सर्दियों की शुरुआत होते ही भारत दूर देशों से आने वाले प्रवासी मेहमानों से भरने लगता है। आसमान से लेकर तालाब और झील तक हर जगह मेहमान पक्षियों की चहचहाहट से गूंजने लगता है। ग्रेटर फ्लेमिंगो से लेकर ब्लू टेल्ड बी-इटर तक, कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का स्वागत देश भर के विभिन्न राज्यों में दिल खोलकर किया जाता है।

इन प्रवासी पक्षियों के आने से तालाब और झीलों की सुन्दरता बढ़ जाती है लेकिन कुछ समय के प्रवास के बाद ये पक्षी फिर से अपने-अपने देशों के लिए लंबी उड़ान भरते हैं। क्या आप जानते हैं कि भारत में मुख्य रूप से कौन सी प्रजातियों के पक्षी आते हैं और अगर इन्हें देखना हो तो आपको कहां जाना होगा!
भारत आने वाले प्रमुख प्रजाति के प्रवासी पक्षी :
1. ग्रेट व्हाइट पेलिकन

सर्दियों के मौसम में मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्वी यूरोप से मध्य एशिया के बीच के देशों से भारत में आते हैं। ये पक्षी ऐसी झीलों के किनारों पर अपना बसेरा बनाते हैं, जहां अधिक शोर-शराबा नहीं होता है। चौड़े पंख, छोटे पैर और गले में लंबे पीले रंगों के पाउच वाले ये पक्षी आमतौर पर असम और उत्तर प्रदेश के झीलों में दिखाई देते हैं।
2. द रफ

सर्दियों में जब प्रवास पर द रफ भारत आते हैं, तो उन झीलों का रंग ही बदल जाता है। भूरे रंग के इन पक्षियों से भरे झील भी दूर से भूरे रंग के ही नजर आते हैं। ये पक्षी आमतौर पर उत्तर प्रदेश के बरखेड़ा और त्रिपुरा के सुखसागर झील में पाए जाते हैं। द रफ उत्तर-पश्चिम और उत्तर यूरोप, साइबेरिया, चुकोत्स्की प्रायद्वीप और ओखोटस्क सागर से लंबी उड़ान पर भारत आते हैं।
3. ब्लुथ्रोट

सुदूर अलास्का से लंबी उड़ान भरकर भारत आने वाले ब्लुथ्रोट पक्षी को दूर से देखकर ही लोग पहचान सकते हैं। गले के पास चमकिला नीला रंग इस छोटी सी पक्षी को काफी खास बनाता है। राजस्थान के भरतपुर में द केवलादेव नेशनल पार्क में ये पक्षी काफी ज्यादा दिखाई देते हैं। सर्दियों के मौसम में राजस्थान जाने वाले पर्यटक बेसब्री से इन प्रवासी पक्षियों के आने का इंतजार करते हैं।
4. ग्रेटर फ्लेमिंगो

गुलाबी रंग की सुराहीदार गर्दन वाले ग्रेटर फ्लेमिंगो भारत आने वाले प्रवासी पक्षियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्रजाति के पक्षी हैं। आमतौर पर अफ्रिका, दक्षिण-पश्चिम यूरोप और दक्षिण एशियाई देशों से ये पक्षी सर्दियों के सीजन में भारत आते हैं। अपने प्रवास के दौरान गुजरात के नल सरोवर पक्षी अभयारण्य में इन पक्षियों का बसेरा होता है। इसके साथ ही गुजरात के खिजाड़िया पक्षी अभयारण्य और थोल पक्षी अभयारण्य में भी इन गुलाबी सुन्दरियों का दीदार किया जा सकता है।
5. द गैडवाल

मध्य प्रदेश के भोपाल और ओडिशा के चिल्का झील को यूरोप और उत्तरी अमेरिका से आने वाले द गैडवाल पक्षी प्रवास के दौरान अपना घर बनाते हैं। ज्यादातर समय पानी में ही बिताने वाले ये काले-भूरे चित्तिदार पक्षी काफी हद तक बत्तख जैसे दिखते हैं। सर्दियों में चिल्का लेक जाने वाले पर्यटकों के लिए डॉल्फिन के साथ-साथ द गैडवाल पक्षियों को करीब से देखना भी मुख्य आकर्षण होता है।
6. स्पॉटेड रेडशैंक

सर्दियों के पूरे मौसम में स्पॉटेड रेडशैंड पक्षी हरियाणा के जलाशयों में अपना डेरा डाले रहते हैं। ये पक्षी आर्कटिक ज़ोन, उत्तरी यूरोप और उत्तरी एशियाई देशों से भारत की लंबी उड़ान पर आते हैं। नीचे की तरफ सफेद और पीठ पर हल्के स्लेटी रंग के ये पक्षी पानी में नहीं बल्कि जलाशयों के किनारों पर रहना ज्यादा पसंद करते हैं। प्रवास के सीजन में जलाशयों के किनारों पर इन पक्षियों को बड़े ही आराम और बेफिक्री के साथ घूमते हुए देखा जा सकता है।
7. रोजी पेलिकन

सफेद रंग पर हल्की गुलाभी आभा लिये ये पक्षी मूल रूप से यूरोपिय देशों के निवासी हैं। भारत में अपने प्रवास के दौरान इन्हें राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में देखा जा सकता है। पानी में अटखेलिया करते रोजी पेलिकन काफी ज्यादा ग्रेसफुल नजर आते हैं। ये पक्षी समूह में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
8. ब्लू-टेल्ड बी-इटर

जैसा नाम से ही स्पष्ट है कि इन पक्षियों को यह पहचान इनकी लंबी नीले रंग की पूछ की वजह से मिली हुई है। यह नीला रंग इन नन्हें पक्षियों को हजारों की भीड़ में भी खास पहचान दिलाता है। जरा सोचिए, दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों से चलकर आसमान में जब सैंकड़ों की संख्या में एक साथ उड़ते हुए ब्लू-टेल्ड बी-इटर दक्षिण भारतीय राज्यों में आते होंगे तो वह नजारा कितना सुन्दर दिखाई देता होगा।



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