इसी साल अप्रैल में आगरा एक्सप्रेसवे पर लड़ाकू विमान सुखोई ने वायुसेना के शौर्य का प्रदर्शन किया था। एक्सप्रेसवे पर उतरे लड़ाकू विमान को देखने के लिए आसपास के जिलों से पहुंचे लोगों की भीड़ जमा हो गयी थी। अब संभव है ऐसा नजारा लोगों को फिर से दिखाई दे लेकिन इस बार कोई लड़ाकू विमान नहीं बल्कि संभव है कि कोई आम विमान या हेलीकॉप्टर ही एक्सप्रेसवे के पास उतरता नजर आ जाए।
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर हेलीपैड बनाने का प्लान फाइनल कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर एक नहीं..दो नहीं बल्कि पूरे 12 हेलीपैड बनाने का फैसला लिया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इस एक्सप्रेसवे पर वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी बनाने की योजना है, जिस वजह से खास इंतजाम भी किये जा सकते हैं।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 4 राज्यों से होकर गुजरेगा जिसकी लंबाई करीब 1350 किमी होगी। आमतौर पर दिल्ली से मुंबई के बीच का रास्ता सड़क मार्ग से तय करने में करीब 24 घंटे का समय लगता है लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से यह रास्ता मात्र 12.30 घंटे में तय किया जा सकेगा। इसका अर्थ हुआ कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे इन दोनों शहरों के बीच की दूरी को घटा कर लगभग आधा कर देगी।
बनेंगे 12 हेलीपैड और 5 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से गुजरेगा
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कुल 12 हेलीपैड बनाए जाएंगे। यह भारत का पहला एक्सप्रेसवे होगा जिसपर इतनी ज्यादा संख्या में हेलीपैड बनाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं यह एक्सप्रेसवे 5 वाइल्डलाइफ सेंचुरी से भी गुजरने वाला है, जिसमें मुकुंदरा नेशनल पार्क, रणथंभौर नेशनल पार्क और सरिस्का टाइगर रिजर्व भी शामिल है।
जानवरों के आवाजाही के लिए खास डेडीकेटेड कॉरिडोर होगा। जानवरों को वाहनों के हॉर्न इत्यादि से कोई परेशानी न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जा सकती हैं।

कहां-कहां बनेंगे हेलीपैड?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सभी 12 हेलीपैड राजस्थान में ही बनाए जाएंगे। यह एक्सप्रेसवे राजस्थान में 374 किमी की दूरी तय करेगा। यह अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा आदि जिले शामिल हैं। राजस्थान के 3 जिलों में 12 हेलीपैड बनाए जाएंगे। इसमें सबसे ज्यादा 6 हेलीपैड सवाई माधोपुर जिले में बनेंगे। दौसा में 4 हेलीपैड और कोटा जिले में 2 हेलीपैड बनाए जाएंगे।
क्यों एक्सप्रेसवे पर बनाए जाएंगे हेलीपैड?
एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल गाड़ियों की आवाजाही के लिए किया जाता है। विमानों की लैंडिंग या टेकऑफ के लिए तो निर्धारित एयरपोर्ट होते हैं। फिर एक्सप्रेसवे पर हेलीपैड का निर्माण क्यों किया जा रहा है? दरअसल, किसी भी इमरजेंसी की परिस्थिति में निपटने के लिए एक्सप्रेसवे पर हेलीपैड बनाने का फैसला केंद्र सरकार की तरफ से लिया गया है। हेलीपैड का इस्तेमाल मुख्य रूप से भीषण दुर्घटनाओं के बाद घायलों को एयरलिफ्ट कर जल्द से जल्द अस्पताल में पहुंचाने के लिए करने का निर्णय लिया गया है।
इसके अलावा किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में ये हेलीपैड सेना के विमानों को भी उतरने के लिए सही जगह प्रदान करेंगे। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक एक्सप्रेसवे के किनारे करीब 30-50 किमी की दूरी पर हेलीपैड को बनाने का नियम है ताकि कोई भी दुर्घटना होने पर नजदीकी हेलीपैड से घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल शिफ्ट किया जा सकें।



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