क्रिसमस का पर्व चल रहा है तो भला मिर्जापुर इससे अछूता कैसे रहे? शहर के बीचों-बीच स्थित इमानुएल चर्च भी इस लिस्ट में शामिल है, जहां क्रिसमस को लेकर जमकर तैयारियां की जा रही है। यह इस शहर का सबसे पुराना चर्च है, जो करीब 178 साल पहले बनाया गया था। क्रिसमस को लेकर यहां के फर्नीचर और दीवारों पर नया पेंट किया जा रहा है। मुख्य हॉल में गुब्बारों, सितारों, घंटियों और सैंटा के कटआउट से सजा क्रिसमस ट्री भी लगाया गया है।
इतना ही नहीं, लोगों के आने-जाने वाले रास्ते को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। कोरोना महामारी के चलते यह दो साल तक यहां त्योहार नहीं मनाया गया लेकिन अब ये 25 दिसम्बर के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बार संरक्षकों ने पहले से ही इस ऐतिहासिक चर्च में सजावट और कैरल गान शुरू कर दिया है।

गोथिक शैली में बना है इमानुएल चर्च
यह ऐतिहासिक चर्च प्राचीन गोथिक शैली में बनाया गया है, जो यूरोप में 12वीं से 16वीं शताब्दी के अंत तक काफी प्रचलन में था। इस चर्च को लाल व सफेद रंग रंगा गया है, जो देखने में भी अपनी ऐतिहासिकता को झलकाता है। क्रिसमस के अवसर पर आसपास के ईसाई समुदाय यहां इकट्ठा होते हैं, त्योहार को सेलिब्रेट करते हैं।
क्रिसमस इव पर अलाव का आयोजन
क्रिसमस को लेकर पिछले महीने में चर्च में सजावट का काम चल रहा है। फेस्टिवल के दौरान गाया जाने वाला कैरल गायन ज्यादातर ईसाई परिवारों द्वारा ही किया जाता है। वहीं, ईसाईयों के इस त्योहार को सभी धर्म मिलकर मनाते हैं और इस दिन चर्च घूमने जाते हैं। क्रिसमस की पूर्व संध्या (Christmas Eve) पर चर्च में अलाव का आयोजन किया जाता है।

ईसा मसीह के जीवन पर लगाई जाएगी प्रदर्शनी
मिर्जापुर के इस ऐतिहासिक इमानुएल चर्च में क्रिसमस के दौरान आसपास के जिले के लोग भी आते हैं। इस बार यहां ईसा मसीह के जीवन पर एक प्रदर्शनी, बच्चों के लिए एक खेल कार्यक्रम प्रस्तुत की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा के दृष्टिकोण सभी इंतजाम कर लिए हैं। 25 दिसम्बर की शाम चर्च के पास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा ताकि कानून व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके और ट्रैफिक की आवाजाही को भी मैनेज किया जा सके और सभी आराम से चर्च घूम सकेंगे।
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