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कैलाश मानसरोवर यात्रा - 5 सालों बाद फिर से हो रही है शुरू, कब से? जानिए यात्रा का रूट और सभी Details

एक बार फिर से शुरू होने वाली पवित्र कैलाश मानसरोवर की यात्रा। कोरोना काल के बाद से लेकर अब तक यानी पिछले लगभग 5 सालों से यह यात्रा बंद थी। लेकिन अब एक बार फिर से इसे शुरू की जा रही है। हाल ही में इस बात की घोषणा संबंधित विभाग के अधिकारियों ने की है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की वजह से ही इस यात्रा को दोबारा शुरू किया जा रहा है।

अगर कोविड 19 अतिमारी के समय को छोड़ दिया जाए, तो हर साल सैंकड़ों की संख्या में तीर्थ यात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते रहते थे। यह यात्रा अध्यात्मिक होने के साथ-साथ रोमांचक और बड़े ही सुन्दर पहाड़ी नजारों से घिरा होता है। इस वजह से भी रोमांच प्रेमियों को भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा आकर्षित करता है।

कब से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा?

Financial Express की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार 5 सालों बाद एक बार फिर से कैलाश मानसरोवर की यात्रा इस साल 30 जून से शुरू होने वाली है। बताया जाता है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर हर वह व्यक्ति जा सकता है, जो भारत का नागरिक हो और जिसके पास भारत का वैध पासपोर्ट मौजूद हो।

मीडिया रिपोर्ट में बताया जाता है कि 30 जून से यह यात्रा शुरू होगी जिसमें 50 यात्रियों का 5 समूह लीपूलेख दर्रा से होकर जाएंगे। इस तरह कुल 250 यात्री इस रूट से होकर जाएंगे, उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में मौजूद है।

कब से कब तक चलेगी यात्रा?

बताया जाता है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा में 5 समूह में तीर्थ यात्रियों को ले जाया जाएगा, जिसमें से 50 तीर्थ यात्रियों का पहला समूह 10 जुलाई को उत्तराखंड के लीपूलेख दर्रा से होकर चीन में प्रवेश करेगा। वहीं पड़ोसी देश चीन से तीर्थ यात्रियों का समूह 22 अगस्त को वापस भारत लौट आएगा।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इस तीर्थयात्रा की शुरुआत दिल्ली से होगी और 22 दिनों बाद तीर्थ यात्री वापस दिल्ली लौट आएंगे। अमरनाथ यात्रा की तरह ही कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी स्वास्थ्य की जांच और सर्किफिकेट का होना अनिवार्य है। चीन में प्रवेश करने से पहले तीर्थ यात्रियों का हेल्थ चेक-अप प्वाएंट दिल्ली और गुंजी में होगा।

कैलाश मानसरोवर का रूट -

कैलाश मानसरोवर की यात्रा मुख्य रूप से दो रूट से करवाया जाता है -

1. लीपूलेख दर्रा
2. नाथु ला दर्रा

बताया जाता है कि दिल्ली से मानसरोवर की यात्रा पर निकलने वाले तीर्थ यात्रियों का हर समूह उत्तराखंड के चम्पावत जिले के टनकपुर में रात को विश्राम करेगा। इसके बाद पिथौरागढ़ जिले के धारचुला में दूसरी रात को रुकवाया जाएगा। इसी तरह तीर्थ यात्रियों को दो रात गुंजी में और दो रात नभीदंग में रुकेंगे। इसके बाद चीन के पुरंग काउंटी से तकलकोट से होकर प्रवेश करेंगे।

चीन में कैलाश के दर्शन करके वापस लौटने के बाद तीर्थ यात्री पिथौरागढ़ के बुंदी, फिर चौकोरी और तीसरी रात अल्मोरा में रुकेंगे। इसके बाद 22 दिनों में कैलाश मानसरोवर की यात्रा को पूरा तीर्थ यात्रियों के सभी समूह वापस दिल्ली लौट आएंगे।

गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर 4,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील और उसके पास ही 6,638 मीटर ऊंचा पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का घर माना जाता है। स्थानीय लोग मानसरोवर को मपम युमत्सो के नाम से जानते हैं, जो तिब्बत क्षेत्र में मौजूद है। कैलाश और मानसरोवर को सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन और तिब्बती स्थानीय लोग भी पवित्र और धार्मिक आस्था का केंद्र मानते हैं।

पिछले कुछ समय से विभिन्न एयरलाइंस कंपनियों ने कैलाश मानसरोवर के हवाई मार्ग से दर्शन करवाने की प्रक्रिया को शुरू किया था लेकिन इस तीर्थ यात्रा के एक बार फिर से शुरू होने से निश्चित रूप से महादेव के भक्तों में काफी उत्साह देखा जाएगा।

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