भारत की विशालतम और सबसे रहस्यमयी गुफाओं में शामिल कान्हेरी की गुफाओं का इतिहास 2000 सालों से भी काफी पुराना है। ये गुफाएं महाराष्ट्र के संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में करीब 6 किमी अंदर घने जंगलों में स्थित है। इन गुफाओं तक पहुंचने के लिए छोटा सा ट्रेक करना पड़ता है।

अगर आपने ट्रेकिंग करना अभी बस शुरू ही किया है तो निश्चित रूप से कान्हेरी की गुफाएं आपके लिए परफेक्ट जगह है। मानसून के समय घने जंगलों की हरियाली और मनमोहक दृश्य आपका मन लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
कान्हेरी गुफाओं के इतिहास और इसके पास मौजूद जलधारा के बारे में जानते हैं :
कान्हेरी गुफाओं का इतिहास
कान्हेरी गुफाओं का इतिहास करीब 2200 साल से भी ज्यादा पुराना है। इन गुफाओं का निर्माण ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ था। गुफाओं में बौद्ध कलाओं का प्रदर्शन किया गया है। कान्हेरी की गुफाएं भारत की विशालतम गुफाएं हैं क्योंकि ये एलोरा और अजंता की गुफाओं से भी अधिक हैं। कान्हेरी में कुल 109 गुफाएं हैं।

इन गुफाओं का निर्माण मुख्य रूप से बौद्ध शिक्षा केंद्र और एक तीर्थ स्थल के रूप में किया गया था। गुफाओं को काले बेसाल्ट पत्थरों को काटकर बनाया गया है। इस वजह से ही इन्हें कान्हेरी गुफाएं कहा जाता है। दरअसल, कान्हेरी शब्द संस्कृत के शब्द 'कृष्णगिरी' से लिया गया है जिसका अर्थ होता है काला पहाड़। इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार इन गुफाओं का निर्माण मौर्य और कुशना सम्राटों के शासनकाल में किया गया था।
कान्हेरी गुफा की संरचनाएं
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की नजर इन गुफाओं पर काफी देर से पड़ी थी। इस वजह से इन्हें 26 मई 2009 को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया। कान्हेरी गुफाओं के अंदर भगवान बुद्ध की कई मूर्तियां पत्थरों को तराश कर बनायी गयी है। ज्यादातर मूर्तियों में भगवान बुद्ध को खड़ी मुद्रा में ही दिखाया गया है। इनमें से कुछ मूर्तियां खंडित भी हो चुकी हैं।

इन गुफाओं में बुद्ध की सबसे ऊंची मूर्ति 25 फुट की है। गुफा तक पहुंचने के लिए चट्टानों को काट कर सीढ़ियां बनायी गयी हैं, जिन पर ट्रेकिंग करते हुए ही चढ़ना पड़ता है। कान्हेरी गुफाओं में सबसे ऊपर समतल पठार भी है। बताया जाता है कि वहां मृत बौद्ध भिक्षुओं का अंतिम संस्कार किया जाता था। पठार के पास कई छोटे-बड़े स्तूप भी बने हुए हैं जो संभवतः मृत बौद्ध भिक्षुओं की समाधी हो सकती है।
कान्हेरी गुफाओं की ट्रेकिंग
कान्हेरी गुफाएं उन लोगों के घूमने के लिए बेस्ट जगह है जिनका लगाव इतिहास, रोमांच और प्रकृति से है। मुंबई में अगर किसी को मानसून के समय सुरक्षित ट्रेकिंग पर जाने का मन हो तो वह कान्हेरी गुफाओं की ट्रेकिंग के लिए जा सकता है। कान्हेरी गुफाओं की ट्रेकिंग में महज 2 घंटों का समय लगता है जो संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के वन क्षेत्रों के बीच से होते हुए पूरी की जाती है। मानसून के समय वन क्षेत्र में गहरे हरे रंग की हरियाली इस ट्रेकिंग को और भी ज्यादा यादगार बना देती है। किस्मत अच्छी होने पर आपको वन क्षेत्र में ट्रेकिंग के दौरान जानवरों की झलक भी दिख सकती है।
मानसून के समय दिखता है अद्भूत सुन्दर नजारा

