ब्रजमंडल के दो प्रमुख शहर मथुरा और वृंदावन, एक भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली और दूसरी वह जगह है जहां किशोरावस्था में श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाएं की थी। वृंदावन सिर्फ श्रीकृष्ण की लीलाओं ही नहीं बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम व रासलीलाओं की वजह से भी भक्तों में काफी लोकप्रिय है।

पूरे साल मथुरा और वृंदावन में हजारों भक्त श्रीकृष्ण व राधारानी के दर्शन के लिए आते हैं लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी के समय यह संख्या लाखों में पहुंच जाती हैं। वृंदावन के रहस्यमयी निधिवन के बारे में तो आपने खूब सुना होगा। लेकिन क्या आपको पता है वृंदावन में कई और भी मंदिर हैं, जहां घटने वाली घटनाओं के पीछे क्या रहस्य है या ये कोई आलौकिक घटनाएं हैं, इसकी व्याख्या दुनिया में कोई भी नहीं कर पाया है।
आइए वृंदावन के रहस्यमयी मंदिरों के बारे में आपको बताते हैं :
रंगमहल
वृंदावन का रंगमहल ऐसा मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण और देवी राधा हर रोज आते हैं। यह मंदिर काफी रहस्यमयी माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर के दरवाजे रात के समय खुद ब खुद बंद होते और सुबह में फिर खुद से ही खुलते हैं। मंदिर के अंदर पुजारी हर रोज भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के लिए बिस्तर लगाते हैं। मंदिर में माखन-मिश्री का भोग और राधारानी के श्रृंगार का सामान रखते हैं।

सुबह के समय जब मंदिर का द्वार खुलता है तो बिस्तर पर ऐसी सलवटें पायी जाती हैं, मानो रात में भगवान ने यहां विश्राम किया हो। माखन-मिश्री का प्रसाद खाया हुआ मिलता है और देवी राधा के श्रृंगार का सामान भी अस्त-व्यस्त रहता है। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण और देवी राधा रास रचाने के लिए आते हैं। मंदिर में अगर कोई छिपकर रासलीला देखने का प्रयास करता है तो वह पागल हो जाता है। लेकिन यहां कौन ऐसा करता है, इस रहस्य से अभी तक पर्दा नहीं उठ पाया है।
वृंदावन का तुलसी वन

वृंदा का अर्थ तुलसी होता है। इसलिए वृंदावन का शाब्दिक अर्थ तुलसी का वन होता है। कहा जाता है कि वृंदावन में तुलसी के दो पौधे लगाये गये थे, जिनसे यहां वन उत्पन्न हो गया है। मान्यता है कि यहां तुलसी के पौधे रात के समय गोपियां बन जाती हैं जो श्रीराधा व कृष्ण के साथ रास रचाती है। कहा जाता है कि इन पौधों से तुलसी का एक पत्ता भी साथ में लेकर नहीं जा सकते हैं। अगर ऐसा किसी ने करने का प्रयास किया तो वह भारी विपत्ति में फंस सकता है। मान्यताओं के अनुसार पूरे वृंदावन क्षेत्र में एक-दो नहीं बल्कि तुलसी के कुल 16,108 बड़े-बड़े पेड़ हैं, जितनी भगवान श्रीकृष्ण की पत्नियां थी।
निधिवन के पेड़
निधिवन की रहस्यमयी होने के साथ-साथ निधिवन के पेड़ भी अपने आप में रहस्य छिपाए हुए हैं। इस वन में उगने वाले पेड़ों की शाखाएं ऊपर की तरफ ना बढ़कर नीचे की तरफ बढ़ती हैं। जी हां, यहां आम पेड़ों की तरह शाखाएं ऊपर की तरफ नहीं बल्कि अपनी जड़ों की तरफ बढ़ती है। इस वजह से निधिवन के पेड़ों की ऊंचाई भी काफी कम होती है। सभी पेड़ों की शाखाएं एक-दूसरे में गुंथ कर अजीब सा आकार बनाती है जो निधिवन को और भी रहस्यमयी बना देते हैं।

मान्यता के अनुसार निधिवन में रात के समय श्रीकृष्ण देवी राधा समेत अपनी अष्ट सखियों के साथ रास रचाते हैं। कहा जाता है कि आसपास रहने वाले लोगों को कई बार निधिवन से घुंघरुओं के छनकने की आवाजें सुनाई देती हैं। निधिवन के पास रहने वाली एक महिला ने तो यहां तक दावा किया था कि उन्हें अपने घर के पीछे, निधिवन के पास से एक टूटा हुआ घुंघरु भी मिला था।
आसपास के घरों में बंद कर देते हैं खिड़कियां
शाम के बाद निधिवन धार्मिक स्थान होने के बावजूद यहां डर का माहौल व्याप्त हो जाता है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि घुंघरुओं की आवाज सुनने के बावजूद कोई भी श्रीकृष्ण, राधारानी और गोपियों की रास-लीला देखने की हिम्मत नहीं करता है। निधिवन के दरवाजों को शाम को 7 बजे के बाद बंद कर दिया जाता है। इसके बाद अगर किसी ने निधिवन में झांकने की कोशिश की वो या तो पागल हो गया या फिर तुरंत अंधा बन जाता है।

कहा तो यह भी जाता है कि निधिवन के दरवाजे बंद हो जाने के बाद पशु-पक्षी तक निधिवन छोड़कर चले जाते हैं। बंदर, पक्षियां भी यहां नहीं रहते हैं। आसपास रहने वाले लोग शाम के बाद निधिवन की तरफ खुलने वाली खिड़कियों तक को बंद कर देते हैं, ताकि गलती से भी कोई उस तरफ ना देख ले।



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