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16वीं सदी में हुआ था करन-अर्जुन का जन्म, तमिलनाडु के मंदिर में हैं साक्ष्‍य!

मेरे करन-अर्जुन आयेंगे... यह डायलॉग आपको बहुत अच्‍छे से याद होगा। यह उस दुखियारी मॉं का डायलॉग है, जिसके बेटों का ठाकुर दुर्जन सिंह व उसके साथियों ने मौत के घाट उतार दिया था। फिल्म करन-अर्जुन पुनर्जनम पर आधारित एक बेहतरीन मूवी है, लेकिन हम जिस करन-अर्जुन की बात करने जा रहे हैं, उनका जन्म 16वीं सदी या शायद उससे पहले हुआ और उनकी कहानी भी शाहरुख-सलमान की फिल्म से मिलती-जुलती ही है।

Venkatachalapathy Temple history

इस सच को समझने के लिए हम आपको तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के एक मंदिर में ले चलेंगे, जहॉं पर प्राचीन पत्थरों पर की गई नक्काशी आपको करन-अर्जुन मूवी की याद दिलायेगी। हम आपको मंदिर की कुछ ऐसी चीजों के बारे में बतायेंगे, जिन्‍हें आप सीधे तौर पर ठाकुर दुर्जन सिंह के अत्याचारों और दुर्गा के जीवन से सीधे कनेक्ट कर पायेंगे।

16वीं सदी का वेंकटाचलपति मंदिर

तिरुनवेली जिले के कृष्‍णापुरम गॉंव में स्थित वेंकटाचलपति मंदिर तिरुचंदेर रोड पर शहर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थ‍ित है। यह उन मंदिरों में से एक है, जो तमिलनाडु की प्राचीन कलाशैली को आज भी संजोय हुए है। इस मंदिर को पत्थरों पर नक्काशी के लिए जाना जाता है। जिस तरह से कारीगरों ने यहां पत्थरों को काट-काट कर अपने समय की कहानियों को दर्शाया है, उसे देख आज भी लोग चकित रह जाते हैं।

खैर हम इस मंदिर के बारे में जो कुछ भी बताने जा रहे हैं, वो मदुरै कामराज विश्‍वविद्यालय में डॉ. के करुणाकर पांडियन द्वारा किए गए रिसर्च पर आधारित है। यह रिसर्च 2009 में किया गया था। इस रिसर्च में मंदिर के अलग-अलग भागों का बहुत गहराई से वर्णन किया गया है।

Venkatachalapathy Temple history

यह एक वैष्‍णव मंदिर है, जहां पर गर्भ गृह में तीन मूर्तियां हैं। पहली भगवान वेंकटाचलपति की और बाकी दो श्री देवी व भू देवी की। इस मंदिर में अलग-अलग शृंखला में खड़े हुए खंभ (पिलर) यहां की खूबसूरती है।

जैसे ही आप इस मंदिर के मुख्‍य मंडप में प्रवेश करेंगे, और आपके साथ कोई गाइड है, तो आपको ऐसा लगेगा मानो आप करन-अर्जुन के उस जनम में चले गए हैं, जो उन्‍होंने 16वीं सदी में लिया था।

मंदिर के रंग मंडप में 9 पिलर

पहले पिलर में दो महिलाओं को नृत्य करते दर्शाया गया है। अगर करन-अर्जुन मूवी से कनेक्ट करें तो काजोल और ममता कुलकर्णी से कनेक्ट कर सकते हैं। खैर अभी इसकी जरूरत नहीं है।

अगले पिलर में एक महिला अपने बच्चे को एक मेले में घुमाती हुई नज़र आयेगी। अगर आपको याद हो, मूवी में एक मेला दिखाया गया है, जहां चूड़‍ियों का बाज़ार होता है।

दूसरे पिलर के ठीक सामने वाले खंभे पर एक दुख‍ियारी महिला को दर्शाया गया है, जो अपने दु:खों के बारे में एक ज्योतिष/पुजारी को बता रही है। मूवी में भी दुर्गा पहाड़ी पर स्थ‍ित काली मंदिर के पुजारी के पास जाती है।

अगले खंभे पर एक महिला रोती बिलखती दर्शायी गई है जो बच्चे उठाने वाले एक घुड़सवार की ओर इशारा कर रही है और मानों कह रही हो, उसे पकड़ो। यहां पर आप ठाकुर दुर्जन सिंह और दुर्गा का वो सीन याद कर सकते हैं जो करन-अर्जुन के मारे जाने के बाद दिखाया गया था।

पांचवें पिलर पर दर्शाया गया है कि एक क्रूर राजा एक राजकुमारी को कंधे पर उठाकर ले जा रहा है। छठे पिलर में घोड़े पर सवार एक राजकुमार राजकुमारी को बचाने के लिए उनका पीछा कर रहा है। काजोल और शाहरुख खान का वो सीन याद होगा, जब दुर्जन सिंह उसे उठा ले जाता है।

एक पिलर में कई सारे घोड़ों के बीच एक पर सवार राजकुमार भी आपको उस अस्तबल की याद दिलाने के लिए काफी है, जिसे फिल्म में आग लगा दी जाती है।

सातवें खंभे पर एक राजा के सीने पर चाकू घोपा हुआ दर्शाया गया है। नक्काशी करने वाले शिल्पकारों ने यहां इस मूर्ति में अंदर तक दिखने वाली मांसपेशियों तक को दर्शाया है। अगर करन अर्जुन मूवी की बात करें तो इसमें भी दुर्जन सिंह अपने पिता (राजा) की हत्या कर देता है।

8वें और 9वें पिलर में है खास

ये वो पिलर हैं, जिन पर 16वीं सदी के दौरान अथवा पहले जन्में दो भाईयों करन-अर्जुन को दर्शाया गया है। करन-अर्जुन को समर्पित ये दो पिलर इस मंदिर में सबसे खास पिलर माने जाते हैं। इसके ऊपर बने राज-कुमारों के फेशियाल एक्सप्रेशन हैरान करने वाले हैं। जब भी आपको इस मंदिर में जाने का मौका मिले, तो एक बार रंग मंडपम में जरूर जाइयेगा। आप यहां किसी से भी करन-अर्जुन पिलर के बारे में पूछ सकते हैं।

करन-अर्जुन फिल्म की कहानी से कनेक्श एक इत्तेफाक हो सकता है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि 16वीं सदी या उससे भी पहले करन-अर्जुन इस दुनिया में आये थे। यह भी सच है कि उस वक्त वीर भद्र, मनमाता, राठी, पुरुषा मिरुगा और धर्मा नाम के लोग भी भारत में जन्में जिनके जीवन को दर्शाने वाले ये पिलर इतिहास की एक अमर कथा का चित्रण करते हैं।

नेल्लइयप्पर मंदिर में भी करन-अर्जुन

तिरुनवेली शहर के मध्‍य में स्थ‍ित स्वामी नेल्लइयप्पर मंदिर में भी करन-अर्जुन की प्रतिमाएं हैं। 1654 AD में यहां के शासक शिवथ‍ियप्पा नाइक ने इस मंदिर की दक्षिण दिशा की ओर ऋषभ मंडपम बनवाया था। इस मंडप कुरावन, कुराति, रति, मनमता की सुंदर मूर्तियां हं। इस मंडप के द्वार पर राजा पगदई और वीरभद्र के अलावा करन-अर्जुन की सुंदर मूर्तियां हैं। इससे यह साफ है कि 16वीं सदी के पहले करन-अर्जुन नाम के वीरों ने जन्म लिया था, जिनके प्रमाण आज भी इस मंदिर में विराजमान हैं।

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