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महाराष्ट्र : टापोला भ्रमण के बाद बनाएं इन खास जगहों का प्लान

महाबलेश्वर से 28 किमी दूर स्थित टापोला महाराष्ट्र का एक खूबसूरत पर्यटन गंतव्य है। अपनी बेशकीमती प्राकृतिक सौंदर्यता के कारण इसे पश्चिम का मिनी कश्मीर कहा जाता है। कुदरती खजाने से सराबोर टापोला पर्यटन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। यहां जंगलों के बीच से गुजरने वाले ट्रेकिंग ट्रेल्स सैलानियों के मध्य काफी ज्यादा लोकप्रिय है। वासोटा और जयगढ़ जैसे किले इस स्थान को ऐतिहासिक बनाने का काम करते हैं। यहां टापोला झील के पास कुछ किमी के फासले पर भ्रमण करने योग्य कई दर्शनीय स्थल मौजूद हैं।

वीकेंड प्लान के दौरान आप टापोला के आसपास इन खास जगहों का प्लान बना सकते हैं। इस लेख के माध्यम से जानिए पर्यटन के लिहाज से टोपाला आपके लिए कितना खास है। 

पंचगनी

पंचगनी

PC- Cpangarkar

पंचगनी महाराष्ट्र का एक खूबसूरत पर्यटन गंतव्य है। इस पहाड़ी गंतव्य को अपना नाम इसके चारों ओर फैली पांच पहाड़ियों से प्राप्त है। पुराने ब्रिटिश और पारसी घरों से सजा यह स्थान पर्यटन के लिहाज से काफी खास माना जाता है, जो कुछ यूरोप से किसी भी छोटे शहर की तरह दिखता है। परिवार और दोस्तों के साथ आप एक आरामदायक वीकेंड पंचगनी में आकर मना सकते हैं।

पंचगनी प्राचीन आकर्षणों के साथ एक उत्कृष्ट आवासीय हिल स्टेशन है।अपने कॉन्वेंट और बोर्डिंग स्कूलों के लिए प्रसिद्ध पंचगनी उच्च शिक्षा स्तर के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। 1334 मीटर की ऊंचाई पर यह महाबलेश्वर से केवल 38 मीटर दूर है। टापोला से यह स्थान 45 किमी की दूरी पर स्थित है।

महाबलेश्वर मंदिर

महाबलेश्वर मंदिर

PC- Vikas Rana

महाबलेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के सबसे मुख्य धार्मिक स्थलों में गिना जाता है यह मंदिर मराठा विरासत को भली भांती पदर्शित करता है। 16 वीं शताब्दी के दौरान चंदा राव द्वारा यह मंदिर दक्षिण भारतीय हेमादांत शैली में बनाया गया है। महाबलेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जो हिन्दू धर्म से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

यह भव्य मंदिर महाबलेश्वर के ओल्ड क्षेत्र में स्थित है जो मुख्य शहर से लगभग 6 किमी की दूरी पर स्थित है। 5 फीट ऊंची दीवारों से घिरा यह मंदिर आंतरिक और बाहरी कक्षों में बांटा गया है।

आंतरिक कक्ष में भगवान शिव का निवास स्थान है। भगवान शिव यहां स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह स्थान काफी खास माना जाता है।

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शनिवार वाडा

शनिवार वाडा

PC- Arpan Mahajan

पुणे स्थित शनिवार वाडा किला महाराष्ट्र के चुनिंदा सबसे खास ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। यह एक प्राचीन किला है जिसका निर्माण मराठा साम्राज्य के महान पेशवाओं के निवास स्थान के रूप में करवाया गया था।

इतिहास से जुड़े साक्ष्यों के अनुसार इस किले की नींव 1730 ईस्वी में बाजीराव प्रथम ने रखी थी। 1828 में इस विशाल किले को अज्ञात हमलावरों ने आग के हवाले कर दिया था। जिसमें एक बड़ा जला हुआ हिस्सा आज भी देखा जा सकता है।

माना जाता है कि इस किले में युवा पेशवा राजकुमार की हत्या कर दी गई थी। जिनके चीखने-चिल्लाने की आवाजें आज भी सुनी जाती हैं। इसलिए यह किला शहर व राज्य के चुनिंदा सबसे प्रेतवाधित स्थानों में गिना जाता है। हालांकि यहां सुबह से लेकर शाम तक पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। टापोला से यहां तक की दूरी 143 किमी की है।

सूर्यास्त प्वाइंट

सूर्यास्त प्वाइंट

PC- Palomi Mangesh Kurade

दिन के दो पहर एक सूर्योदय और सूर्यास्त सबसे खास माने जाते हैं, लेकिन आप इन दृश्यों का आनंद शहर की भीड़भाड़ में नहीं बल्कि किसी खास स्थान पर जाकर ले सकते हैं। यदि आप इस दौरान सूर्यास्त के अद्भुत दृश्यों को देखना चाहते हैं तो बॉम्बे प्वाइंट का सफर जरूर करें। बॉम्बे प्वाइंट अपने सूर्यास्त दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां से सूर्य को धीरे-धीरे अस्त होते देखना काफी आनंद का अनुभव कराता है।

इस व्यू प्वाइंट का नाम बॉम्बे प्वाइंट इसलिए रखा गया है क्योंकि यह पुरानी मुंबई सड़क पर स्थित है। रोमांटिक दृश्यों से भरा यह स्थान बहुत हद तक कपल्स को अपनी ओर आकर्षित करता है। एक अलग अनुभव लेने के लिए आप यहां का सपर कर सकते हैं।

पंच गंगा मंदिर, महाबलेश्वर

पंच गंगा मंदिर, महाबलेश्वर

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप महाबलेश्वर स्थित पंच गंगा मंदिर के दर्शन का प्लान भी बना सकते हैं। पांच नदियों कृष्णा, वेन्ना, सावित्री, कोयना और गायत्री के संगम पर निर्मित यह मंदिर हिन्दुओं का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो साल भर श्रद्धालुओं से भरा रहता है। पवित्र नदियों के आभामंडल से घिरा यह स्थान धार्मिक पर्यटन के लिहाज से खास माना जाता है।

मंदिर में एक खूबसूरत नक्काशीदार गौमुख है, जिसमें से पांच नदियों का जल बहता है। यह भव्य मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। यह मंदिर 13 वीं शताब्दी के दौरान देवगिरी के शासक राजा सिंघ देव द्वारा बनाया गया था।

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