धौलाधार पहाड़ियों से घिरा पालमपुर हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा हिल स्टेशन है। यहां शहर के विशाल चाय बागानों के कारण पालमपुर उत्तर पश्चिमी भारत की चाय राजधानी के रूप में जाना जाता है। पालमपुर की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिये चाय के बागान प्रमुख आकर्षण है। पालमपुर धर्मशाला से करीबन 30 किमी की दूरी पर स्थित है।पालमपुर समुद्र तल से 1205 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, यहां सर्दी हो या गर्मी, हर सैलानियों का हमेसा जमावड़ा लगा रहता है।
पर्यटक पालमपुर ट्रेन, बस,कर और हवाईजहाज द्वारा पहुंच सकते हैं। गग्गल जिसे धरमशाला-काँगड़ा हवाई अड्डे के नाम से भी जाना जाता है, पालमपुर का निकटतम हवाई अड्डा है।यह हवाई अड्डा प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई से
सीधे जुड़ा हुआ है।
वे पर्यटक जो पालमपुर रेल द्वारा पहुँचना चाहते हैं वे छोटी लाइन के रेलवे स्टेशन मरंदा तक रेल का लाभ उठा सकते हैं जबकि पठानकोट निकटतम ब्रॉड गेज मुख्यालय है जो शहर से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इसके अलावा रास्ते द्वारा भी पालमपुर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। पालमपुर की प्रमुख शहरों से दूरी-
दिल्ली-530
चंडीगढ़-254
शिमला-259
मनाली-205
धर्मशाला-35
कांगड़ा-38

पालमपुर में घूमने की जगह
पालमपुर में घूमने की कई जगहें मौजूद है जिसमे सबसे पहले नाम आता है चाय के बागानों का। यहां आप पैदल घूमते हुए दूर-दूर तक चाय के झाड़ीनुमा पौधे और उनमें काम करते हुए लोगों को देख सकते हैं।पर्यटक भी इन बागानों में जाकर घूम सकते इसपर कोई पाबंदी नहीं है। इतना ही नहीं पर्यटक चाहें तो कोआपरेटिव टी फैक्ट्री में चाय की प्रोसेसिंग का काम भी देख सकते हैं। यहां पहुंच कर चाय की महक और उसका स्वाद उन्हें चाय खरीदने को भी और भी मजबूर कर देती है। यहां पर पैदा होने वाली चाय की किस्म कांगड़ा चाय सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। यह चाय सिर्फ इसी इलाके में होती है और बाजार में दरबारी, बागेश्वरी, बहार और मल्हार के नाम से बेची जाती है। चाय के सभी ब्रांडों के नाम संगीत के राग पर आधारित हैं।
बैजनाथ मंदिर
बैजनाथ मंदिर पालमपुर का एक प्रमुख आकर्षण है और यह शहर से 16 किमी की दूरी पर स्थित है। हिंदू देवता शिव को समर्पित इस मंदिर की स्थापना के बाद से लगातार इसका निर्माण हो रहा है। मंदिर के बरामदे पर शिलालेख द्वारा
मंदिर के निर्माण से पहले हिंदू देवता शिव के अस्तित्व का संकेत मिलता है। मंदिर की वर्तमान वास्तुकला नगर शैली का अच्छा उदाहरण है है जो मध्ययुगीन उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला के रूप में लोकप्रिय है। इस मंदिर के पवित्र स्थान
में शिवलिंग का स्वयंभू रूप है जिसके ऊपर एक ऊंचा शिखर है। प्रवेश करने वाला हॉल एक चौकोर मंडप की ओर जाता है जिसमे दो बड़ी बालकनी हैं । इस मंदिर की बाहरी दीवारें और बाहरी द्वार पर धार्मिक शिलालेखों के अलावा कई देवी देवताओं के चित्र भी बने हुए हैं। मंडप के सामने चार छोटे स्तंभों पर बरामदे में नंदी की मूर्ति देखी जा सकती है। नंदी एक बैल है जो भगवान शिव का वाहन है।

धौलाधार नेशनल पार्क
धौलाधार राष्ट्रीय उद्यान पालमपुर से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह उद्यान 30 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न प्रजाति के जानवर हैं जो वन्य जीवन के प्रति उत्साही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पर्यटक उद्यान में स्थित छोटे चिड़ियाघर की सैर भी कर सकते हैं जहाँ तेंदुआ, काला भालू, अंगोरा खरगोश, एशियाई शेर, सांभर, लाल लोमड़ी और हिरण की किस्मों देखा जा सकता है।

चामुंडा देवी मंदिर
चामुंडा देवी मंदिर पालमपुर के पश्चिम और धर्मशाला से 15 किमी की दूरी पर 10 किमी की दूरी पर स्थित है, ये मंदिर कोई 700 साल पुराना है जो घने जंगलों और बनेर नदी के पास स्थित है। इस विशाल मंदिर का विशेष धार्मिक महत्त्व है
जो 51 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक है।

सेंट जॉन चर्च
सेंट जॉन चर्च पालमपुर से आठ किमी की दूरी पर स्थित है, इस चर्च का निर्माण वर्ष 1929 में कराया गया था। यह चर्च पत्थरों से बना है तथा पर्यटकों को दूर से ही आकर्षित करता है।

कांगड़ा किले को नगर कोट के नाम से भी जाना जाता है। जिसका निर्माण काँगड़ा के मुख्य साही परिवार ने कराया था। समुद्र स्तर से 350 फुट की ऊंचाई पर स्थित ये किला 4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। ये किला आज जहाँ स्थित है उसे पुराना काँगड़ा भी कहा जाता है।

बीर बिलिंग (पैराग्लाइडिंग)
पैराग्लाइडिंग का शौक रखने वाले पर्यटक पालमपुर में भी पैराग्लाइडिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा बीर बिलिंग में ले सकते हैं। बीर बिलिंग पालमपुर से 14 किमी की दूरी पर है।

खाना
पालमपुर में आपको खाने की कई वैरायटी मिलेगी, जैसे नार्थ इंडियन,पंजाबी खाना, मोमोज साउथ इंडियन आदि।
शॉपिंग
पालमपुर में आप यहां की चाय, तिब्बती हैंडीक्राफ्ट्स, पेंटिंग, ऊनी कपड़े आदि खरीद सकते है।



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