देश की राजधानी दिल्ली विविधताओं और विशेषताओं से भरा शहर है, जो आने वाले पर्यटक को बहुत कुछ देता है। बात अगर ग्लोबल स्तर पर करें तो आज दिल्ली का शुमार विश्व के उन चुनिंदा डेस्टिनेशन में होता है जहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने आते हैं। यदि हम बात दिल्ली के विषय में करें और क़ुतुब मीनार का ज़िक्र न हो तो बात अधूरी रह जाती है। इस ऐतिहासिक ईमारत ने हमेशा से ही वास्तुकला के प्रेमियों को अपनी तरफ आकर्षित किया है। प्रायः ये देखा गया है कि दुनिया भर के पर्यटक इसकी कलात्मकता, रचनात्मकता और बेहतरीन वास्तुकला के चलते इसकी प्रशंसा करते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसी क़ुतुब मीनार के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जिनको शायद आपने पहले कभी नहीं सुना होगा।
ये हैं क़ुतुब मीनार के वो तथ्य जिनसे अब तक आप अनजान थे।
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यूनिस्को विश्व विरासत स्थल
क़ुतुब मीनार का शुमार यूनिस्को विश्व विरासत स्थल के तौर पर होता है।

ईंटों से निर्मित विश्व की सबसे बड़ी संरचना
आपको शायद जानकार हैरानी हो कि क़ुतुब मीनार का शुमार ईंटों से निर्मित विश्व की सबसे बड़ी संरचना में होता है। ये मीनार 72.5 मीटर ऊंची है।

ईमारत की वास्तुकला
यदि आप इस ईमारत को गौर से देखेंगे तो आपको मिलेगा कि इस ईमारत में की गयी नक्काशी में इंडो मुग़ल वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया है जो इस ईमारत को और भी अधिक खूबसूरत बनाता है।

लोहे का स्तम्भ
क़ुतुब कॉम्प्लेक्स में एक लोहे का अनोखा खम्बा मौजूद है जिसको लेकर कई रहस्य और किवदंतियां मिलती हैं।

सीढ़ियों की संख्या
अगर क़ुतुब मीनार की सीढ़ियों को कायदे से गिना जाये तो मिलता है की आप 379 सीढ़ियों को पार करने के बाद ही मीनार की चोटी तक पहुंच सकते हैं।

लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई ईमारत
क़ुतुब मीनार उन ईमारतों में गिनी जाती है जो कि लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है। इस पूरी ईमारत कि नक्काशियों में क़ुरान की आयतों का इस्तेमाल किया गया है।

टिल्ट या झुकाव
आपको क़ुतुब मीनार एक तरफ से कुछ झुकी हुई दिखेगी, ऐसा इसलिए कि कई बार इस ईमारत की मरम्मत और टूटे हुए हिस्सों का पुनर्निर्माण किया गया है।

हर मंज़िल पर बालकनी
इस ईमारत की खासियत ये है की एक मीनार होने के बावजूद इस पर बालकनियों का निर्माण किया गया है।

क़ुतुब मीनार के आस पास स्थित मंदिर
कहा जाता है कि इस ईमारत के आस पास 27 मंदिरों का निर्माण किया गया था जिन्हें बाद में आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट कर दिया गया।

पर्यटकों का मीनार के टॉप पर चढ़ना मना है।
1981 में क़ुतुब मीनार पर हुए एक हादसे के बाद यहां सरकार ने पर्यटकों द्वारा मीनार के शिखर पर चढ़ने पर पाबंदी लगा दी गयी है।



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