मिर्जापुर... नाम सुनते ही #MIRZAPUR का ख्याल आया न, जिसमें कालीन भैया, मुन्ना भैया और गुड्डु भैया की स्टोरी दिखाई गई है। हो भी क्यूं न.. दर्शकों के बीच इसने इतनी पॉपुलरिटी जो पाई थी। लेकिन क्या आपको वास्तविक वाले मिर्जापुर के बारे में पता है। आखिर क्या है इस शहर का इतिहास और क्या है इसकी कहानी? कब स्थापित हुआ ये शहर और किसने कब तक राज किया?
इस लेख के माध्यम से आज हम मिर्जापुर के इन सभी सवालों से पर्दा उठाएंगे, जिसके लिए आप भी शायद काफी समय बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन इसके पहले थोड़ा नजर मिर्जापुर के विंघ्य पर्वतमाला पर भी डाल लेते हैं, जिसका जिक्र पुराणों और वेदों में भी मिलता है। इस शहर में देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माता विंघ्याचल का भी निवास है। विंघ्याचल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा इस शहर का इतिहास भी काफी रोचक है। तो आइए नजर डालते हैं इस शहर के इतिहास पर...

कब हुई मिर्जापुर की स्थापना?
उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध जिलों में से एक मिर्जापुर की स्थापना अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा 17 वीं शाताब्दी में की गई थी। कहा जाता है कि 1735 ईस्वी में जब ईस्ट इण्डिया कम्पनी का व्यापार भारत में (कलकत्ता से लेकर दिल्ली तक) तेजी से फैलने लगा था, तब उन्हें इस रास्ते के बीच में एक व्यापार केंद्र बनाने की आवश्यकता मालूम हुई तो अंग्रेजी अफसरों ने गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों का अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें गंगा के किनारे पर स्थित विंध्याचल पर्वत का यह क्षेत्र भा गया और फिर लार्ड मर्क्यूरियस वेलेस्ले नाम के एक ब्रिटिश अधिकारी ने इस शहर की स्थापना की और इसका नाम मिर्जापुर (मिर्जा का शाब्दिक अर्थ - राजाओं का क्षेत्र) रखा। इस शहर को मीरजापुर भी कहा जाता है। भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा बसाए हुए कई शहर है, माना जाता है कि मिर्जापुर उनमें से पहले स्थान पर है।

क्या है मिर्जापुर का इतिहास?
अधिकारिक रूप से मिर्जापुर की स्थापना 1735 ईस्वी में की गई थी, लेकिन प्रमाण के रूप में 5000 हजार साल से भी अधिक पुराने कई साक्ष्य मिले हैं। इसमें पुरापाषाण काल (Paleolithic Era) की संस्कृति के प्रमाण, प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Era) में बनी गुफाओं की कलाकृतियां, बेलन नदी घाटी के चित्रित चट्टान इत्यादि शामिल है। इसके अलावा यहां कई ऐसे भी साक्ष्य मिले हैं, जो इसे 17000 ईसा पूर्व से अधिक पुराने बताए जाते हैं। प्राचीन समय में ये पूरा शहर जंगली इलाकों से भरा था, उस समय के राज्यों (बनारस, सक्तेशगढ़, विजयगढ़, नैनागढ़ (चुनार), नौगढ़, कांतित और रीवा) के राजा व शिकारी इसका इस्तेमाल शिकार करने के लिए किया करते थे।

बाद में धीरे-धीरे मिर्जापुर का विकास हुआ और ये कपास और रेशम का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बन गया। वर्तमान समय में यह कालीन व पीपल के व्यापार के लिए जाना जाता है। यहां का नगर निगम भवन भी ब्रिटिश काल का ही बना हुआ है। कहा जाता है कि इस शहर में परमार वंश और गहरवार वंश का शासन रहा है, जिनसे सम्बन्धित यहां कुछ ऐतिहासिक इमारतें व किले देखने को मिल जाएंगे।
भारत का मानक समय मिर्जापुर से ही लिया गया है
पर्यटन की दृष्टि से भी मिर्जापुर उत्तर प्रदेश का काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। यहां की नैसर्गिक सुंदरता के साथ-साथ कई धार्मिक स्थल भी है, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। सोनभद्र कभी मिर्जापुर का ही हिस्सा था, तब मिर्जापुर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला हुआ करता था। यहां धार्मिक, ऐतिहासिक व प्राकृतिक खूबसूरती की आपको भरमार देखने को मिलेगी। मिर्जापुर (अमरावती चौराहा) से ही भारत का मानक समय भी निर्धारित होता है। मिर्जापुर अपने गुलाबी पत्थरों के लिए भी काफी विख्यात है। इन्हीं पत्थरों से मौर्य वंश के सम्राट अशोक ने सारनाथ में बौद्ध स्तुप एवं अशोक स्तम्भ बनवाया था।

मिर्जापुर का लेकर पौराणिक मान्यता
मिर्जापुर में विंघ्य पर्वत पर स्थित विंघ्याचल मंदिर एकमात्र ऐसा शक्तिपीठ है, जहां देवी के पूर्ण स्वरूप की पूजा की जाती है। कहा ये भी जाता है कि विंघ्याचल माता की पहली बार पूजा मनु ने की थी, जिसके बाद माता ने प्रसन्न होकर वंश वृद्धि का वरदान दिया था। शिवपुराण और मारकण्डेय पुराण में भी इस शहर (विंघ्याचल के रूप में) का जिक्र है।

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