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खीर भवानी मंदिर: विनाश को दर्शता है मंदिर के झरने का बदलता हुआ काला पानी

यहां दुर्गा मां केवल पसंद करती हैं खीर

By Staff

आज भारत अपने मंदिरों मस्जिदों और मठों की बहुतायत के कारण रिलिजियस टूरिज्म का हब है। प्रायः ये देखा गया है कि आज भारत अपने मंदिरों के कारण देश के अलावा विदेशों के पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। भारत के प्रमुख धार्मिक शहरों जैसे वाराणसी, उज्जैन, द्वारका, इलाहाबाद, हरिद्वार, केदारनाथ, जम्मू, रामेश्वरम,मदुरई और कन्याकुमारी में आपको विदेशी पर्यटकों की एक अच्छी भीड़ देखने को मिल जायगी।

अगर हम ये पता करें कि आखिर ये विदेशी पर्यटक भारत क्यों आ रहे हैं तो मिलता है कि विदेशियों का यहां आने का सबसे बड़ा कारण यहां की विविधता और यहां की संस्कृति के अलावा योग का बढ़ता प्रभाव है। आज भारत में कई प्राचीन और प्रमुख मंदिर हैं जो अपने में ऐसे कई रहस्य लिए हुए हैं जो अपने आप में ही अद्भुत हैं और हर व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उन्हें जानना चाहता है। ऐसे ही रहस्यमयी मंदिरों पर बात करते हुए आज हम आपको बताएंगे कश्मीर के खीर भवानी मंदिर के बारे में।

खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित है। ये मंदिर मां खीर भवानी को समर्पित है। मां दुर्गा को समर्पित इस मंदिर का निर्माण एक बहती हुई धारा पर किया गया है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं, जो इस जगह की सुंदरता पर चार चांद लगाते हुए नज़र आते हैं। ये मंदिर, कश्मीर के हिन्दू समुदाय की आस्था को बखूबी दर्शाता है। महाराग्य देवी, रग्न्या देवी, रजनी देवी, रग्न्या भगवती इस मंदिर के अन्य प्रचलित नाम है। इस मंदिर का निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह द्वारा करवाया गया जिसे बाद में महाराजा हरी सिंह द्वारा पूरा किया गया।

इस मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि यहां एक षट्कोणीय झरना है जिसे यहां के मूल निवासी देवी का प्रतीत मानते हैं। इस मंदिर से जुडी एक प्रमुख किवदंती ये है कि सतयुग में भगवान श्री राम ने अपने निर्वासन के समय इस मंदिर का इस्तेमाल पूजा के स्थान के रूप में किया था। निर्वासन की अवधि समाप्त होने के बाद भगवान हनुमान को ये एक दिन अचानक ये आदेश मिला कि वो देवी की मूर्ति को स्थापित करें। हनुमान ने प्राप्त आदेश का पालन किया और देवी की मूर्ति को इस स्थान पर स्थापित किया, तब से लेके आज तक ये मूर्ति इसी स्थान पर है।

पढ़ें - करणी माता मंदिर जहां होती है चूहों की पूजा

जैसा कि इस मंदिर के नाम से ही स्पष्ट है यहां "खीर" का एक विशेष महत्त्व है और इसका इस्तेमाल यहां प्रमुख प्रसाद के रूप में किया जाता है। खीर भवानी मंदिर के सन्दर्भ में एक दिलचस्प बात ये है कि यहां के स्थानीय लोगों में ऐसी मान्यता है कि अगर यहां मौजूद झरने के पानी का रंग बदल कर सफ़ेद से काला हो जाये तो पूरे क्षेत्र में अप्रत्याशित विपत्ति आती है। "

आपको बताते चलें कि यहां मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी के कुंड का पानी बदला जाता है। ज्येष्ठ अष्टम और शुक्ल पक्ष अष्टमी इस मंदिर में मनाये जाने वाले कुछ प्रमुख त्यौहार हैं। तो अब यदि आप कश्मीर जाने का प्लान कर रहे हैं तो एक बार इस मंदिर का दर्शन करने अवश्य जाएं।

देखें खीर भवानी मंदिर की कुछ बेहद खूबसूरत तस्वीरें।

 मंदिर का दृश्य

मंदिर का दृश्य

चिनार के पेड़ों के बीच बसा ये मंदिर बेहद खूबसूरत है साथ ही यहाँ का वातावरण भी बहुत ही शांत है।

कुंड में पड़े फूल

कुंड में पड़े फूल

यहां आने वाले पर्यटक यहां के कुंड में मौजूद फूलों को देख सकते हैं। मंदिर का पानी में स्थित होने के कारण आपको अपने फूल यहीँ डालने होंगे।

मंदिर का दृश्य

मंदिर का दृश्य

यहां प्रसाद के रूप में भक्तों को खीर दी जाती है जो यहां का दूसरा प्रमुख आकर्षण हैं। ऐसा आपको भारत के किसी अन्य मंदीर में देखने को नहीं मिलेगा।

मंदिर का दृश्य

मंदिर का दृश्य

यहां के स्थानीय लोगों में ऐसी मान्यता है कि अगर यहां मौजूद झरने के पानी का रंग बदल कर सफ़ेद से काला हो जाये तो पूरे क्षेत्र में अप्रत्याशित विपत्ति आती है।

मंदिर का दृश्य

मंदिर का दृश्य

इस मंदिर से जुडी एक प्रमुख किवदंती ये है कि सतयुग में भगवान श्री राम ने अपने निर्वासन के समय इस मंदिर का इस्तेमाल पूजा के स्थान के रूप में किया था।

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