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स्कीइंग, पैराग्लिडिंग, ट्रैकिंग, मोनेस्ट्री एक टूरिस्ट को सब कुछ देगा हिमाचल का केलांग

By Belal Jafri

हमेशा ही हिमाचल प्रदेश ने अपनी खूबसूरती से लोगों को मन्त्र मुग्ध किया है। मनमोहक झीलों, बर्फ से ढंकी हुई चोटियों, बर्फीले ग्लेशियरों वाला राज्य हिमाचल प्रदेश भारत में मौजूद ऐसा राज्य है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, खूबसूरत नज़रों और शांत वातावरण के कारण हर साल पूरी दुनिया के लाखों पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।

यूं तो हिमाचल प्रदेश में देखने और निहारने के लिए बहुत कुछ है लेकिन यदि आप प्रकृति को उसके सर्वोच्च रूप में देखना चाहते हैं तो हमारा सुझाव है कि आप जीवन में एक बार इस राज्य के एक बेहद खूबसूरत शहर केलांग की यात्रा अवश्य करें। समुंदरी तट से 3350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, हिमालय का यह ख़ूबसूरत शहर केलांग "मठों की भूमि" के नाम से प्रसिद्ध है।

यहाँ कई पर्यटक स्थल है और यह लाहौल और स्पीति जिलों का मुख्यालय है। केलांग की प्रशंसा में जाने माने लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने यह कहा कि "यहाँ भगवन वास करते है, इंसानों के लिए यहाँ कोई स्थान नहीं"। ऊँची ऊँची पहाड़ियां और वादियों पर छाई हरियाली मन को आनंदित करती हैं।

फोटो कर्टसी - Vyacheslav Argenberg

केलांग में आप कई बौद्ध धार्मिक स्थल देखेगे, जो अपनी निर्माण शैली और इनमे छिपे इतिहस के लिए प्रसिद्ध है । कर्दंग और शासुर यहाँ के दो प्रसिद्ध मठ है। कर्दंग मठ लग भग 900 साल पुराना और 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जब कि शासुर मठ का निर्माण भूटान के राजा नावंग नाग्याल के धर्म प्रचारक ज़न्स्कार के लामा देवा ग्यात्शो ने 17 वी सदी में किया था। इनके आलावा गुरु घंटाल मठ, तायुल मठ, और गेमुर यहाँ के प्रसिद्ध मठ है। तो अब देर किस बात की आइये आपको बताते हैं कि केलांग में और क्या क्या देख सकते हैं आप।

गेमुर मठ

गेमुर मठ लग - भग 700 साल पुराना है और यह केलांग से 18 कि.मी दूर है। यह स्थान गेमुर गाँव से 600-700 गज दूर, भगा घाटी में है। इस धार्मिक स्थल का प्रमुख आकर्षण है 11वीं सदी की बनी देवी मरीचि और देवी वज्रावरही की मूर्तियाँ। कहा जाता है कि इनका उद्गम हिन्दू देवी वरही से हुआ है। हर साल जुलाई के महीने में यहाँ "डेविल डांस" आयोजित किया जाता है।

गुरु घंटाल मठ

फोटो कर्टसी - John Hill

गुरु घंटाल मठ की स्थापना गुरु पद्मसंभव ने 8 वी सदी में की थी। इसे घंढोल मठ भी कहा जाता है। केलांग से 8 कि.मी दूर लाहौल जिले में स्थित यह मठ सब से प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थान है। मठ में बनी लकड़ी की मूर्तियाँ मठ के प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। मठ की निर्माण शैली काफी अलग है। इसकी छत पिरामिड आकार की है और मठ में कई नक्काशियां की गयी है।

मठ की अवस्था ठीक न होने के कारण यहाँ की कई मूर्तियाँ तुपचिलिंग गाँव के मठ में रखी गई है। चन्द्र और भंगा नदी के किनारे बने इस मठ में बौधिसत्व और भगवन बुद्ध के करुना के प्रतिक अवलोकितेश्वर की क्षतिग्रस्त संगमरमर का सर है। इस मठ का इतिहास 2 शताब्दी में नागार्जुन के समय का है। इस मठ में काले पत्थर की काली माँ की मूर्ति है, जिससे पता चलता है कि यह मठ पहले एक मंदिर था।

