सर्दियों में आपने अक्सर दो तरह के लोगों को देखा होगा...। पहले वो जो रजाई और कंबल के नीचे ही अपनी दुनिया बना लेते हैं। दूसरे वो लोग जो सर्दियों में अपना बैग पैक करते हैं और निकल पड़ते हैं बर्फबारी का लुत्फ उठाने। लेकिन आज हम आपको उन तीसरी तरह के लोगों के बारे में बता रहे हैं जो सर्दियों का इंतजार ही इसलिए करते हैं ताकि लद्दाख में जम चुकी नदी पर चादर ट्रेक का प्लान बना सकें।

चादर ट्रेक- जो भारत के सबसे अधिक रोमांचक ट्रेकिंग में तो एक है लेकिन यह उतनी ही कठिन भी है। इस ट्रेक को पूरा करना एक माइंड गेम की तरह है। दिमाग ज़रा सा भी कमजोर पड़ा और आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। चादर ट्रेक के लिए व्यक्ति को सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी खुद को मजबूत बनाना पड़ता है।
लद्दाख की जंस्कर घाटी में जंस्कर नदी पर होने वाला यह ट्रेक सिर्फ लद्दाख प्रेमियों को ही नहीं बल्कि एडवेंचर के उन शौकिनों को भी आकर्षित करता है जो जोखिम उठाने में बहुत मज़ा आता है। सर्दियों के मौसम में जम चुकी जंस्कर नदी की बर्फीली चादर से ही इस ट्रेक को अपना नाम 'चादर ट्रेक' मिला है। जम चुकी बर्फीली नदी पर चलते हुए इस ट्रेक को पूरा करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है उतना ही एडवेंचरस भी होता है।
कब से कब तक होती है यह ट्रेकिंग

जैसा कि हमने पहले भी कहा है चादर ट्रेकिंग जम चुकी जंस्कर नदी पर की जाती है। इसलिए यह ट्रेकिंग सिर्फ सर्दियों के मौसम में ही होती है। दिसंबर से लेकर फरवरी तक का समय इस ट्रेकिंग के लिए आदर्श होता है जब सर्दियां पूरे जोरों पर होती हैं और तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे पहुंच चुका होता है।
शानदार दिखता है नजारा

चादर ट्रेकिंग सिर्फ एक शानदार अनुभव ही नहीं बल्कि इतनी खुबसूरत बर्फिली वादियों को दिखाता है, जैसा शायद हमने सिर्फ फिल्मों या तस्वीरों में ही देखा होगा। यह एक तरह नदी को पैदल चलकर पार करना ही तो होता है। हां, नदी जमकर ठोस बर्फ की बन चुकी होती है। फिल्मों में जैसे सर्दियों में हर तरफ बर्फ की मोटी चादर दिखाई जाती है, ठीक वैसे ही चादर ट्रेक में नदी और आसपास का जहां भी नजरे जाएं, वहां सिर्फ बर्फ ही बर्फ दिखाई देती है। यहां बैठना, सोना, खेलना सब कुछ मानो सिर्फ सफेद बर्फ से ही होता है।
आसान नहीं होती है यह ट्रेकिंग

लद्दाख जाना या वहां घूमना-फिरना आसान नहीं होता है। अधिक ऊंचाई पर होने की वजह से आम दिनों में ही यहां सांस की तकलीफ आदि परेशानियां होती रहती है। चादर ट्रेक भी इस तरह की परेशानियों से अछुता नहीं है। लेकिन इस ट्रेक को पूरा करने में सबसे मुश्किल बर्फिली जमी जंस्कर नदी पर पैदल चलना होगा। बर्फ पर चलना आसान बात नहीं होती है। कहीं पैर धंस जाते हैं तो कहीं बर्फ पर पैर बुरी तरह से फिसलते हैं।
सर्दियों के मौसम में जब तापमान शून्य से 30° नीचे (-30°) पहुंच जाता है, वहां पैदल चलने के लिए भी काफी ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़ती है। चादर ट्रेक को पूरा करने में कम से कम 9 दिनों का समय लगता है। जरा सोचिए, 9 दिनों तक इतने ठंडे तापमान में रहना, ठंड से बचने के लिए शरीर पर भारी-भरकम गर्म कपड़े और पीठ पर ट्रेकिंग का सामान लेकर बर्फ पर चलना...कितना कठिन होता होगा।
क्या होता है चादर ट्रेक का रूट

चादर ट्रेक की गिनती कठिनतम ट्रेक में होती है। इसका बेस कैंप लेह से करीब 60-70 किमी दूर तिलाद में होता है। इसलिए सबसे पहले आपको लेह पहुंचना होगा और वहां से बेस कैंप जाना पड़ेगा। तिलाद से ट्रेकिंग शुरू कर चिलिंग के माध्यम से चादर ट्रेक के डेस्टिनेशन पर पहुंचा जाता है। चिलिंग से आप जैसे-जैसे जंस्कर नदी के किनारे-किनारे आगे बढ़ते हैं, जंस्कर नदी जमने लगती है। लगभग 105 किमी लंबे इस ट्रेक को पूरा करने में लगभग 9-15 दिनों का समय लगता है।
कैसे करें चादर ट्रेक की तैयारी :-

