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देवी देवतायों के मंदिर तो बहुत देखे होंगे..लेकिन क्या जानते हैं इन राक्षस मन्दिरों को

भारत में कई ऐसे राक्षस मंदिर मौजूद हैम जहां लोग राक्षसों की पूजा कर अपनी मन्नत मांगते हैं।

By Goldi

यूं तो हम सभी मंदिर में देवी देवतायों की पूजा करने जाते हैं, लेकिन क्या कभी आपने राक्षस की पूजा की है। भारत में कई ऐसे राक्षस मंदिर मौजूद हैम जहां लोग राक्षसों की पूजा कर अपनी मन्नत मांगते हैं।

तो इसी क्रम में बिना देरी किये मै आज आपको भारत के चुनिन्दा राक्षस मन्दिरों की यात्रा पर लेकर चलती हूं.. तो बिना देरी कीजिये स्लाइड्स पर डालिए एक नजर

नेटवार, उत्तराखंड

नेटवार, उत्तराखंड

उत्तराखंड के नेटावर शहर में महाभारत के दुर्योधन की पूजा की जाती है। इस मंदिर में दूर दूर श्रद्धालु दुर्योधन के दर्शन करने पहुंचते हैं।इस मंदिर के पास ही कुंती पुत्र कर्ण का मंदिर भी स्थित है। बता दें,दुर्योधन धृतराष्ट्र के सबसे बड़े पुत्र थे।

गांधारी मंदिर, मैसूर

गांधारी मंदिर, मैसूर

कौरवों की मां गांधारी भी महाभारत में नेगेटिव रोल के लिए जानी जाती है। गांधारी का मंदिर मैसूर में स्थित हैं। ये मंदिर ज्यादा पुराना तो नहीं है पर इसका निर्माण 2008 में हुआ है।

कोल्लम, केरल

कोल्लम, केरल

महाभारत में पांडवो के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी करने वाला दुर्योधन महाभारत के बुरे पात्रों में गिना जाता है। दुर्योधन कौरवों में सबसे बड़ा भाई था। इस मंदिर मे भी रोजाना दुर्योधन की पूजा होती हैं। इस मंदिर में पूजा के दौरान सुपारी, अरक और लाल कपड़े चढ़ाए जाते है। इस मंदिर को मालंदा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

गोकुल,मथुरा

गोकुल,मथुरा

पौराणिक कथायों की माने तो, पूतना नन्हे से बाल गोपाल वध करने आई थी..लेकिन वह वध नहीं कर सकी..लेकिन नन्हे से बाल गोपाल ने पूतना का स्तनपान किया था..जिस कारण गोकुल नगरी में पूतना का एक मंदिर है..लोग उनकी पूजा मा के रूप में करते हैं।

शकुनी मंदिर

शकुनी मंदिर

जब कभी महाभारत पढ़ते या देखते हैं, तो ज्ञात होता है कि, महाभारत होने का मुख्य कारण सिर्फ शकुनी मामा थे। शकुनि की चौसठ की चालों के कारण ही पांडव अपना सब कुछ जुए में हार गए थे।इतना ही नहीं राजकुमार होते हुए पांड्वो को बनवास झेलना पड़ा। बता दें,शकुनी का मंदिर केरला के कोल्ल्म जिलें में स्थित है। यह काफी प्राचीन मंदिर है और ये कोल्लम के पवित्रेश्वरम में स्थित है। इस मंदिर में शकुनि की पूजा व तांत्रिक क्रियाए भी होती है। यहां पर शकुनि की पूजा नारियल और रेशम के कपड़े से की जाती है।

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