अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर हिमालय की तलहटी में स्थित है। यह पापुमपरे जिले के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है और 20 अप्रैल 1974 से राजधानी के रूप में रहा है। यह भारत के सबसे बड़े पूर्वोत्तर राज्य की राजधानी है और राज्य का सबसे बड़ा शहर भी है। ईटानगर को लघु भारत भी कहा जाता है क्योंकि देश के हर कोने के लोग यहाँ रहते हैं। इसे रामचन्द्र की राजधानी मायापुर के साथ पहचाना गया है। शैव,वैष्णव दोनों के लिए ही है तेली मंदिर
वे 14वीं-15वीं शताब्दी के जितारी वंश के राजा थे। ईटानगर में पुरातत्वीय महत्व के कई स्थान हैं। यहाँ के सामाजिक - सांस्कृतिक संस्थान इसके ऐतिहासिक महत्व को और भी बढ़ा देते हैं। पर्यटक ईटा किले पर अवश्य जाते हैं जो आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। इस शहर का नाम इसे किले के नाम पर पड़ा है। बोमडीला परशुराम कुण्ड, मलिनीथन और भीष्मक नगर शहर के अन्य पर्यटक आकर्षण हैं जहां बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
आपको बता दें कि ईटानगर में स्थित राज्यपाल का राजकीय निवास राजभवन भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। तो आज अपने इस लेख के जरिये हम आपको बताएँगे कि ईटानगर की यात्रा पर क्या क्या देख सकते हैं आप।
ईटा किला
ईटानगर को उसके शहर भर में स्थित कई पुरातत्व स्थलों के लिये जाना जाता है। ईटा किला (ईंटो का किला) अरूणाचल प्रदेश के सबसे मनमोहक पर्यटक स्थानों में से एक है। ईटानगर नाम का उद्भव ईटा किला से ही हुआ है जिसकी संरचना अनियमित है। शहर के केन्द्र में स्थित होने के कारण यहाँ शहर के किसी भी कोने से आसानी से पहुँचा जा सकता है। किले का इतिहास 14वीं-15वीं शताब्दी का है। निर्माण में 16,200 घन मीटर लम्बी ईंटे प्रयुक्त हुई हैं। कुछ इतिहासकार इन ईंटों को मायपुर के शासक रामचन्द्र के समय का मानते हैं। आपको बता दें कि वे 1360-1550 ई0 जातरी वंश के शासक थे।

गंगा झील
ईटानगर की गंगा झील अरुणाचल प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण है। इसे स्थानीय रूप से गेकर सिन्यी या गेकर सेन्यिक के नाम से जाना जाता है। राजधानी शहर से 6 किमी की दूरी पर स्थित इस प्रसिद्ध झील के चारों ओर का घना जंगल मुख्यतः आदिकालीन वनस्पतियों से भरा है। लम्बे पेड़, ऑर्किड और फर्न जैसी प्रजातियाँ इस झील की सुन्दरता और भी बढ़ा देते हैं। यह शांत झील कठोर पत्थरों से भी घिरी है।

ईटानगर वन्यजीव अभ्यारण्य
ईटानगर वन्यजीव अभ्यारण्य अरुणाचल प्रदेश के आठ अभ्यारण्यों में से एक है। पापुमपरे जिले में स्थित यह अभ्यारण्य 140.30 वर्ग किमी में फैला है। विभिन्न प्रकार की जलवायु और भूभाग के कारण यहाँ पौधों और जन्तुओं की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। प्रकृति की गोद में स्थित असंख्य पौधे और जीव अभ्यारण्य की सुन्दरता और भी बढ़ा देते हैं। वन्यजीवों की सुरक्ष और संरक्षण के उद्देश्य से अभ्यारण्य में दीवार द्वारा मानव गतिविधियों को सीमित कर दिया गया है।

जवाहर लाल नेहरू संग्रहालय
सारे विश्व में संग्रहालय विज्ञान, संस्कृति, परम्परा और इतिहास से सम्बन्धित वस्तुओं के संरक्षण के लिये समर्पित होते हैं। अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में स्थित जवाहर लाल नेहरू संग्रहालय एक ऐसा ही संग्रहालय है। इसे 1980 में स्थापित किया गया था और राज्य के जनजातीय संग्रहों के लिये समर्पित है। इन संग्रहों के माध्यम से पर्यटक क्षेत्र के जीवनशैली और संस्कृति के बारे में अनुमान लगा सकते हैं।

संग्रहालय कपड़ों, हथियारों, गहनों, पगड़ियों, वाद्य यन्त्रों और हस्तशिल्प के अलावा पुरातत्व वस्तुओं को प्रदर्शित करता है। अपने अनोखे और रोचक संग्रहों के कारण यह संग्रहालय दुनिया भर के पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है। आपको बता दें कि संग्रहालय का कैलिडोस्कोप दृश्य लकड़ी की नक्काशियों, घरेलू सामानों और कपड़ों पर केन्द्रित है।
ईटानगर के उद्यान
अरुणाचल प्रदेश में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की जलवायु के कारण अनगिनत पौधों की प्रजातियाँ उगती हैं। ये ऊष्णकटिबन्धीय तथा उपऊष्णकटिबन्धीय सदाबहार वन कई प्रकार के माँसाहारियों और शाकाहारियों का घर हैं।
वनों, अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के अलावा ईटानगर में राज्य के कई सुन्दर उद्यान भी हैं। इन्हें पर्यटकों के आराम तथा मनोरंजन के लिये बनाया गया है। पर्यटक और स्थानीय लोग इन पार्कों में आराम फरमाने के लिये आते हैं। घास और पेड़ इनकी सुन्दरता बढ़ाते हैं।
कैसे पहुंचें ईटानगर
तेजपुर और लीलाबरी में यहां आने का निकटतम हवाई अड्डा है। गौरतलब है कि राज्य की राजधानी होने के कारण ईटानगर सड़क तथा वायुमार्गों से सुलभ है। असम का हरमूती निकटतम रेलवे स्टेशन है।



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