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जन्माष्टमी स्पेशल: इस जन्माष्टमी चलिए इन जगहों की सैर पर जहाँ से भगवान श्रीकृष्ण अब भी जुड़े हुए हैं।

वक़्त आ चूका है अपने प्यारे दुलारे कृष्ण के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने का। आप सबके घरों में भगवन श्री कृष्ण के लिए पालने सज गए होंगे, पूजा के सामान सज गए होंगे, लज़ीज़ व्यंजन बनाने की तैयार हो गई होगी। अब बस इंतज़ार है हमारे कान्हा जी के जन्म का। जन्म लेते ही नगरी-नगरी, घर-घर एक दूसरे को बधाई देते हुए लोगों को देखना इस उत्सव का सबसे खुशनुमा पल होता है। "नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" गाते बजाते लोग उत्साह से भर जाते हैं।

आज इसी ख़ुशी को दुगुनी करते हुए चलिए चलते हैं कृष्ण की उन नगरियों में जहाँ जा आपको जन्माष्टमी का अनुभव बाकि जन्माष्टमियों से अलग होगा। तो चलिए चलते हैं, भगवान श्रीकृष्ण की नगरियों में।

Shrikrishna Janmbhumi

श्री कृष्णजन्म भूमि, मथुरा
Image Courtesy:
Shahnoor Habib Munmun

1.श्री कृष्णजन्म भूमि, मथुरा

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि जहाँ जेल के अंदर भगवन श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस जेल के चारों तरफ मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यह मस्जिद के बिलकुल बगल ही स्थित है। वासुदेव जी और माता देवकी इसी जेल में कैद थे जब माता देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया। भगवान श्री कृष्ण के मामा कंस ने इन्हें जेल में कैद कर रखा था क्योंकि उसे भय था कि उसकी मृत्यु उसके बहन के बेटे द्वारा होगी। जन्माष्टमी के दिन इस नगरी के लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।

Gokul

गोकुल
Image Courtesy:
Hidden_macy

2. गोकुल

गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण का पूरा बचपन बीता। वासुदेव सर्वशक्तिमान ईश्वर की कृपा से सारी बेड़ियों को तोड़ते हुए नन्हे कृष्ण को नन्द के घर गोकुल तक सही सलामत ले गए। नन्द की धर्म पत्नी माँ यशोदा ने पुत्री को जन्म दिया था जिसे वासुदेव जी ने श्रीकृष्ण के साथ बदल दिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माँ यशोदा की ख़ुशी आप आज भी यहाँ के निवासियों में जन्माष्टमी के दिन देख सकते हैं। घर-घर में जन्म के बधाई गीत बजते हैं।

Vrindavan

वृंदावन
Image Courtesy: Guptaele

3. वृंदावन

जन्माष्टमी का पवित्र त्यौहार मनाने के लिए वृंदावन से अच्छी जगह और क्या होगी। यह वही जगह है जहाँ भगवन श्री कृष्ण ने अपने साथियों के साथ बचपन की सारी शरारतें की। मथुरा से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर श्रीकृष्ण की अठखेलियों के चर्चे आज भी यहाँ के लोग करते और खुश होते हैं। यहाँ का यह सबसे बड़ा उत्सव है जिसमें शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से लोग यहाँ आते हैं।

Dwarka

द्वारका
Image Courtesy: Poonam Agarwal

4. द्वारका

गुजरात में बसा द्वारका क्षेत्र वह क्षेत्र है, जिसे श्रीकृष्ण ने खुद ही बसाया था। अपने मामा कंस की हत्या करने के बाद अपने साथियों के साथ भगवान श्रीकृष्ण ने इसी जगह को अपनी राजधानी के रूप में चुना। ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण द्वारा बसाये गए इस राजधानी का कुछ हिस्सा समुद्र के जल में मगन हो गया।

Kurukshetra

कुरुक्षेत्र
Image Courtesy: Shekhartagra

5. कुरुक्षेत्र

यही वह जगह है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के सारथी होने के किरदार को निभाते हुए सम्पूर्ण मानव जाति को सबसे बड़ा उपहार दिया, भागवत गीता। जब युद्ध क्षेत्र में अर्जुन अनंत दुविधा में थे और उन्हें उन दुविधाओं से निकलने के लिए सही मार्गदर्शन की ज़रूरत थी तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने महान उपदेशों से उनकी उन दुविधाओं को दूर किया जिसे आज भागवत गीता के रूप में हम पढ़ते हैं। कुरुक्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के इस महत्वपूर्ण समय का इकलौता साक्ष्य है।

तो आप इस जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण की इन नगरियों में जा अपने कन्हैया से जुड़ना न भूलें।

"कृष्ण जन्माष्टमी की ढेर सारी शुभकामनायें!"

अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।

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