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कश्मीर से लेके कन्याकुमारी तक जानें कहां कहां है 'मां दुर्गा' के अलग अलग मंदिर

Written By: Staff

भारत हमेशा से ही अपनी सुंदरता और सांस्कृतिक भव्यता के कारण दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है। कभी यहां आने वाले यहां की प्राकृतिक सुंदरता में खो गए तो कभी कोई ज्ञान और आध्यात्म की तलाश में यहां आया और फिर यहीं का हो करके रह गया। आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाइये वहां भारत के लोगों, भारत की संस्कृति, भारत के भोजन के अलावा अगर कोई चीज लोगों को आकर्षित करती है तो वो है हम भारतियों की देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा और अटूट आस्था।

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ये आस्था ही है जिसके कारण आजभी विदेश में भारत को मंदिरों के देश के नाम से जाना जाता है। भारत में बेशुमार मंदिर हैं और इनमें कई मंदिर ऐसे भी हैं जहां की आराध्या देवी मां दुर्गा हैं या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इन मंदिरों में मुख्य रूप से देवी दुर्गा को ही पूजा जाता है।

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कई बातें देवी दुर्गा के इन मंदिरों को ख़ास बनाती हैं जैसे मां दुर्गा के अलग अलग रूप, मां को पूजने का तरीका, मंदिरों की बनावट, मंदिरों की वास्तुकला।
आगे तस्वीरों में देखिये भारत भर में फैले मां दुर्गा के अलग अलग मंदिर और उनसे जुडी चंद रोचक बातें।

 ज्वालामुखी मंदिर, कांगड़ा

ज्वालामुखी मंदिर, कांगड़ा

ज्वालामुखी मंदिरको ज्वालाजी के रूप में भी जाना जाता है, जो कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किमी की दूरी पर स्थित है। ये मंदिर हिन्दू देवी ज्वालामुखी को समर्पित है। जिनके मुख से अग्नि का प्रवाह होता है। इस जगह का एक अन्य आकर्षण ताम्बे का पाइप भी है जिसमें से प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है।

इस मंदिर में अलग अग्नि की अलग अलग 6 लपटें हैं जो अलग अलग देवियों को समर्पित हैं जैसे महाकाली उनपूरना, चंडी, हिंगलाज, बिंध्य बासनी , महालक्ष्मी सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये मंदिर सती के कारण बना था बताया जाता है की देवी सती की जीभ यहाँ गिरी थी।

 वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू

वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू

भारत में हिन्‍दूओं का पवित्र तीर्थस्‍थल वैष्णो देवी मंदिर है जो त्रिकुटा हिल्‍स में कटरा नामक जगह पर 1700 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के पिंड एक गुफा में स्‍थापित है, गुफा की लंबाई 30 मी. और ऊंचाई 1.5 मी. है। लोकप्रिय कथाओं के अनुसार, देवी वैष्‍णों इस गुफा में छिपी और एक राक्षस का वध कर दिया। मंदिर का मुख्‍य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है। इस मंदिर की देखरेख की जिम्‍मेदारी वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की है।

चामुंडा देवी मंदिर, पालमपुर

चामुंडा देवी मंदिर, पालमपुर

चामुंडा देवी मंदिर, पालमपुर के पश्चिम और धर्मशाला से 15 किमी की दूरी पर 10 किमी की दूरी पर स्थित है, ये मंदिर कोई 700 साल पुराना है जो घने जंगलों और बनेर नदी के पास स्थित है। इस विशाल मंदिर का विशेष धार्मिक महत्त्व है जो 51 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक है। ये मंदिर हिन्दू देवी चामुंडा जिनका दूसरा नाम देवी दुर्गा भी है को समर्पित है। इस मंदिर का वातावरण बड़ा ही शांत है जिस कारण यहां आने वाला व्यक्ति असीम शांति की अनुभूती करता है।

कालका देवी, दिल्ली

कालका देवी, दिल्ली

प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर, भारत में सबसे अधिक भ्रमण किये जाने वाले प्राचीन एवं श्रद्धेय मंदिरों में से एक है। यह दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास कालकाजी में स्थित है। यह मंदिर माँ दुर्गा की एक अवतार, देवी काली को समर्पित है।यह मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है।

मनोकामना का अर्थ है कि यहाँ भक्तों की सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस मंदिर का गर्भगृह 12 तरफ़ा है जिसमें प्रत्येक पक्ष पर संगमरमर से सुसज्जित एक प्रशस्त गलियारा है। यहाँ गर्भगृह को चारों तरफ से घेरे हुए एक बरामदा है जिसमें 36 धनुषाकार मार्ग हैं। हालांकि मंदिर में रोज़ पूजा होती है पर नवरात्री के त्यौहार के दौरान मंदिर में उत्सव का माहौल होता है।