कर्दंग मठ

क्यों कहते हैं केलांग को मठों का शहर

हिमाचल के केलांग से केवल 5 कि.मी दूर कर्दंग मठ काफी प्राचीन गोम्पा है। यह प्राचीन गोम्पा भगा नदी के किनारे, 3500 मीटर की ऊंचाई पर है। यह लग भग 900 साल पुराना है और यह मठ बुद्धियों के द्रुप कग्युद्ध स्कूल के अंतर्गत है। 12 वी सदी में बने इस मठ का ग्रंथालय भारत का सबसे बड़ा बौद्ध ग्रंथालय है। इस ग्रंथालय में भोटिया और शर्पा भाषाओं में लिखे कंग्युग और तंग्युग धर्म ग्रन्थ मौजूद है।

शासुर मठ

शासुर का अर्थ है नीला देवदार। शासुर मठ का निर्माण 17वीं सदी में भूटान के राजा नावंग नामग्याल के धर्म प्रचारक जन्स्कर के लामा देव ग्यात्शो ने किया था। शासुर केलांग से 3 कि.मी दूर है। यह मठ नीले देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ है और यह प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।

मठ की दीवारों पर थांगका चित्रों का प्रदर्शन है जिन में से कुछ 15 फीट ऊँचे है। यह चित्र बौद्ध धर्म के 84 सिद्धों का प्रतिनिधित्व करती है। जून और जुलाई में यहाँ छंम नामक वार्षिक अनुष्ठान होता है।

तायुल मठ

यह धार्मिक और प्राचीन मठ हिमाचल के केलांग से 6 कि.मी दूर है। समुंदरी तट से 3900 मीटर ऊँचा सतिन्ग्री गाँव का यह मठ केलांग का सब से प्राचीन मठ है।इस मठ का निर्माण खाम शेत्र के ड़ोग्पा लामा, सेर्ज़ंग रिन्चन ने17 वी सदी में किया था। तिब्बती में ता-युल का अर्थ है "चुनी हुई जगह"।

इस मठ में 12 फीट ऊँची पद्मसंभव की मूर्ति के साथ सिंहमुख और वज्रवहत की मूर्ति भी रूपित है। इस मठ का प्रमुख आकर्षण है यहाँ कि लाखों साल पुरानी मणि चक्र जो कई बौद्ध अवसरों पर स्वयं घुमती है। तायुल के लामा अनुसार यह 1986 में स्वयं घूमी थी।

कैसे जाएं केलांग

वायुमार्ग द्वारा

भुंटुर हवाई अड्डा केलांग से केवल 168 कि.मी दूर है। यह केलांग के लिए सब से नजदीकी हवाई अड्डा है। यहाँ से भारत के कई शहर जैसे दिल्ली, मुंबई, श्रीनगर के लिए उड़ानों के सेवा उपलब्ध है। भुंटुर से केलांग जाने के लिए हवाई अड्डे के बाहर टैक्सियाँ उपलब्ध है।

ट्रेन द्वारा

जोगिन्दर नगर रेलवे स्टेशन केलांग के लिए सब से नज़दीकी रेलवे स्टेशन है जो केवल 280 कि.मी दूर है। यहाँ पर भारत के प्रमुख शहर जैसे दिल्ली, मुंबई के लिए ट्रैनों की आवा- जाही लगी रहती है। यहाँ से यात्री किसी भी बस द्वारा केलांग जा सकते हैं।

सड़क मार्ग द्वारा

मनाली से केलांग के लिए कई निजी और सरकारी बसें की सेवा उपलब्ध है।मनाली केलांग से केवल 115 कि.मी दूर है इस लिए यहाँ से कई बसें निर्धारित समय पर चलती है।

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