर देते हैं? लिस्‍ट यहां है-

  • यूपी, एमपी के खेतों के बीच हरियाली।
  • स्‍टेशनों पर दिखने वाली शहरों की पहचान।
  • अलग-अलग राज्यों से चढ़ने वाले लोगों की भाषा और उनकी शैली।
  • समोसे से लेकर इडली-वड़ा तक कैसे हमारे देश के स्‍टेशनों पर खाने की चीजें बदलती हैं।
  • रास्‍ते में पड़ने वाली टनल (सुरंगें) और पुल, जो वाकई में अविस्‍मरणीय होते हैं।
  • कौन सा शहर कैसा लगता है, हर एक शहर में क्या फर्क है, यह आप महसूस नहीं कर पायेंगे।

खैर यह लिस्‍ट और भी लंबी हो सकती है।

क्या कहती हैं एक्सपर्ट

बेंगलुरु के सेंट फिलोमेनस अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. रुचि गुप्ता ने नेटिव प्लैनेट से हुई बातचीत में बताया कि पहले जब हम ट्रेन से यात्रा करते थे, तो पूरे सफर के दौरान हम खिड़की से बाहर झांकते रहते थे। हम रास्ते में आने वाले शहरों में क्या-क्या बदलाव हो रहा है, कौन सा स्टेशन आ रहा है, उस स्टेशन की क्या खासियत है, इन बातों पर गौर किया करते थे। अगर ट्रेन में बैठकर आप ओटीटी पर फिल्में या कोई सीरीज देखने में व्यस्त हैं, तो आपको यहीं नहीं पता चलेगा कि कितने स्टेशन निकल गये, कौन सा राज्य आपने पार किया, कौन से स्टेशन पर क्या लोकप्रिय चीज मिलती है।

mobile use in train

खंडवा स्टेशन का फ्लेवर्ड दूध, आगरा-मथुरा की कुल्हड़ वाली चाय और भी काफी कुछ होता है जो हर स्टेशन परिसर की खासियत होती है। आज की पीढ़ी को इन चीजों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं होती है। जब आप ट्रेन की खिड़की से बाहर देखेंगे तभी आपको पता चलेगा कि शहरों का खाना, वहां का मौसम, वहां का पहनावा और खान-पान, यहां तक की मिट्टी का रंग भी कैसे बदल रहा है। पहले कहा भी जाता था कि यात्रा ही सबसे बड़ा शिक्षक होता है। दोस्ती करने का तरीका यात्रा के दौरान ही सीख पाते हैं। लेकिन अब बच्चों में यह कौशल भी विकसित नहीं हो पाता है, क्योंकि वे अपने गैजेट में ही लगातार व्यस्त रहते हैं।

हमारे दिमाग को हमारी 5 ज्ञानेन्द्रियों का इस्तेमाल कर वहां से जानकारी हासिल करने की आदत होती है। लेकिन लोगों का स्क्रीन टाइम इतना बढ़ गया है और लोग लगातार रिल्स, गाने या फिर सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं तो दिमाग को यहीं लत लग गई है। वह ज्ञानेन्द्रियों से जानकारियां हासिल करना बंद कर देता है। हमने अपने दिमाग को काफी ज्यादा मोबाइल का आदि बना दिया है। इसका असर हमारी याददास्त पर भी पड़ रहा है।

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