अगर आप लखनऊ में रहते हैं और बेंगलुरु घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहले यह जान लीजिये कि आपको वहां बहुत ज्यादा मज़ा नहीं आने वाला है। जी हॉं यह फैक्ट आपको केवल वहीं बता सकता है, जो इन दोनों शहरों में रहा हो। उनमें से एक मैं हूं। जी हॉं अपने अनुभव के आधार पर हम आपको बतायेंगे कि अगर आप बेंगलुरु घूमने जा रहे हैं, तो आपकी यह ट्रिप कैसे यादगार हो सकती है। हम यह भी बतायेंगे कि आपको अपनी ट्रिप को बर्बादी से बचाना है तो किन-किन चीजों से बचना है।

आगे बढ़ने से पहले हम आपको बता दें कि हम इस आर्टिकल में क्या-क्या कवर करने जा रहे हैं-
1. लखनऊ और बेंगलुरु में समानताएं
2. लखनऊ और बेंगलुरु में भिन्नताएं
3. किन मामलों में लखनऊ वालों को बेंगलुरु नहीं पसंद आयेगा?
4. बेंगलुरु नहीं पसंद आया तो अपनी ट्रिप को यादगार बनाने के लिए क्या करें?
5. मॉनसून में जाना ठीक रहेगा या नहीं?
6. ट्रेन से जायें या फ्लाइट से, दोनों में क्या फर्क?
ध्यान रहे इस आर्टिकल के बाद आप दोनों में से किसी भी शहर के लिए कोई धारणा मत बना लीजिएगा क्योंकि हर व्यक्ति की मानसिकता और विचार अलग-अलग होते हैं। खैर, हमारा उद्देश्य है कि आपकी बैंगलोर ट्रिप को बेहतरीन बनाया जाये, बस वो हम करने जा रहे हैं।
लखनऊ और बेंगलुरु में समानताएं
1. लखनऊ और बेंगलुरु अपने-अपने राज्यों की राजधानी हैं और दोनों जगह विधान भवन ऐतिहासिक इमारतों के रूप में आकर्षण का केंद्र हैं।
2. लखनऊ और बेंगलुरु दोनों जगह महात्मा गांधी मार्ग हैं और दोनों जगह एमजी रोड फैशनेबल कपड़ों, बेहतरीन रेस्त्रां के लिए जानी जाती हैं।
3. लखनऊ में जनेश्वर मिश्र पार्क तो बेंगलुरु में कब्बन पार्क अपने शहर की शान हैं।
4. लखनऊ में अवधि बिरयानी है तो बेंगलुरु में हैदराबादी, डिंडीगुल, अंबुर बिरयानी हर जगह मिलेंगी।
5. लखनऊ में राज भवन (गवर्नर हाउस) का प्रवेश द्वार और उसके बगल से गुज़रने वाली सड़क ठीक वैसी ही है, जैसे कि बेंगलुरु में राजभवन। मेन रोड पर बायीं ओर ठीक सामने राजभवन का गेट और उसके बगल से दाहिनी ओर जाती सड़क।
6. दोनों शहरों का एयरपोर्ट सिटी से बाहर है और दोनों शहरों में एचएएल के बड़े विंग हैं।
7. लखनऊ में इंदिरा गांधी प्लेनिटेयिरम है तो बेंगलुरु में जवाहरलाल नेहरू प्लेनिटेरियम।
8. लखनऊ से दुधवा नेश्नल पार्क 215 किमी है तो बेंगलुरु से बांदीपुर नेश्नल पार्क भी 215 किमी ही है।
9. दोनों शहरों में मेट्रो ट्रेन चलती है और दोनों में कंटोनमेंट एरिया हैं। यही नहीं दोनों में बॉटेनिकल गार्डन भी हैं।
10. फाइनली, बेंगलुरु हो या लखनऊ, आधा शहर साफ-सुथरा तो आधा गंदा जरूर रहता है।

लखनऊ और बेंगलुरु में भिन्नताएं
1. लखनऊ प्लेन एरिया में बसा हुआ है, जबकि बेंगलुरु पठार क्षेत्र है।
2. लखनऊ के किसी भी कोनों से निकलेंगे, आप आराम से 1 घंटे के भीतर एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे, लेकिन बेंगलुरु में आप कहीं से भी शुरू करें एयरपोर्ट पहुंचने में कम से कम 2 घंटे रख लीजिए। अगर ट्रैफिक जाम हुआ तो 3 घंटे तक लग जाते हैं।
3. गर्मी में लखनऊ का तापमान 45 तक, बारिश में मूसलाधार बारिश और जाड़े में तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, जबकि बेंगलुरु में केवल अप्रैल माह में गर्मी पड़ती है और तब तापमान 35 तक जाता है। अन्यथा यह शहर एयरकंडीशंड वेदर के लिए मशहूर है।
4. लखनऊ के हर तीसरे-चौथे घर में आपको एसी मिलेगा, जबकि बेंगलुरु में बड़े-बड़े अपार्टमेंट में भी आपको एक-दो एसी ही दिखेंगे।
6. लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से यहां का मुख्य बस अड्डा (आलमबाग) रेलवे स्टेशन से करीब 4 किमी दूर है, जबकि बेंगलुरु में स्टेशन के ठीक सामने।

