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कभी फ्रेंच उपनिवेशवाद के महत्त्वपूर्ण केंद्र रहे पॉन्डिचेरी में क्या - क्या देखें ट्रैवलर

By Super

व्यक्ति चाहे कोई भी हो, उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो सपना एक ही रहता है कि कैसे जीवन में एक बार विदेश यात्रा का लुत्फ़ लिया जाये। प्रायः ये देखा गया है कि हममें से अधिकांश व्यक्ति ऐसे हैं जिनकी इच्छा रहती है कि वो अपने जीवन में भले ही एक बार मगर विदेश यात्रा करें। अब अगर हम आपसे ये कहें कि आप भारत में रहकर ही विदेश का मज़ा और वहां का फील ले सकते हैं तो शायद आप हमारी बात पर यकीन न करें, मगर ये सच है।

Read in English: Travel to the French Town of Pondicherry

यदि आपको भारत में रहकर विदेशी कल्चर को देखना है तो आप पॉन्डिचेरी आएं। आधिकारिक तौर पर 2006 के बाद से पुडुचेरी नाम से जाना जाने वाला पांडिचेरी, इसी नाम से प्रसिद्ध संघ क्षेत्र की राजधानी है। यह शहर और क्षेत्र, दोनों ही फ्रेंच उपनिवेशवाद से प्राप्त विरासत में समृद्ध है जिसका इस क्षेत्र की अद्वितीय संस्कृति और विरासत में महत्वपूर्ण योगदान है। ज्ञात हो कि पॉन्डिचेरी एक समय फ्रांसीसी शासन के अधीन था और 1670 से 1954 तक एक प्रमुख फ्रांसीसी उपनिवेश रहा है।

आपको बताते चलें कि फ्रांसीसियों ने पॉन्डिचेरी में लगभग तीन शताब्दियों तक निर्बाध शासन किया और शहर में सबसे अच्छी संस्कृति और वास्तुकला के रूप में एक महान विरासत छोड़ गए। तो इसी क्रम में आज हम आपको अपने इस लेख के जरिये अवगत करा रहे हैं पॉन्डिचेरी के उन मशहूर आकर्षणों से जिन्हें आपको अपनी पॉन्डिचेरी यात्रा पर अवश्य देखना चाहिए।

अरबिंदो आश्रम

पॉन्डिचेरी के सबसे प्रमुख आकर्षणों में शुमार अरबिंदो आश्रम 1926 में श्री अरबिंदो घोष द्वारा स्थापित किया गया था जो अंग्रेजों के अत्याचार से बचने के लिए भाग गए थे। इस आश्रम का नेतृत्व मीरा अल्फासा द्वारा अपने मृत्युदिवस, 24नवम्बर,1926 तक किया गया जिन्हें 'माँ' नाम से अधिक जाना जाता है। उन्होंने श्री अरबिंदो आश्रम ट्रस्ट का भी नेतृत्व किया जिसकी स्थापना उन्होंने श्री अरबिंदों की मृत्यु के बाद 1950 में की थी। यह आश्रम सुबह 8बजे से 12बजे तक और दोपहर 2बजे से शाम 6बजे तक लोगों के लिए खुला रहता है। आश्रम में एक विस्तृत पुस्तकालय भी है जहाँ आश्रम के अधिकारियों की अनुमति के साथ पहुँचा जा सकता है।

Photo Courtesy: Aravind Sivaraj

ऑरोविले

पॉन्डिचेरी से कुछ दूरी पर स्थित ऑरोविले एक ऐसा शहर है जहाँ विभिन्न राष्ट्रीयताएँ और संस्कृतियाँ मिलती हैं। यह एक ऐसा शहर है जो लगभग 50 विभिन्न देशो के लोगों का घर है और इसे व्यापक रूप से एक वैश्विक शहर माना जाता है। सड़कमार्ग से आसानी से सुलभ, ऑरोविले शहर, सांस्कृतिक सद्भाव और सामुदायिक जीवन का एक प्रतीक है। 'माँ' नाम से अधिक प्रसिद्ध मीरा अल्फासा द्वारा स्थापित ऑरोविले शहर का निर्माण 1968 में श्री अरबिंदो सोसायटी की एक परियोजना के रूप में शुरु किया गया था। इस शहर की स्थापना का आधार एक सार्वभौमिक स्थान बनाने का विचार था जहाँ सभी देशों और संस्कृतियों के पुरुषों और महिलाओं में सद्भाव रह सकता हो तथा जिससे सद्भाव और प्रगति का सपना साकार हो सके।

Photo Courtesy: Nibedit

फ्रांस के युद्ध स्मारक

पॉन्डिचेरी में फ्रांस युद्ध स्मारक प्रथम विश्वयुद्ध में शहीद हुए युद्ध नायकों की स्मृति में बनवाया गया था। यह स्मारक 1971 में बनवाया गया था और हर साल 14जुलाई को बैस्टिले दिवस पर इस स्मारक को सुंदर रोशनी से सजाया जाता है। इसी दिन फ्रेंच शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। आज तक चली आ रही यह परंपरा इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि पॉन्डिचेरी अपनी फ्रांसीसी जड़ों से जुड़ा है। यह स्मारकपॉन्डिचेरी के गूबर्ट एवन्यूमें स्थित है और दिनभर यात्रियों के लिए खुला रहता है। एक बार पॉन्डिचेरी आने पर स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि ज़रूर अर्पित करनी चाहिए।

