हर मंदिर का अपना अलग अध्यात्मिक और धार्मिक महत्व होता है। लेकिन हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले कई मंदिर ऐसे भी हैं, जो धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी शानदार वास्तुकला और ऐतिहासिकता के कारण दूर-दराज के इलाकों से भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हाल ही अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर का उद्घाटन काफी चर्चाओं में रहा।

मंदिर के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के साथ-साथ इस मंदिर की शानदार वास्तुकला भी लोगों में चर्चा का विषय बन गयी। हम यहां कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बता रहे हैं जहां आने वाले श्रद्धालु सिर्फ इसके धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि शानदार वास्तुकला के भी कायल होते हैं।
राम मंदिर, उत्तर प्रदेश

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बना राम मंदिर दुनियाभर में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि अभी तक इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के अंदरुनी हिस्सों की जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनको देखकर ही समझ में आ रहा है कि यह शानदार वास्तुकला का एक उत्कृष्ठ नमूना है।
चंद्रकांत सोमपुरा और उनके बेटों द्वारा डिजाइन किये गये इस मंदिर का निर्माण पूरी तरह से पत्थरों से किया गया है। पत्थरों को तराशकर विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां और देवी-देवताओं की मूर्तियों को मंदिर की दिवारों पर उकेरा गया है। कहा जा रहा है कि नागर शैली में बना राम मंदिर दुनिया का तीसरा सबसे विशाल हिंदू मंदिर है।
अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली

दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर को देखकर ही समझ में आता है कि यह एक ऐसा आधुनिक समयकाल में बना मंदिर है, जो पूरी तरह से प्राचिन भारतीय कला और वास्तुकला से प्रेरित है। साल 2005 में इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। उसके बाद से लेकर आज तक में, यह मंदिर भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक बना हुआ है जहां सबसे अधिक लोग जाते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों के आधार पर ही मंदिर के खंभों से लेकर शिखर और मूर्तियों को तराशा गया है।
मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तमिलनाडु

दक्षिण भारतीय सभी मंदिर ही अपनी शानदार वास्तुकला के कारण पूरे देश से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मदुरै का मीनाक्षी अम्मन मंदिर भी इससे अलग नहीं है। यह मंदिर द्रविड़ियन शैली का शानदार उदाहरण है। सिर्फ मंदिर परिसर ही नहीं बल्कि इसके गोपुरम में भी उकेरी गयी कलाकृतियों को देखकर किसी के भी पांव बस ठहर जाएंगे। इस मंदिर में काफी चटकिले रंगों का इस्तेमाल कर इन कलाकृतियों में तो मानों जान ही फुंक दी गयी है।पारंपरिक पौराणिक मान्यताओं के आधार मंदिर के हर एक स्तंभ पर कलाकृतियों को उकेरा गया है जो इस मंदिर की प्रमुख खासियतों में शामिल है।
खजुराहो मंदिर, मध्य प्रदेश

खजुराहो मंदिर समुह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में भी शामिल है। 9वीं से 11वीं सदी के बीच चंदेल राजवंश द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था। खजुराहो मंदिर अपनी कामुक नक्काशी की वजह से सबसे अधिक लोकप्रिय हैं, जो मनुष्य के जीवन और अध्यात्म को एक धागे में पिरोता है। इस समुह का सबसे बड़ा मंदिर भगवान शिव को समर्पित कंदरिया महादेव का मंदिर है।
बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु

तंझौर का बृहदेश्वर मंदिर, जिसे बृहदेश्वरा मंदिर के नाम से भी जाता है, UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल एक ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर चोल वास्तुकला का शानदार उदाहरण है। राजा राजा चोल प्रथम द्वारा इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में करवाया गया है। मंदिर में भगवान शिव का विशाल लिंग स्वरूप स्थापित है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह मंदिर भी उन मंदिरों की सूची में शामिल है जो अध्यात्म के साथ-साथ अपनी वास्तुकला के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है।
सूर्य मंदिर, ओडिशा

कोणार्क का सूर्य मंदिर भी UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल है। इस मंदिर का निर्माण कलिंग वास्तुकला के आधार पर किया गया था। भगवान सूर्य को समर्पित इस मंदिर की आकृति किसी रथ के समान ही है। लेकिन यह लकड़ी से बना कोई रथ न होकर भारी-भरकम पत्थरों को तराशकर बनाया गया एक विशाल रथ की आकृति वाला मंदिर है।
इस मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी वास्तुकला ही नहीं बल्कि इंजीनियरिंग भी है। इस मंदिर में सूर्य के आधार पर समय और तारीख का पता लगाने जैसी कई घड़ियां भी मौजूद हैं, जिन्हें पत्थरों को तराशकर ही तैयार किया गया है।
कैलाश मंदिर, एलोरा की गुफाएं, महाराष्ट्र

एलोरा की गुफाओं में एकलौते पत्थर को तराशकर विशाल कैलाश मंदिर का निर्माण किया गया था, जो इस बात को साबित करता है कि प्राचिन काल में भारत की वास्तुशिल्पकला कितनी उन्नत थी। भगवान शिव के इस मंदिर की दिवारों पर हिंदू धर्म के आधार पर विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियों को उकेरा गया है। इस मंदिर के आसपास एलोरा की गुफाएं मौजूद हैं, जो जैन, बौद्ध और हिंदू कलाकृतियों का मिश्रण हैं।



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