किन मामलों में लखनऊ वालों को बेंगलुरु नहीं पसंद आयेगा?
दरअसल लखनऊ के ज्यादातर लोग नवाबों की तरह रहना पसंद करते हैं, कहीं घूमने जायें तो ज्यादा चलना न पड़े, आराम से भोजन मिल जाये और सब कुछ आराम का हो। सबसे बड़ा कारण यही है कि लखनऊ वाले जब बेंगलुरु की सड़कों पर पैदल घूमने निकलते हैं तो तुरंत ऑटो बुक करते हैं, क्योंकि पठार क्षेत्र में सड़कें उँची-नीची होती हैं। चढ़ाई पर थकना मंजूर नहीं होता।
जो लोग आलू-टिक्की चाट, पानी के बताशे, छोले भटूरे, नॉन वेज में शामी कबाब, चिकन मसाला के शौकीन होते हैं, वो बेंगलुरु आनके बाद इन सब चीजों को मिस करते हैं। क्योंकि जो स्वाद उन्हें लखनऊ में मिलता है वो बेंगलुरु में नहीं। इसलिए गुज़ारिश है कि कुछ दिन के लिए दक्षिण भारतीय व्यंजनों में स्वाद को खोजें, यकीन मानिये मजा आ जायेगा।
नाइट लाइफ का शौक रखने वाले लोगों को बेंगलुरु कतई पसंद नहीं आयेगा, क्योंकि यहां लखनऊ के निशातगंज, जागरण चौराहे, चौक, आदि जैसे इलाके नहीं हैं जो रात भर खुले रहें। सच तो यह है कि साढ़े नौ बजे से ही यहां दुकाने बंद होनी शुरू हो जाती हैं। और रेस्तरां के बंद होने का समय 10:30 बजे का होता है।
अगर आप एक हफ्ते का समय लेकर केवल बेंगलुरु घूमने के लिए आ रहे हैं तो आपको बता दें कि बेंगलुरु में कुछ मंदिरों के अलावा कुछ भी घूमने का नहीं है। यहां की प्रमुख जगहें जैसे इस्कॉन मंदिर, लाल बाग गार्डन, विश्वैवरैया संग्रहालय, प्लेनिटेरियम, टीपू पैलेस, बैंगलोर पैलेस, बैंगलोर फोर्ट आदि दो दिन में कवर हो सकते हैं। बता दें कि आप विधानसभा, हाईकोर्ट, टाउन हॉल की इमारतों को बाहर से ही देख सकते हैं।

बेंगलुरु नहीं पसंद आया तो अपनी ट्रिप को यादगार बनाने के लिए क्या करें?
अगर आप सात दिन के लिए बेंगलुरु आये हैं और दो दिन आपके बेंगलुरु देखने में निकल चुके हैं, तो अब आप आस-पास की जगहों पर जाकर अपनी ट्रिप को बेहतरीन बना सकते हैं।
1. एक पूरा दिन आप मैसूर-श्रीरंगपट्टनम की ट्रिप पर जा सकते हैं।
2. एक दिन में आप कोलार के कोटिलिंगेश्वर मंदिर जा कर आ सकते हैं।
3. एक दिन में आप ऑर्ट ऑफ लिविंग सेंटर और पिरैमिड वैली जाकर आ सकते हैं।
4. एक दिन में आप होगेनेक्कल फॉल्स देख कर आ सकते हैं।
5. दो दिन हैं तो आप वायनाड, ऊटी, येलागिरी, चिकमगलूर, या येरकॉड जाकर आ सकते हैं।
6. तीन दिन हैं तो आप रामेश्वरम-मदुरै-कन्याकुमारी का एक बेहतरी धार्मिक प्लान बना सकते हैं।
मॉनसून में जाना ठीक रहेगा या नहीं?
मॉनसून के समय बेंगलुरु बेहद खूबसूरत हो जाता है। यही नहीं आसपास सभी वॉटरफॉल ऐक्टिव हो जाते हैं, वायनाड, चिकमगलूर, ऊटी, येरकॉड, येलागिरी जैसी जगहें देखने वाली होती हैं। इसलिए अगर आप जून-जुलाई-अगस्त में बेंगलुरु की यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो आपका निर्णय बिलकुल सही है। खास बात यह है कि यहां बारिश में उमस नहीं होती है।
ट्रेन से जायें या फ्लाइट से, दोनों में क्या फर्क?
लाख्नऊ से बेंगलुरु की फ्लाइट का किराया लगभग छह से सात हजार होता है, जबकि ट्रेन से स्लीपर क्लास का किराया 790 रुपए, एसी3 का 2100 रुपए, एसी2 का 3100 रुपए और एसी1 का 5200 रुपए है। फ्लाइट से जाने पर ढाई घंटे लगते हैं जबकि ट्रेन से 42 से 48 घंटे तक की यात्रा होती है। आपका बजट कैसा यह यह आप बेहतर जानते होंगे, लेकिन अगर आपके पास पर्याप्त समय है तो हमारी सलह यह है कि आप ट्रेन से ही जायें, क्योंकि उत्तर से दक्षिण के इस सफर में आपको भारत में हर 100 किमी पर होने वाले बदलाव साफ नज़र आयेंगे। और आपकी यह ट्रिप वाकई में एक यादगार ट्रिप बन जायेगी।



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