मनसा देवी, हरिद्वार

मनसा देवी, हरिद्वार

मनसा देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो हरिद्वार शहर से लगभग 3 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर हिंदू देवी मनसा देवी को समर्पित है। इस मंदिर में मूर्ती की पांच भुजाएं एवं तीन मुहं है एवं दूसरी अन्य मूर्ती की आठ भुजाएं हैं। 52 शक्तिपीठों(हिंदू देवी सती या शक्ति की पूजा किये जाने वाले स्थल) में से एक यह मंदिर सिद्ध पीठ त्रिभुज के चरम पर स्थित है। यह त्रिभुज माया देवी, चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिरों से मिलकर बना है।

 दुर्गा मंदिर, वाराणसी

दुर्गा मंदिर, वाराणसी

दुर्गा मंदिर, माता दुर्गा को समर्पित है। यह मंदिर वाराणसी के रामनगर में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक बंगाली महारानी ने 18 वीं सदी में करवाया था। वर्तमान में यह मंदिर बनारस के शाही परिवार के नियंत्रण में आता है।

यह मंदिर, भारतीय वास्‍तुकला की उत्‍तर भारतीय शैली की नागारा शैली में बनी हुई है। इस मंदिर में एक वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है जो दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का शिखर काफी ऊंचा है जो चार कोनों में विभाजित है और हर कोने में एक टावर और बहु- टावर लगे हुए हैं।

देवी पटन मंदिर , गोंडा

देवी पटन मंदिर , गोंडा

उत्तर प्रदेश के गोंडा से 70 किलोमीटर दूर इस स्थान पर देवी सती का दाहिना कंधा गिरा था। यहां देवी के मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य द्वारा किया गया था जिसे बाद में राजा सुहलदेव द्वारा पूरा कराया गया।

इस मंदिर की एक दिलचस्प बात ये है कि एक प्रमुख आयोजन के दौरान नेपाल के पीर रतन नाथ की मूर्ति को यहां लाया जाता है फिर इसके बाद ही यहां दोनों मूर्तियों की पूजा होती है ।

 चाइनीज काली मंदिर, कोलकाता

चाइनीज काली मंदिर, कोलकाता

कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है। इस मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। यहाँ आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई।

एक बात और है जो इस मंदिर को खास बनाती है वो ये है कि इस मंदिर के मुख्य पुजारी एक बंगाली ब्राह्मण हैं । यहां आने वाले लोगों को प्रशाद में न्यूडल, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है।

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी

प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर घूमे बिना गुवाहाटी की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी। हिंदू धर्म के अनुसार यह 51 शक्तिपीठ में से एक है और इसकी गितनी सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से होती है। गुवाहाटी से 7 किमी दूर नीलाचल की पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर के साथ-साथ 10 महाविद्या को समर्पित 10 अलग-अलग मंदिर हैं।

त्रिपुरासंदरी, मतांगी और कमला की प्रतिमा जहां मुख्य मंदिर में स्थापित है, वहीं 7 अन्य रूपों की प्रतिमा अलग-अलग मंदिरों में स्थापित की गई है, जो मुख्य मंदिर को घेरे हुए है।

 अधर देवी मंदिर , माउंट आबू

अधर देवी मंदिर , माउंट आबू

माउंट आबू में स्थित ये मंदिर एक गुफा के भीतर है। इस मंदिर को अर्बुदा देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है । इस मंदिर से जुडी एक दिलचस्प कहानी ये है कि जब इस मंदिर का निर्माण हो रहा था तब देवी की मूर्ति बीच हवा में लटके पाई गयी। यहां आने वाले भक्तों को पहले 365 सीढ़ियां चादनी होती हैं फिर गुफा में अंदर जाने के लिए रेंगना होता है।

 करनी माता मंदिर, देशनोक

करनी माता मंदिर, देशनोक

करनी माता मंदिर जिसे मूषक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है देशनोक का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है । देवी करनी माता इस मंदिर की प्रमुख देवी हैं जिनको ये मंदिर समर्पित किया गया है इन्हें मां दुर्गा का अवतार भी माना जाता है।

किंवदंतियों के अनुसार, राव बीकाजी, जो बीकानेर के निर्माता है को देवी करनी माता से आशीर्वाद प्राप्त था, तब से देवी को बीकानेर राजवंश के संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। बताया जाता है की राजा गंगा सिंह द्वारा 20 वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण किया गया था।

ये मंदिर अपने चूहों के लिए भी जाना जाता है जिन्हें कबस कहा जाता है । ऐसा माना जाता है की इन चूहों में देवी के बच्चों की आत्मा होती हैं जिन्हें चरण कहा जाता है । इन चूहों के प्रति यहाँ के लोगों में गहरी आस्था है । यहाँ के लोगों की ऐसी धारणा है की यदि कोई श्रद्धालु यहाँ सफ़ेद चूहा देख ले तो वो बहुत भाग्यशाली होता है ।

