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मधुबनी चित्रकला से जुड़ी इन ऐतिहासिक चीजों को जानते हैं आप ?

भारतीय संस्कृति का 'कला' से साथ गहरा रिश्ता रहा है। चाहे बात लोक नृत्य-संगीत की हो या फिर अद्भुत चित्रकारी की। 'नेटिव प्लानेट' के इस खास खंड में जानिए, बिहार प्रांत के 'मधुबनी नगर' के बारे में, जिसकी प्राकृतिक कला का पूरा विश्व लोहा मान रहा है। जिसकी खूबसूरत चित्रकारी, रंगोली से उतर कर कपड़ों, दीवारों के बाद अब कागज पर भी आ गई आई है।

'मिथिला' की औरतों द्वारा शुरू की गई यह पहल, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर रही। आइए जानते हैं पर्यटन के लिहाज से 'मधुबनी' आपके लिए कितना खास है।

मधुबनी चित्रकला

मधुबनी चित्रकला

PC- Rohini

मधुबनी मुख्यत: अपनी चित्रकला के लिए जाना जाता है। जिसकी शुरुआत पहले मिथिला की औरतों द्वारा घर के द्वार पर बनाई जाने वाली रंगोली के रूप में हुई थी। जो धीरे-धीरे अब आधुनिक रूप ले रही है। अब यह चित्रकारी कपड़ों के अलावा घर की दीवारों व कागज पर भी की जाती है। यहां के रेलवे स्टेशन से ही मधुबनी कला को देखने की शुरुआत हो जाती है, जहां पूरी दीवारें, मधुबनी कलाकृतियों से सराबोर हैं। विदेशी सैलानियों द्वारा इस अद्भुत कला को खूब पसंद किया जाता है।

मधुबनी कला का इतिहास

मधुबनी कला का इतिहास

PC- Abhishek Singh

इन पहाड़ी स्थलों से जुड़ा है, महाभारत काल का रहस्यमयी इतिहास

नाम के पीछे की कहानी

नाम के पीछे की कहानी

PC- Divya Vibha Sharma

प्राचीन काल में मधुबनी अपने वनों में पाए जाने वाले मधु (शहद) के लिए काफी प्रसिद्ध था, इसलिए इस जगह का नाम (मधु+वन) मधुबनी रख दिया गया। जबकि कुछ लोगों का मानना है, कि मधुबनी शब्द मधुर+वाणी से बना है, क्योंकि यहां की मुख्य भाषा मैथिली है, जिसे काफी मधुर व सरस माना जाता है।

मधुबनी चित्रकला की विशेषता

मधुबनी चित्रकला की विशेषता

PC- Sumukhi Umesh

गौतम बुद्ध से जुड़े इस स्थल का इतिहास नहीं जानते होंगे आप

घूमने लायक जगहें - राजनगर

घूमने लायक जगहें - राजनगर

PC- Manas46951

राजनगर, मधुबनी जिले का एक ऐतिहासिक स्थल है। जो किसी जमाने में दरभंगा की उप-राजधानी था। इस जगह को बसाने का श्रेय महाराजा रामेश्वर सिंह को जाता है, जिन्होंने यहां एक भव्य नौलखा महल का भी निर्माण करवाया । इस महल के अंदर देवी काली का एक भव्य मंदिर है। कहा जाता है, यह महल प्राकृतिक आपदा का बुरी तरह शिकार हुआ, अब यहां बस महल का भग्नावशेष ही बचा हुआ है। लेकिन अभी भी यह छतिग्रस्त राजमहल और इसका परिसर देखने लायक हैं।

बलिराज गढ़

बलिराज गढ़

PC- Haros

आज इस अवस्था में मौजूद हैं, महाभारत काल के ये शहर

गिरिजा - शिव मंदिर

गिरिजा - शिव मंदिर

मधुबनी से जुड़े कई तार पौराणिक काल की ओर इशारा करते हैं। कहा जाता है, माता सीता फूल तोड़ने के लिए नित प्रात: फुलवाड़ी, गिरिजा जाया करती थीं, जिसका वर्तमान नाम फुलहर है। कहा जाता है गिरिजा में भगवान शिव का एक मंदिर अवस्थित था, जो आज भी उस रूप में मौजूद है। मान्यता है कि प्रभु राम ने माता सीता को पहली बार यहीं गिरिजा में देखा था।

अगर आप चाहें तो उपरोक्त स्थलों के अलावा यहां स्थित कई और मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं, जिसमें कल्याणेश्वर महादेव मंदिर, डोकहर राज राजेश्वरी मंदिर, भवानीपुर, कोइलख, गोसाउनी घर आदि शामिल हैं।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

PC- Deepanjali Kakati

मधुबनी आप तीनों मार्गों से पहुंच सकते हैं, यहां का नजदीकी हवाई अड्डा पटना है, रेल मार्ग के लिए आप मधुबनी और राजनगर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। मधुबनी, सड़क मार्ग द्वारा बिहार के मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है। इसलिए आप सड़क मार्ग के द्वारा भी यहां तक पहुंच सकते हैं।

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