मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में संगमतट पर 7 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने शाही स्नान (अमृत स्नान) किया, जिसमें बड़ी संख्या में कल्पवासी भी शामिल थे। लेकिन मौनी अमावस्या को हुए एक हादसे ने महाकुंभ के उत्साह को काफी हद तक फीका कर दिया है। मौनी अमावस्या की पुण्य तिथि पर प्रयागराज में स्नान करने के लिए उमड़ी अत्यधिक भीड़ के अनियंत्रित होने की वजह से देर रात को भगदड़ मच गयी थी।
कथित तौर पर इस भगदड़ में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी और काफी लोग घायल हो गये। महाकुंभ में हुई भगदड़ की दुर्घटना के बाद अब प्रशासन के ओर से 5 प्रमुख बदलाव किये गये हैं।

महाकुंभ में भगदड़ की घटना के बाद जो 5 मुख्य बदलाव लाए गये हैं, वह हैं -
- मेला क्षेत्र को पूरी तरह से नो-व्हीकल ज़ोन घोषित कर दिया गया है। यहां किसी भी तरह के वाहनों का प्रवेश वर्जित है।
- अगर किसी तीर्थ यात्री के पास VVIP पास है और वह यह दावा कर रहा है कि विशेष पास के जरिए वह वाहन लेकर मेला क्षेत्र में प्रवेश कर सकेगा तो अब ऐसा संभव नहीं है। क्योंकि VVIP पास को रद्द कर दिया गया है।
- यात्रियों की सुविधा को बनाए रखने के लिए रास्तों को वन-वे कर दिया गया है ताकि एक तरफा मार्ग से लोग आवाजाही कर सकें।
- प्रयागराज के आसपास के जिलों से आने वाले वाहनों को जिले की सीमा पर ही रोक दिया जा रहा है।
- प्रयागराज शहर में 4 फरवरी तक सख्त प्रतिबंध लगे रहेंगे। शहर के अंदर चार पहिया वाहनों की एंट्री पूरी तरह से बंद रहेगी।

बताया जाता है कि भगदड़ की इस घटना के बाद सीएम योगी ने सभी व्यवस्थाओं की फिर से समीक्षा की। जिसके बाद उन्होंने सभी दिशा-निर्देश जारी किये। मेला प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कुंभ क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है। इसलिए श्रद्धालुओं से भी अपील की गयी है कि वे प्रशासन का पूरा सहयोग करें और किसी भी तरह की अव्यवस्था को बढ़ावा न दें।



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