अम्बाजी मंदिर, गुजरात

अम्बाजी मंदिर, गुजरात

अम्बाजी प्राचीन भारत का सबसे पुराना और पवित्र तीर्थ स्थान है। ये शक्ति की देवी सती को समर्पित बावन शक्तिपीठों में से एक है। गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले की दांता तालुका में स्थित गब्बर पहाड़ियों के ऊपर अम्बाजी माता स्थापित हैं।

अम्बाजी में दुनियाभर से पर्यटक आकर्षित होकर आते हैं, खासतौर से भाद्रपद पूर्णिमा और दिवाली पर। यह स्थान अरावली पहाड़ियों के घने जंगलों से घिरा है। यह स्थान पर्यटकों के लिये प्रकृतिक सुन्दरता और आध्यात्म का संगम है।

 दुर्गा परमेश्वरी मंदिर

दुर्गा परमेश्वरी मंदिर

कतील दक्षिण कन्नड़ ज़िले का एक मठ शहर है, जो शक्ति पूजा का एक महत्वपूर्ण पीठ और पौराणिक शिक्षा में ओतप्रोत है। यहाँ नंदीनी नदी के किनारे दुर्गा परमेश्वरी मंदिर है जो पूरे भारत से कई श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

प्राचीन काल में, एक असुर अरुनासुर की गतिविधियों से यह क्षेत्र प्रलयंकारी सूखे में डूब गया था। साधू जबाली, जो गहरे ध्यान में थे ने अपनी दिमाग की आँखों से लोगों की पीड़ा को देखा। उन्होंने उनपर दया कर उस परिस्थिति से उन्हें निकालने की सोची।

उन्होंने यज्ञ करने की सोची और इसके लिए वह ईश्वरीय धेनु, कामधेनु को नीचे लाना चाहते थे। इन्हीं महान साधू के द्वारा दिए गए श्राप के बाद मंदिर का निर्माण हुआ।

कनक दुर्गा मंदिर

कनक दुर्गा मंदिर

देवी कनक दुर्गा, शक्ति और परोपकार की देवी है जो इस मंदिर की मुख्य देवी हैं। देवी का मंदिर विजयवाड़ा जिले में कृष्णा नदी के किनारे इंद्रकिलादरी पहाड़ियों में स्थित है। यहां के स्थानीय निवासियों में ये मान्यता है कि देवी अत्यंत शक्तिशाली हैं।

यहां कि इंद्रकिलादरी की पहाड़ियों का इसलिए भी विशेष महत्त्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ये स्थान देवी और उनके पति मल्लेश्वर का निवास है जिस कारण यहां जाकर व्यक्ति को परम सुख की अनुभूति होती है। इस मंदिर की एक ख़ास बात ये भी है कि यहां देवी अपने पति के दाहिने हिस्से में विराजमान हैं जो कि धर्म की दृष्टि से गलत है।

देवी भगवती मंदिर, तमिलनाडु

देवी भगवती मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में स्थित देवी भगवती मंदिर एक बेहद खूबसूरत मंदिर है। ये मंदिर तीन समुन्द्रों के मुहाने पर स्थित है। बताया जाता है कि ये मंदिर दो हजार साल पुराना मंदिर है।

इस स्थान से सम्बंधित एक कहानी ये है कि भगवान शिव द्वारा भगवती का निर्माण तब किया गया जब एक असुर बाणासुर ने तीनों लोकों को अपने आतंक से आतंकित कर रखा था।

भद्रकाली मंदिर, तारा तारिणी मंदिर, दक्षिणेश्वर काली मंदिर और छतरपुर मंदिर यहां के अन्य मंदिर हैं जो देवी दुर्गा के अलग अलग रूपों को समर्पित हैं।

नैना देवी मंदिर, नैनीताल

नैना देवी मंदिर, नैनीताल

नैनी देवी मंदिर एक ‘शक्ति पीठ' है जो नैनी झील के उत्तरी छोर पर स्थित है। यह मंदिर हिंदू देवी, ‘नैना देवी' को समर्पित है। नैना देवी की प्रतिमा के साथ भगवान श्री गणेश और काली माता की मूर्तियाँ भी इस मंदिर में प्रतिष्ठापित हैं। पीपल का एक विशाल वृक्ष मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थित है।

खीर भवानी मंदिर, कश्मीर

खीर भवानी मंदिर, कश्मीर

खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं, जो यहां की सुंदरता को बढाते हैं। इस मंदिर का नाम इस प्रकार पड़ा कि यहां प्रसाद के रूप में भक्तों द्वारा केवल एक भारतीय मिठाई खीर और दूध ही चढ़ाया जाता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि खीर, जो सामान्य रूप से सफेद रंग की होती है उसका रंग काला हो जाता है जो अप्रत्याशित विपत्ति का संकेत होता है। मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त यहां एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी पानी का रंग बदलती है।

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