मानसून के समय कान्हेरी गुफाओं की ट्रेकिंग का सबसे बेस्ट पार्ट होता है चट्टानों से होकर नीचे बहता पानी। बारिश के मौसम में गुफाओं के ऊपर से कई जलस्रोत निकलते हैं, जो ट्रेकिंग के रास्ते से होकर ही नीचे की तरफ बहते रहते हैं। रास्ते भर इन अस्थायी झरनों की कल-कल करती आवाजें बेहद सुकून प्रदान करती है। पानी को नीचे कुंड में जमा करने की व्यवस्था भी की जाती है। कान्हेरी गुफाओं की ट्रेकिंग के दौरान रास्ते में पड़ने वाले इन झरनों की वजह से चढ़ाई में कोई समस्या नहीं होती है। रास्ते भर आपको पेड़ों पर उछल कुद मचाते बंदरों का खेल भी दिखेगा।
कब और कैसे जाएं कान्हेरी की गुफाएं

कान्हेरी की गुफाएं साल भर खुली रहती हैं लेकिन यहां घूमने व खास तौर पर ट्रेकिंग के शौकिनों के लिए मानसून का समय बेस्ट होता है। कान्हेरी गुफाओं में आराम से घूमने में आपको 4-5 घंटों का समय लग सकता है। अगर आप यहां जाते हैं तो गुफा नंबर 3, 11, 34, 41, 67 और 87 में जरूर जाएं, इन्हें काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय नागरिकों को यहां प्रवेश करने के लिए ₹5 एंट्री फीस देनी पड़ती है। पर्यटकों के लिए कान्हेरी गुफाएं सुबह 7.30 बजे से शाम को 5 बजे तक खुली रहती है। सोमवार को गुफाएं बंद रहती है।
इन बातों का रखें खास ख्याल

- भीड़ भाड़ से बचने के लिए कन्हेरी गुफाएं सुबह में जल्दी आना सबसे अच्छा होता है।
- गर्मी के महीनों में यहां आने पर टोपी, पानी की बोतल और सनस्क्रीन लेकर आएं। मानसून के समय यहां आने वाले लोग रेनकोट और वाटरप्रुफ जूते पहन कर आएं।
- बंदरों से सावधान रहें। प्रवेश द्वार की दीवारों पर बैठे बंदर आपके हाथ से छोटा पर्स या खाने का सामान छिन कर ऊंचे पेड़ों पर भाग सकते हैं।
- कान्हेरी गुफाओं में ऊबड़-खाबड़ इलाका भी है। इसलिए, आरामदायक और वाटरप्रुफ जूते पहनें। ऊंची हील वाली सैंडिल बिल्कुल मत पहने।
- यह बौद्धों के लिए बहुत बड़ा धार्मिक महत्व का स्थान है और इसलिए हर समय इस स्थान की पवित्रता को बनाए रखना चाहिए।
कैसे पहुंचे कान्हेरी गुफाएं
मुंबई से कान्हेरी गुफाएं आने के लिए आप लोकल ट्रेन या मेट्रो ले सकते हैं। स्टेशन से गुफाओं तक पहुंचने के लिए आप संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के लिए सीधी टैक्सी भी ले सकते हैं। कान्हेरी गुफाओं का सबसे नजदीकि एयरपोर्ट मुंबई एयरपोर्ट है। यहां से सबसे नजदीकि रेलवे स्टेशन छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन है, जो कान्हेरी गुफाओं से 38 किमी दूर है। कान्हेरी गुफाएं सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से आप कान्हेरी गुफाओं के लिए टैक्सी या कैब ले सकते हैं।



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