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भारत की ऑफ़बीट डेस्टिनेशन...खत्म होने की कगार पर

Written By: Goldi

एक समय की बात है जब दूर पहाड़ों पर खूबसूरत जगह थी, जिनके बारे में ना किसी ने सुना था, ना जाना था। फिर एक दिन कुछ उत्साही पर्यटक उस खूबसूरत जगह जा पहुंचे, वहा उन सभी ने शहरी कोलाहल से दूर अपनी छुट्टियों को खूब एन्जॉय किया और वापस आकर उस जगह की खूबसूरती के चर्चे और हर ओर कर दिए।और फिर वह जगह अनजानी और ख़ुशी वाली नहीं रही।

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यह लगभग सभी प्राचीन, अपरंपरागत और जाहिरा तौर पर ऑफबीट स्थानों की कहानी है जो यात्रियों द्वारा खोजी जाती हैं। और साल दर साल यह जगह यात्रियों के भीड़ के चलते अपना आकर्षण खोते जा रहे हैं। पर्यटक यहां हर साल जाते हैं..जिससे जगहें अपना प्राकृतिक रूप खोते जा रहे हैं..यहां तक की लोकल टूर ओपरेटर भी यात्रियों को इन्ही जगह जाने का आईडिया देते हैं।

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इसी क्रम में आज हम आपको अपने लेख के जरिये बताने जा रहे है कुछ ऐसे स्थानों के बारे में जो कभी पर्यटकों की सोच और नजर से दूर थे, लेकिन आज वही जगह पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए, जिस कारण यह खूबसूरत जगहें अपना आकर्षण खोते जा रहे हैं..अब वक्त आ चुका है कि, अब इन जगहों से हमे थोड़ा ब्रेक लेना होगा 

पुराना मनाली

पुराना मनाली

70 के दशक में मनाली हिप्पियों की मनपसन्द जगह हुआ करती थी...उस दौरान यहां बेहद ही खूबसूरत कैफे और अच्छा वातावरण था, इसके बाद यहां कई सारी हिंदी फिल्मों की शूटिंग भी समपन्न हुई, जिसके बाद पुराने मनाली में पर्यटकों की भरमार हो गयी, पर्यटकों की भीड़भाड़ के चलते आज यह यह जगह अहर सीजन में पर्यटकों से भरा रहता है।

Pc:Naomisahay05

मैकलॉईडगंज

मैकलॉईडगंज

मैकलॉईडगंज की कहानी भी मनाली की तरह ही है..मैकलॉईडगंज में कई सारे मठ है..साथ ही यहां दलाई लामा का घर भी है।मैकलॉईडगंज को मिनी तिब्बत भी कहा जाता है साथ ही इस जगह को हैंडीक्राफ्ट्स के लिए जाना जाता है जोकि तिब्बती रिफ्यूजी द्वारा बनाये जाते हैं। लेकिन आज इस जगह की कहानी पहले से बिल्कुल उल्ट है, पहले यह जगह पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं थी।आज यहां पर्यटक योग और शांति की तलाश में आते हैं...लेकिन यहां बढती भीड़ के चलते अब यह जगह पहले जैसी शांतिप्रिय नहीं रही।

PC:elly jonez

लेह

लेह

लेह लद्दाख भारत का ही हिस्सा है, लेकिन शायद इस जगह को 3 इडियट्स से पहले कोई नहीं जानता होगा, फिल्म में इस जगह को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। जिसके बाद से हर युवा का सपना है लेह लद्दाख की मोटर बाइक ट्रिप करने की। पहले यह जगह एकदम शांत थी, लेकिन पर्यटकों की बढती भीड़ के चलते अब काफी बदलाव आ गया है..पर्यटन के चलते यहां लोगो को रोजगार तो मिला लेकिन लेह लद्दाख अब पहले जैसा नहीं रहा।

लद्दाख में स्थानीय लोगों के लिए पर्यटन का एकमात्र तरीका है और उन्होंने यह चलते रहने के लिए अपनी पूरी कोशिश की है। यह एकमात्र समस्या नहीं है जल की कमी में वृद्धि हुई है, और पर्यटक जल संरक्षण के प्रति सचेत नहीं हैं। पहले यहां काफी ठंड होती लेकिन बढती भीड़ के चलते यहां का वातावरण भी बदल रहा है जिसे लद्दाख वासी काफी भयभीत है और वह अपने पर्यावरण को बचाने में जुटे हुए हैं।

PC: Nandanupadhyay

हम्पी

हम्पी

कर्नाटक स्थित हम्पी, जो खंडहर और स्मारकों का एक समूह है, मूल रूप से दीवार पर्वतारोही के लिए जगह जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अब यह जगह पहले से बहुत बदल चुकी है..जब से यहां लोगो को इतिहास के बारे में जानने का मौका दिया गया तब से यहां कई सारे रिजोर्ट होटल आदि खुल गये हैं। हम्पी पूरी तरह खंडहर नहीं है..लेकिन असुविधा के चलते ये हो सकता है जिसे बचाने की जरूरत है।

pc:Dineshkannambadi

कसोल

कसोल

हम सभी जानते हैं कि क्यों कसोल और तोश प्रसिद्ध हैं, इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बिगाड़ने के लिए यहां आने वाले यात्री काफी हद तक गैर जिम्मेदार हैं, जो यहां आने के बाद यहां कबाड़ और प्लास्टिक के ढेर के पीछे छोड़कर चले जाते हैं। कसोल और तोश में हर वग के पर्यटक छुट्टियाँ मनान पहुंचते हैं...लेकिन धीरे धीरे इस जगह से पर्यटक अपना ध्यान हटा रहे हैं..क्योंकि अब यहां वैसे ना तो प्राकृतिक खूबसूरती रही ना ही शांति।

pc:rohhit verma

त्रिउंड

त्रिउंड

हिमाचल प्रदेश में यूं तो कई सारे ट्रैकिंग स्थल है, लेकिन दिमाग में सबसे पहले नाम आता है है त्रिउंड का,जिसे आसानी से एक दिन में पूरा किया जा सकता हैं। त्रिउंड ट्रैकिंग के दौरान आप उंचे पहाड़ो पर कैम्प लगाकर या फिर खुले आसमान के नीचे लेटकर तारों को निहार सकते हैं। लेकिन ये बात पहले की थी।

लेकिन अब त्रिउंड एकदम से बदल चुका है..अब यअहं पर्यटकों की भीड़ के चलते अब ट्रैकिंग का वह मजा पहले जैसे नहीं जो पहले था..पहले यहां ट्रैकिंग के दौरान दूर दूर उंचे पहाड़ नजर आते थे..लेकिन अब कूड़े के ढेर..

pc:Ashish Gupta

धनुषकोडी

धनुषकोडी

एक सुनामी के कारण यहां शहर बिल्कुल तबाह हो गया था..यहां अब कुछ नहीं है अगर बचा है तो टूटी फूटी इमारते आदि..जिन्हें देखने के लिए यहां अक्सर जिज्ञासु पर्यटक पहुंचते रहते हैं। धनुषकोडी उन लोगो के लिए अच्छी जगह है, जो खंडहर आदि देखना पसंद करते हैं..पहले इस जगह पर लोग जाने से डरते थे..लेकिन अब यहां पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ को देखा जा सकता है।

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