लद्दाख का चादर ट्रेक ऐसी ट्रेकिंग है, जिसके लिए फिजीकल और मेंटल दोनों तरह की फिटनेस की जरूरत होती है। फिजीकल फिटनेस को बनाए रखने के लिए ट्रेक शुरू करने से कम से कम 2-3 महीने पहले से ही रोज 4-5 किमी नियमित रूप से जॉगिंग करने, शारीरिक व्यायाम या समकक्ष वर्कआउट करने की सलाह दी जाती है। अगर आपको नियमित रूप से गर्म पानी पीने की आदत है, तो ट्रेक से पहले कुछ समय से उसे छोड़ने की सलाह दी जाती है ताकि जंस्कर घाटी के मौसम के साथ आपका शरीर तालमेल बैठा सकें।
ट्रेक की शुरुआत के लिए जब आप लेह पहुंचे तो वहां पहुंचते ही घूमने ना निकल पड़े। बल्कि होटल में थोड़ा आराम करके वहां के वातावरण के साथ ढलने की कोशिश करें। लेह में होटल में हिटर का इस्तेमाल करने से बचे। ट्रेकिंग के दौरान पानी, सूप, चाय आदि तरल पदार्थों का सेवन करते रहे। इससे आपको हाईड्रेशन मिलेगी।
कैसे करें मानसिक तैयारी

सबसे पहले आपको खुद को मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाना होगा कि जंस्कर घाटी में किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति का आप सामना कर सकें। याद रखें, ट्रेकिंग के दौरान तापमान ही आपको सबसे अधिक परेशान करेगा। इसलिए ठंड लग रही है या अब ठंड बर्दास्त से बाहर हो रही है, जैसी सोच से खुद को दूर रखें। चादर ट्रेकिंग पूरी तरह से माइंड गेम की तरह है।
अगर आप ठंड से हार गये तो 9 दिन क्या 9 महीने में भी यह ट्रेक पूरा नहीं कर पाएंगे और उस रोमांच से खुद को दूर करते चले जाएंगे जो इस ट्रेकिंग के दौरान आप महसूस करने वाले होते हैं। अगर आपने अपने दिमाग और ठंड पर जीत हासिल कर ली तो स्वर्ग से अधिक सुन्दर नजारें आपका इंतजार कर रहे होते हैं।
कैसे करें पैकिंग

पहले आपको बताते हैं कि चादर ट्रेक पर जाते कौन से गर्म कपड़े पहन कर जाएं। ट्रेकिंग के समय खुद को मोटे या भारी कपड़ों से मत लाद लें, बल्कि गर्म कपड़ों की लेयरिंग पर अधिक ध्यान दें। थर्मल, फुल शर्ट या टी-शर्ट, उसके ऊपर ऊनी स्वेटर, ऊनी जैकेट और सबसे ऊपर विंड-चीटर पहने। विंड-चीटर ऐसा होना चाहिए जो हवा ही नहीं बल्कि वाटरप्रुफ भी हो। नीचे भी इसी प्रकार से थर्मल, वुलेन पैंट और वाटरप्रुफ ट्रेकिंग पैंट पहने।
अपने पैरों, हथेलियों, नाक-मुंह और सिर व कान को ढंकने में कोई लापरवाही ना बरते। क्योंकि कहा जाता है कि कान व सिर अच्छी तरह से ढक लेने से ठंड कम लगती है। पैरों में गम बूट्स जरूर पहने लेकिन इन बूट्स के नीचे बर्फ पर फिसलने से बचने के लिए आवश्यक सोल लगवा लें। ट्रेकिंग के लिए जाते समय हमेशा हेड टॉर्च और ट्रेकिंग स्टीक जरूरी होती है। ठंड को रोकने के लिए एक इंसूलेटेज पानी की बोतल रखें जो कसकर बंद होती हो।
अपने सभी अतिरिक्त कपड़ों, ग्लब्स या फिर टोपी को प्लास्टिक की थैली में रखकर ही बैग में रखे। आपका बैग वॉटरप्रुफ जरूर होना चाहिए। अगर जरूरी हो तो 2 स्लीपिंग बैग रखें। अगर एक को लाइनर बनाकर दूसरे स्लीपिंग बैग में सोना। बैग को रेन कवर से कवर कर लेना अच्छा होता है।
किन बातों का रखें खास ध्यान
- ट्रेकिंग के दौरान बीमार होने से खुद को बचाना है। क्योंकि आप ट्रेकिंग में खुद और दूसरों के लिए मुसीबत का कारण नहीं बनना चाहेंगे।
- गाईड की बातों को पत्थर की लकीर मानकर उन्हें मानें। क्योंकि आपसे कहीं बेहतर बर्फ और चादर ट्रेक के रूट को आपका गाईड पहचानता होगा।
- पॉजीटिव सोच के साथ आगे बढ़े। आप निश्चित रूप से ट्रेक को पूरा कर पाएंगे।
- रास्ते में खुद को हाईड्रेट रखें। पानी, सूप, चाय आदि लगातार पीते रहें।
- स्लिपिंग बैग में सोते समय गर्म कपड़े मत उतारें। गर्म कपड़ों में ही सोएं। इससे सोते समय वातावरण के साथ आपको एडजस्ट होने में मदद मिलेगी।
- जरूरी दवाईयां अपने पास जरूर रखें। लद्दाख में जम चुकी जंस्कर नदी के किनारे कोई दवाई की दुकान तो आपको मिलने से रही।



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