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राजस्थान का रत्न : उदयपुर का सिटी पैलेस जो 400 सालों में 22 राजाओं के योगदान से बनकर हुआ तैयार

राजस्थान का शहर उदयपुर शाही महलों का शहर कहलाता है। पिछोला झील इर्द-गिर्द कई पैलेस हैं, जो अपनी खूबसूरती से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन इन सबमें सबसे अधिक खास है, पिछोला लेक के किनारे स्थित, उदयपुर का सिटी पैलेस। यह पैलेस राजस्थान के शाही इतिहास और भव्यता का प्रतीक है। सिटी पैलेस कोई एक महल नहीं बल्कि कई पैलेस का समूह है, जिन्हें पूरा बनने में करीब 400 सालों का समय लग गया था।

अगर आप राजस्थान, जयपुर, जोधपुर या खासतौर पर उदयपुर में घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं, तो सिटी पैलेस में जरूर जाएं। यहां आपको राजस्थान के लंबे इतिहास की एक छोटी सी झलक देखने को मिलेगी। सिटी पैलेस को वर्ष 1559 में महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने बनाना शुरू किया था। हालांकि बाद के वर्षों में कई और राजाओं ने उदयपुर सिटी पैलेस के निर्माण में अपना योगदान दिया था। बता दें, उदयपुर मेवाड़ साम्राज्य की आखिरी राजधानी थी। मेवाड़ की पहली राजधानी चित्तौड़ थी। उदयपुर का सिटी पैलेस नागर, राजपूत और मुगल शैली का मिश्रण है।

जब महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने मेवाड़ की राजधानी को चित्तौड़गढ़ से उदयपुर स्थानांतरित किया, तब उन्होंने इस महल का निर्माण शुरू करवाया था। जैसा कि हमने पहले ही बताया है इस महल का निर्माण कई चरणों में हुआ और इसे पूरा करने में 400 साल लग गए। सिटी पैलेस में कई महल, मंदिर, आंगन और उद्यान हैं। इनमें से कुछ प्रमुख भागों में बड़ी महल, चंद्र महल, दिलकुशा महल, जगदीश मंदिर, त्रिपोलिया गेट, मोर चौक और फतह प्रकाश भवन शामिल हैं।

महल के मुख्य द्वार त्रिपोलिया गेट के सात मेहराब सात राजाओं के वजन के सोने-चांदी को दान में देने का प्रतीक हैं। उदयपुर सिटी पैलेस में कई महल हैं, जिनमें सबसे पुराना बड़ी महल है। इसमें भव्य दरबार हॉल, चित्रकारी और मूर्तियां हैं। चंद्र महल का नाम चंद्रमा के प्रकाश को प्रतिबिंबित करने वाली चांदी की छत पर रखा गया है। दिलकुशा महल शीशे का महल है, जिसमें रंगीन शीशे का काम है। जगदीश मंदिर भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर महल परिसर में स्थित है।

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आकर्षित करती है सिटी पैलेस की वास्तुकला

महल की दीवारों और स्तंभों पर जटिल नक्काशी की गई है, जिसमें फूलों, जानवरों और देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी गयी हैं। इस महल में आपको भित्ति चित्रों का एक विशाल संग्रह देखने को मिलेगा जिसमें रामायण, महाभारत और कृष्ण लीला के दृश्यों का चित्रण किया गया है। महल में रखी संगमरमर और धातु से बनी मूर्तियां भी देखने लायक हैं, जिनमें राजाओं, देवी-देवताओं और पशुओं की मूर्तियां शामिल हैं।

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महल की भव्यता को दर्शाता है पत्थर, लकड़ी और शीशे का काम

उदयपुर का सिटी पैलेस एक अद्भुत ऐतिहासिक और स्थापत्य कला का नमूना है। पत्थरों को काटकर और तराशकर उन्हें सुंदर आकार दिया गया है। लकड़ी से जटिल नक्काशियां बनायी गयी हैं, जो पारंपरिक राजस्थानी कला का प्रतिक हैं। इतने साल बीत जाने के बावजूद न तो ये नक्काशियां आज भी पर्यटकों को आश्चर्य से भर देती हैं। रंगीन शीशे और मिरर का काम दिलकुशा महल को विशेष बनाता है। सीधे शब्दों में कहा जाए, कि अगर आपको राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और विरासत से प्यार है तो उदयपुर के सिटी पैलेस में एक बार जरूर आना चाहिए।

सिटी पैलेस खुलने का समय

पर्यटकों के लिए सिटी पैलेस सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे तक खुला रहता है। पैलेस में प्रवेश करने के लिए आपको टिकट लेना होगा। भारतीय नागरिकों के लिए टिकट का मूल्य ₹30 और विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश टिकट का मूल्य ₹300 है। सिटी पैलेस उदयपुर के मुख्य शहर में लेक पिछोला के पास ही स्थित है। इसलिए उदयपुर एयरपोर्ट से बस, टैक्सी या किराए पर गाड़ियां लेकर आप आराम से सिटी पैलेस पहुंच सकते हैं।

यह महल राजस्थान की शाही विरासत को देखने और समझने का एक शानदार मौका देता है। इसलिए अपनी राजस्थान की अगली ट्रिप पर लेक पिछोला के आसपास दूसरे महलों के साथ-साथ उदयपुर सिटी पैलेस में भी जरूर घूमने जाएं। खास बात है कि लेक पिछोला के बैकग्राउंट में सिटी पैलेस फोटोशूट के लिए भी शानदार जगह है।

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