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फुग्ताल मठ से जुड़ी दिलचस्प बातें!

फुग्ताल मठ की शांति भरी यात्रा में जानिए इन दिलचस्प बातों को!

दूर दराज़ जगह में बसे क्षेत्र, जैसे फुग्ताल मठ हर पर्यटक के मन में एक अलग उत्साह को जन्म देते हैं। लोगों की पहुँच से बिल्कुल दूर, चट्टान पर बना बड़ा सा गुफ़ा ऐसी वास्तुकला का नमूना है यह क्षेत्र। आपको नहीं लगता ऐसे क्षेत्र के बारे में दिलचस्प चीजों को जानना और कितना दिलचस्प होगा?

लद्दाख के बंजर सुरम्य परिदृश्य हमेशा से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। कल्पना कीजिये आप ऐसे ही खूबसूरत परिवेश के सफ़र पर हो, ऊँचे पहाड़ों पर ट्रेकिंग कर ऐसी जगह पर पहुंचें जो पहाड़ पर बसे मधुमक्खी के छत्ते की तरह नज़र आता हो, कितना दिलचस्प और रोमांचक होगा ना ऐसा सफ़र? ऐसी ही जगह, फुग्ताल मठ पर जाने से पहले आपके लिए यहाँ की दिलचस्प बातों को जानना और भी मज़ेदार होगा।

Phugtal Monastery

फुग्ताल मठ
Image Courtesy:
hamon jp

तो चलिए जानते हैं फुग्ताल मठ से जुड़ी दिलचस्प बातों को।

मठ में तब्दील हुआ गुफ़ा

फुग्ताल मठ लद्दाख में बसे लुंगनाक घाटी के चट्टान पर स्थित एक प्राकृतिक गुफ़ा हुआ करता था। आज मठ में परिवर्तित यह जगह प्राकृतिक गुफ़ा के चारों और बना हुआ है जो बौद्ध भिक्षुओं के लिए एक आदर्श जगह है।

शांति की खोज

ऐसा कहा जाता है कि यह प्राकृतिक गुफ़ा मठ के निर्माण से पहले से ही यहाँ लगभग 2500 सालों से स्थित है। बौद्ध भिक्षुओं, संतों और विद्वानों ने इस गुफ़ा को ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा के लिए एक आदर्श स्थल के रूप में पाया है। ऐसा माना जाता है कि बुद्धा के 16 प्रमुख अनुयायी इस गुफ़ा के सबसे पहले निवासी थे।

Phugtal Monastery

फुग्ताल मठ
Image Courtesy:
Shakti

फुक-ताल

इसे फुग्ताल या फुक्ताल मठ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ की स्थानीय ज़ंस्कारी भाषा में 'फुक' का मतलब होता है 'गुफ़ा' और 'ताल' का मतलब होता है आराम के क्षण। फुक्ताल पहले एक अज्ञात स्थान हुआ करता था जहाँ शांति और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती थी।

एक लंबी यात्रा

अगर आपको फुगताल मठ तक पहुँचना है तो, यहाँ तक पहुँचने के लिए परिवहन के साधन या तो सिर्फ खच्चर या घोड़े उपलब्ध हैं या फिर आपको पैदल ही यहाँ तक पहुंचना होगा। ज़ंस्कार के पदनुम शहर से कुछ घंटे गाड़ी की सवारी आपको मठ तक जाने वाली सड़क पर पहुंचाएगी। लगभग 6 से 8 घंटे बंजर पहाड़ी दर्रों से गुज़रता हुआ रास्ता आपको मठ तक पहुंचाएगा।

Phugtal Monastery

फुग्ताल मठ
Image Courtesy:
hamon jp

हरा-भरा गाँव

चा और अान्मु ऐसे दो गाँव हैं जो फुग्ताल मठ के निकट ही बसे हुए हैं। ट्रेकर्स अक्सर अपनी फुग्ताल गोम्पा की यात्रा में इन गाँवों में ठहर आराम करते हैं। गाँव की चारों ओर की हरी-भरी भुमि यहाँ की सभ्यता को दर्शाती हुई अपने विपरीत स्थित बंजर परिदृश्य से बिल्कुल अलग नज़ारे का निर्माण करती है।

तिब्बती बौद्ध धर्म से संबंधित
जांगसम शेरपा ज़ांग्पो ने फुक्ताल मठ की खोज 14 वीं शताब्दी में की थी। यह बौद्ध धर्म के गेलुग स्कूल (तिब्बती बौद्ध धर्म का नया स्कूल) के अंतर्गत आता है।

Phugtal Monastery

फुग्ताल मठ
Image Courtesy:
hamon jp

रहस्यमयी खूबसूरती
सुनहरी बंजर भूमि और पहाड़ी रास्ते आपको पूरी तरह से एक अलग ही दुनिया में ले जायेंगे। मठ तक जाने वाले रास्तों में कई शिलालेख और स्तूप स्थापित हैं। फुग्ताल मठ में धार्मिक शिक्षा, प्रार्थना घर, पुस्तकालय आदि के लिए एक स्कूल भी बना हुआ है। भित्ति चित्र से सुसज्जित अद्वितीय और खूबसूरत वास्तुशैलियों को प्रदर्शित करती यहाँ की दीवारें आपको आश्चर्य से भर देंगी।

जैसा की फुग्ताल मठ ज़ंस्कार घाटी के बहुत दूर दराज़ इलाके में बसा हुआ है, यहाँ तक की यात्रा करना उतना आसान नहीं है। यह भारत के अद्वितीय मठों में से भी एक है। फुग्ताल मठ लद्दाख के खूबसूरत परिदृश्य से होती हुई आपकी एक अंतहीन यात्रा होगी और यहाँ का अनुभव किसी सपने के सच होने जैसा। तो अब आप जब भी यहाँ जाएँ हमारे साथ अपने अनुभव और सुझाव साझा करना ना भूलें।

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