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India v/s भारत : दुनियाभर के ऐसे देश जो बदल चुके हैं अपना नाम

शेक्सपियर ने कहा था, 'नाम में क्या रखा है!' लेकिन पिछले कई दिनों से देश का नाम 'India' से बदलकर 'भारत' किये जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हंगामा मचा हुआ है। हालांकि हिंदी या फिर क्षेत्रिय भाषाओं में हम आमतौर पर अपने देश को भारत या हिंदूस्तान के नाम से ही पुकारते हैं। हमारे संविधान में लिखा हुआ है कि जो भारत है वहीं India है।

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लेकिन आधिकारिक तौर पर देश का नाम भारत किये जाने को लेकर विपक्षी पार्टियां काफी हंगामा मचा रही हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब किसी देश का नाम में परिवर्तन की बात चल रही हो। इससे पहले दुनिया के कई देश अपना नाम बदल चुके हैं और आज उन्हें उनके नये नामों से जाना जाता है।

म्यांमार

इस लिस्ट में पहला नाम म्यांमार का आता है। भारत के ही पड़ोसी देश म्यांमार का पुराना नाम 'बर्मा' था। म्यांमार ने अपना नाम वर्ष 1989 में बर्मा से बदलकर म्यांमार कर लिया। इस नाम परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र को एक अलग पहचान देना था। हालांकि भारत की तरह ही म्यांमार में भी विपक्षी पार्टियों ने तत्कालिन सत्तारुढ़ पार्टी के इस फैसले का विरोध किया था। म्यांमार में आज भी उसका नाम परिवर्तन एक विवादित मुद्दा ही माना जाता है।

श्रीलंका

भारत का दूसरा पड़ोसी और हिंदू धर्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण देश श्रीलंका ने ब्रिटिश अधिकार से आजादी मिलने के बाद 1972 में अपना नाम 'सिलॉन' से बदलकर श्रीलंका करने का फैसला लिया। श्रीलंका एक संस्कृत शब्द 'दैदीप्यमान द्वीप' से मिला है, जिसको देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धि और विरासत के सम्मान के रूप में चुना गया था।

नीदरलैंड

जनवरी 2020 में एक मार्केटिंग स्टंट के रूप में 'हॉलैंड' ने अपना नाम बदलकर नीदरलैंड करने का फैसला लिया। यह देश साउथ हॉलैंड और नॉर्थ हॉलैंड, दो हिस्सों में बंटा हुआ है। हालांकि आम बोलचाल की भाषा में आज भी 'हॉलैंड' शब्द का इस्तेमाल जरूर किया जाता है लेकिन आधिकारिक रूप से इस देश का नाम अब नीदरलैंड हो चुका है। देश की फुटबॉल टीम ने भी अपना नाम बदल लिया है।

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थाईलैंड

वर्ष 1939 को 'सियाम' ने अपना नाम बदलकर थाईलैंड करने का फैसला लिया। थाईलैंड ने अपना नाम, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया था। माना जाता था कि 'सियाम' नाम पुराना हो चुका है और राष्ट्रीय पहचान की भावना को मजबूती प्रदान नहीं कर पा रहा है। बता दें, थाईलैंड उन कुछ चुनिंदा देशों में से एक है, जिस पर कभी भी ब्रिटिश या फ्रांसीसी अपना अधिकार नहीं जमा पाए।

जिम्बाब्वे

अफ्रिकी देश जिम्बाब्वे को 1980 में ब्रिटेश के आधिपत्य से आजादी मिली। उसी समय देश का नाम भी बदल लिया गया था। पहले इस देश को 'रोडेशिया' के नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि देश का नया नाम गुलामी से मुक्ति और अफ्रिकी संप्रभुता को दर्शाने के प्रतिक के तौर पर ही 'जिम्बाब्वे' चुना गया।

आयरलैंड

ब्रिटिश सत्ता से पूर्ण रूप से स्वतंत्रता के प्रतिक के रूप में 1937 को देश का नाम 'आयरलैंड' किया गया। 1922 से लेकर अब तक इस देश को 'आयरिश फ्री स्टेट' के तौर पर जाना जाता था, जो आंशिक रूप से स्वतंत्र एक राष्ट्र को दर्शाता था। लेकिन बाद में जब इस देश ने पूर्ण स्वतंत्रता पायी तो अपना नाम 'आयरलैंड' रख लिया, जो इसकी विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान भी बनी।

ईरान

किसी भी देश के नाम परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण फारस का 'ईरान' बनना था। इतिहास में हमने फारस और फारसी युद्धों के बारे में काफी कुछ पढ़ा है लेकिन ईरानियों का मानना था कि यह नाम उनके वर्तमान राष्ट्र की बहुमूखी पहचान को अच्छी तरह से दुनिया के सामने नहीं रख पाता है। इसलिए 21 मार्च 1935 को फारसी नव वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में ऐतिहासिक ईरानी वंश के रेजा शाह पहलवी ने विदेशी मेहमानों से फारस के बजाए 'ईरान' कहने के लिए कहा था। इसके बाद से ही फारस नाम के स्थान पर इस देश को ईरान नाम से पहचाना जाने लगा।

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