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भारत के ऑफबीट तीर्थस्‍थलों के बारे में पढ़ें

By Namrata Shatsri

भारत का धार्मिक इतिहास बहुत अनूठा है और इसकी धरती पर अनेक धर्मों जैसे हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख का जन्‍म हुआ है। इस कारण इस देश में धार्मिक सहिष्‍णुता देखने को मिलती है जो कि इस देश के इतिहास में अहम भूमिका निभाती है। भारत के हर नागरिक को इसकी विभिन्‍नता पर गर्व है।

भारत में ऐसी कई जगहें हैं जो बेहद खूबसूरत तो हैं ही साथ ही धार्मिक महत्‍व भी रखती हैं। इन जगहों को पवित्र स्‍थान की श्रेणी में रखा गया है। इन आध्यात्मिक स्थलों में सबसे खूबसूरत और रोचक स्थलों में से कुछ हैं, जिनमें धार्मिक वास्तुकला और पवित्र कला की तुलना में देवत्व का स्पर्श होता है।

तीर्थयात्रा के लिए भारत में अनेक पवित्र स्‍थन हैं जहां आकर इंसान अपने पापों से मुक्‍ति पाकर दैवीय शक्‍ति को महसूस कर सकता है।

चौंसठ योगिनी मंदिर, मध्‍य प्रदेश

चौंसठ योगिनी मंदिर, मध्‍य प्रदेश

मोरेना में चंबल घाटी के अंदर स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर में मां दुर्गा की 64 योगिनियां हैं। मंदिर के परिसर में 64 कक्ष हैं, इसके अलावा केंद्र परिसा है जिसमें हिंदू देवी-देवताओं की विभिन्‍न मूर्तियां स्‍थापित हैं।

योगिनी मंदिर तंत्र क्रियाओं और मान्‍यताओं के लिए ज्‍यादा प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि भारतीय संसद इस संरचना की रेखा पर बना है।PC:PankajSaxena

सरखेज रोजा, गुजरात

सरखेज रोजा, गुजरात

अहमदाबाद के उपनगर में स्थित सरखेज रोजा, शेख अहमद खट्टू गंज बख्‍श का मकबरा है। वह अहमद शाह के सलाहकार और सूफी संत थे। इस संत ने अहमदाबाद के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी।

मकबरे के अलावा इसमें एक मस्जिद, पुस्‍तकालय और खंडहर बन चुका महल और सांस्‍कृतिक केंद्र भी है। ये मंस्जिद इंडो सरासेनिक शैली का बेज़ोड़ नमूना है।PC: Mayuri hedau

दैत्‍य सूदान मंदिर, महाराष्‍ट्र

दैत्‍य सूदान मंदिर, महाराष्‍ट्र

लोनार में स्थित दैत्‍य सूदान मंदिर को 6ठी से बारहवीं शताब्‍दी के बीच चालुक्‍य राजवंश ने बनवाया था। इस मंदिर से कई योद्धाओं और राजाओं का संबंध रहा है। किवदंती है कि लावनासुर नामक राक्षस ने ग्रामीणों को बहुत परेशान किया था।

तब भगवान विष्‍णु ने दैत्‍य सूदान का अवतार लेकर असुर को युद्ध में परास्‍त किया था। दैत्‍य सूदान ने राक्षस को जमीन पर इतनी तेजी से फेंका की वहां एक बड़ा सा गड्ढा हो गया।PC:Bharill

होली क्रॉस चर्च, तमिलनाडु

होली क्रॉस चर्च, तमिलनाडु

मंदिरों के शहर मदुरई से चार घंटे की ड्राइव कर म‍छलियों के गांव मनापद में वॉटर स्‍पोर्ट्स का भी मज़ा ले सकते हैं। हालांकि, विकास से पूर्व ये जगह ईसाई धर्म के लोगों का प्रमुख तीर्थस्‍थल हुआ करता था। ये गिरजाघर सफेद रंग की ऊंची इमारत है।

सन् 1540 में पुर्तगालियों का जहाज़ पूर्व से आते हुए मनापद के पास एक भयंकर तूफान में फंस गया था। इस तूफान से बचने के बाद जहाज़ के कैप्‍टन ने एक पहाड़ी पर जहाज के मूल मस्त से निर्मित एक क्रॉस स्थापित किया। इसने सेंट फ्रांसिस जेवियर का ध्यान आकर्षित किया और उन्‍होंने यहीं अपना घर बना लिया।

आनंदपुर साहिब पंजाब

आनंदपुर साहिब पंजाब

आनंदपुर साहिब सिखों के गुरु खालसा का जन्‍मस्‍थान है। यह निहंग्स के सबसे बड़े शिविर का निवास स्थान है। साल 1665 में सिखों के नौंवे गुरु गुरु तेग बहादुर ने इसकी स्‍थापना की थी। इस गांव में अनेक गुरुद्वारे हैं और इन सब में केसगढ़ साहिब प्रमुख है। इस धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्‍थलों में से ये एक है।

इस विशाल गुरुद्वारे में गुरु गोबिंद सिंह के कुछ अवशेष हैं जिनमें उनकी निजी कटार आदि शामिल हैं। अन्‍य गुरुद्वारों की तरह केसगढ़ साहिब भी सुव्‍यवस्थित है और यहां पर पूरा दिन धार्मिक क्रियाएं चलती रहती हैं।PC: Deziner89

नामद्रोलिंग मठ, कर्नाटक

नामद्रोलिंग मठ, कर्नाटक

हिमाचल प्रदेश और सिक्किम में अधिकतर तिब्‍बती लोग पाए जाते हैं। हालांकि दक्षिण भारत के कर्नाटक के बाईलाकुप्‍पे में भी तिब्‍बती प्रभाव देखा जा सकता है। यहां पर भी अनेक मठ हैं एवं यह भारत में तिब्‍बतियों से बसा दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।

यह संपूर्ण शहर के सामने स्थित है और तीर्थयात्रियों के लिए एक शांतिपूर्ण अभयारण्य है। यह थांगका चित्रों और टेपेस्ट्री से भरा है। मंदिर परिसर में पद्मसंभव और अमितायूस के साथ बुद्ध की तीन बड़ी स्वर्ण की मूर्तियां स्‍थापित हैं।PC: Manojz Kumar

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