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यदि आपको मंदिरों और आर्किटेक्चर से है प्रेम, तो अवश्य जाएं खंडवा

By Syedbelal

भारत के सबसे प्रमुख राज्यों में शुमार मध्य प्रदेश को भारत का हृदय कहा जाता है। साथ ही ये राज्य देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य भी है। इस राज्य का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और यहाँ के लोग इसे भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से एक बनाते हैं। चूंकि मध्य प्रदेश पर कई राजवंश के राजाओं ने शासन किया अतः आप यहां के चप्पे चप्पे में बेहतरीन वास्तुकला के नमूने देश सकते हैं।

ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश ने मौर्य, राष्ट्रकूट और गुप्त वंश से लेकर बुन्देल, होल्कर, मुग़ल और सिंधिया जैसे लगभग चौदह राजवंशों का उत्थान और पतन देखा है। यदि आप मध्य प्रदसश में हैं तो आप यहां के एक बेहद खूबसूरत शहर खंडवा की सैर करना बिलकुल न भूलें। मध्य प्रदेश के पूर्वी निमाड जिले में स्थित खंडवा, एक खूबसूरत शहर है। इस प्राचीन शहर में मंदिरों और तीर्थस्थानों के अतिरिक्त कई प्राचीन कुंड भी हैं।

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खंडवा में, कई जैन और हिंदू देवताओं के मंदिर हैं। ज्ञात हो कि 12 वीं सदी में जैन श्रद्धालुओं की संख्या बढी और खंडवा जैन धर्म का केंद्र बन गया। समय के साथ-साथ खंडवा शहर में कई बदलाव हुए। ब्रिटिश शासनकाल दौरान, खंडवा निमाड क्षेत्र का मुख्य वाणिज्यिक केंद्र माना जाता था। विशाल बुनियादी ढाचों के अलावा, यह शहर अद्भुत गायक किशोर कुमार का जन्म स्थान भी है। तो आइये जानें खंडवा की अपनी यात्रा पर क्या क्या अवश्य देखना चाहिए आपको।

असीरगढ किला

असीरगढ किला या असीगढ किले को अहीर राजवंश के राजा आसा अहीर ने बनाया था। पहले इस किले को आसा अहीर गढ कहा जाता था, लेकिन समय के साथ इस किला का नाम छोटा कर दिया गया, और आज अपने मौजूदा नाम से जाना जाता है। स्थानीय किंवदंतियों अनुसार, यह माना जाता है कि इस किले को बल से नहीं जीता जा सकता।

इतिहास गवाह है कि जब महान शहंशाह अकबर इस किले को अपने अधीन करने आए, तो वे इस पर आक्रमण करने में विफल रहे, इसका मुख्य कारण किले की सुरक्षा और इसकी निर्माणशैली है। यह किला सतपुडा पर्वत श्रेणी में स्थित है, और खंडवा से केवल 69 कि.मी दूर है।

घंटाघर

खंडवा शहर का घंटाघर एक प्रमुख भूमि-चिह्न है। इस घंटाघर को मुल्तान का क्लॉक टॉवर भी कहा जाता है। इसका निर्माण 1884 में अग्रेंजों ने भारत में अपने शासनकाल दौरान किया। 1883 के नगरपालिका अधिनियम अनुसार, इस इमारत का मुख्य उद्देश्य एक कार्यालय के रुप में काम करना था। इस टॉवर का निर्माणकार्य 12 फरवरी 1884 में शुरु किया गया, और इसे पूरा करने में कुल 4 साल लग गए।

वास्तव में, इस घंटाघर को मुल्तान की घेराबंदी में नष्ट हुई अहमद खान सदोज़ै की हवेली के अवशेष पर बनाया गया है। इस क्लॉक टॉवर को पहले नार्थब्रूक टॉवर कहते थे जो (1872-1876) उस समय के भारत के वाइसराय का नाम था।

दादाजी दरबार

दादाजी दरबार, खंडवा के दक्षिणि पश्चिमी दिशा में स्थित है। इसे बहुत पवित्र और प्रार्थना का स्थान माना जाता है। यह महान संत स्वामी केशवानांदजी महाराज और स्वामी हरीहरानांदजी महाराज की पावन समाधि-स्तंभ है। जिन्हें क्रमानुसार "बडे दादाजी" और "छोटे दादाजी" कहकर संबोधित किया जाता है। वर्ष 1930 में, यह समाधि-स्तंभ पूजनीय अवधूत संत की स्मृति में रखा गया। बडे दादाजी एक जगह से दूसरी जगह जाते और धुनी कही जाने वाली पवित्र अग्नि के सामने बैठकर बातें करते।

इंदिरा सागर बांध

एमपी के खंडवा में क्या देख सकते हैं आप

इंदिरा सागर बांध एशिया की सबसे प्रतिष्ठित जल विद्युत परियोजना है। इस बहुउद्देशीय बांध को नर्मदा नदी के ऊपर बनाया गया है, जो खंडवा के नर्मदानगर में बहती है। इस बांध की नींव का पत्थर 23 अक्टू्बर 1984 को पूव प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने रखा था। इस बांध की उदारता इसे एक पर्यटक स्थल बनाते हैं। इंदिरा सागर बांध को गोसिखुर्द परियोजना भी कहा जाता है और इसका निर्माण भंडारा, नागपुर और चंद्पर जिलों के आस पास के गाँवों को पानी प्रदान करने के एक मात्र उद्देश्य से किया गया।

गौरी कुंज

गौरी कुंज, लोकप्रिय प्लेबैक गायक किशोर कुमार गांगुली के सम्मान में बनाई गई एक स्मारक है। यह स्थान इस महान गायक का जन्म स्थान है जिसके कारण किशोर कुमार गंगोपाध्याय और खंडवा के बीच एक खास रिश्ता है। इस इमारत की नींव का पत्थर स्वर्गीय गायक के बडे भाई, अभिनेता अशोक कुमार ने रखा । भले ही, यह स्मारक किशोर कुमार को समर्पित है, पर प्रेक्षागृह का नाम इनकी माता गौरी देवी और पिता कुंजीलाल गंगोपाध्याय के नाम पर रखा गया है।

कैसे जाएं खंडवा

रोड द्वारा

आप चाहें तो रोड मार्ग द्वारा बसों और टैक्सियों जैसे सार्वजनिक परिवहन से खंडवा पहुंच सकते हैं। निकटवर्ती स्थानों और मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों से खंडवा के लिए नियमित बसों की सेवा उपलब्ध है। सडक मार्ग द्वारा इंदौर से खंडवा पहुंचना एक बेहतर विकल्प होगा। इंदौर से खंडवा की यात्रा केवल 3 घंटों की है।

ट्रेन द्वारा

खंडवा मुख्य ट्रेन जंक्शन पर स्थित है। खंडवा रेलवे स्टेशन, मध्य प्रदेश के दो प्रमुख शहर भोपाल और इंदौर से दैनिक रेलों द्वारा जुडा है। इस स्टेशन से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, कोचीन, बेंगलुरु, हैदराबाद, जम्मू, पटना जैसे भारत के कई शहरों के लिए ट्रेनों की सेवा उपलब्ध है।

फ्लाइट द्वारा

वैसे तो खंडवा शहर के नाग्चुन रोड पर एक हवाई पट्टी स्थित है, पर इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल केवल कभी-कभी विमानों को उतारने के लिए किया जाता है। यहां कोई उडाने नहीं आती। इंदौर में स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा खंडवा के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। इंदौर और खंडवा के बीच की दूरी केवल 110 कि.मी की है।

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