Photo Courtesy: Rafimmedia

चर्च ऑफ सैक्रेड हार्ट चर्च ऑफ जीसस

सैक्रेड हार्ट चर्च ऑफ जीसस,पॉन्डिचेरी के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण चर्चों में से एक है। यह चर्च वास्तुकला की गोथिक शैली में डिज़ाइन किया गया है और सालभर में कई पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस चर्च की सबसे आकर्षक और आसानी से नज़र आने वाली विशेषता है इसकी स्टेन्ड काँचयुक्त खिड़कियाँ जो यीशु के जीवन के समय को दर्शाती हैं। यह चर्च एक ऐसी जगह है जो आने वालो को शांति और सुकून का अहसास देता है। 17 दिसम्बर, 1907 को पहली बार इस चर्च में लोगों को बड़ी संख्या में एकत्रित किया गया। चर्च के चारों ओर बनी बस्ती 1908 में स्थापित की गई थी। इस चर्च ने हाल ही में वर्ष 2008 में अपनी शताब्दी मनाई थी।

Photo Courtesy: BishkekRocks

पांडिचेरी बीच

प्रोमेनेड बीच के नाम से प्रसिद्ध पॉन्डिचेरी बीच किसी समय में पॉन्डिचेरी का प्रमुख आकर्षण था। अरियानकुप्पम सागर में एक नए बंदरगाह के निर्माण के कारण होने वाला समुद्र अपरदन इस सुंदर बीच के विनाश का कारण बना। इस खूबसूरत प्रोमेनेड बीच के अवशेष के रूप में रिपरैप शिलाखण्ड की समुद्री दीवार बची है जो इसे टहलने अथवा तैराकी के लिए अनुपयुक्त बनाती है। आपको बताते चलें कि शाम के समय तट पर ट्रैफिक की आवाजाही बंद कर दी जाती है जिससे समुद्र किनारे टहलने के लिए यह एक आदर्श जगह बन जाती है।

Photo Courtesy: Karthik Easvur

पॉन्डिचेरी संग्रहालय

पॉन्डिचेरी संग्रहालय एक अन्य मील का पत्थर है जो एकबार पॉन्डिचेरी आने पर छूटना नहीं चाहिए। संग्रहालय में एक गैलरी है जिसमें अनेक मूर्तियाँ और अरिकामेडु रोमन व्यवस्था के समय की अनेक महत्वपूर्ण पुरातत्वीय वस्तुएँ हैं। यह संग्रहालय प्राचीनकाल की दुर्लभ कलाकृतियों का भंडारगृह है। यहाँ प्रदशित संग्रह में चोल और पल्लव राजवंश की अनेक दुर्लभ पीतल की मूर्तियाँ तथा पत्थर सम्मिलित हैं। इस संगहालय में पॉन्डिचेरी क्षेत्र से लाई गई सीपियों का भी एक बहुत अच्छा संग्रह है। यह संग्रहालय आने वालो को पॉन्डिचेरी के औपनिवेशिक अतीत के बारे में जानने का अवसर देता है और भारत में फ्रांस के औपनिवेशिक शासन में एक अच्छी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। पॉन्डिचेरी आने पर पॉन्डिचेरी संग्रहालय आना बहुत आसान है।

Photo Courtesy: Prabhupuducherry

कैसे जाएं पॉन्डिचेरी

फ्लाइट द्वारा : पॉन्डिचेरी से निकटतम हवाईअड्डा चेन्नई में है। चेन्नई हवाईअड्डे से नियमित घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें उपलब्ध हैं और इसी कारण हवाईयात्रा से चेन्नई तक जाना एक अच्छा विकल्प है जहाँ से आप पांडिचेरी जा सकते है जो केवल 139 कि.मी. दूर है।

रेल द्वारा : प्रमुख संघराज्य क्षेत्र होने के कारण पांडिचेरी का अपना रेलवे स्टेशन है। देश के सभी बड़े शहरों से आने वाली रेलगाडि़याँ पॉन्डिचेरी में रुकती हैं। रेलगाड़ी से पॉन्डिचेरी की यात्रा भी एक अच्छा विकल्प है।

सड़क मार्ग द्वारा : पॉन्डिचेरी अच्छी तरह से सड़कों के अच्छे नेटवर्क से देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा है। यहाँ आने के लिए कोयंबटूर, चेन्नई और मदुरै जैसे शहरों से बसें उपलब्ध हैं। पॉन्डिचेरी जाने वाले पर्यटक बैंगलोर से भी बसों द्वारा पांडिचेरी जा सकते हैं । यहाँ बस का किराया देश के और हिस्सों की तुलना में काफी सस्ता है।

पॉन्डिचेरी में क्या क्या देखें ट्रैवलर

Photo Courtesy: Ryan

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