साल 2012 में आयी हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बैटमैन - द डार्क नाइट राइजेज' का वह दृश्य भला कौन भूल सकता है, जिसमें बैटमैन यानी क्रिस्चियन बेल एक अंडरग्राउंड जेल से बाहर निकलता है और बैकग्राउंड में एक शानदार किला नजर आता है। दुनिया भर में इस फिल्म ने अरबों रुपयों का व्यवसाय किया था।
फिल्म में बैटमैन की कमर तोड़ देने के बाद विश्वासघात की वजह गुस्से से भरा बेन गोथम सिटी को बर्बाद कर देना चाहता है। वह बैटमैन को एक अंडरग्राउंड जेल में ले जाकर बंद कर देता है। फिल्म देखते समय आपका ध्यान जरूर बैटमैन ने ही अपनी तरफ खींचा होगा। लेकिन आज हम बात बैटमैन की नहीं बल्कि फिल्म के बैकग्राउंड के उस किले की करने वाले हैं।

वह किला और कहीं नहीं बल्कि राजस्थान के जोधपुर में मौजूद है। आपने कई बार सोशल मीडिया पर उस किले की फोटो भी देखी होगी और अगर आप कभी राजस्थान, जोधपुर घूमने गये होंगे तो निश्चित रूप से उस किले पर भी आप जरूर घूमने गये होंगे। जी हां, वह किला है जोधपुर का मेहरानगढ़ किला, जो पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय है।
'बैटमैन - द डार्क नाइट राइजेज' की शूटिंग भारत के जोधपुर में मेहरानगढ़ किले पर हुई थी। यह किला भारत के न सिर्फ सबसे पुराने बल्कि सबसे विशाल किलों में शामिल है। सबसे खास बात है कि इस किले को आज तक कोई भी नहीं जीत सका है। इसलिए जोधपुर का मेहरानगढ़ किला एक अजेय किला कहलाता है।

कैसी है मेहरानगढ़ किले की बनावट
मेहरानगढ़ किला जोधपुर शहर के ठीक बीचोबीच शहर से लगभग 410 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1459 में राव जोधा ने इस किले का निर्माण शुरू करवाया था। इतिहासकारों के मुताबिक किले का निर्माण महाराज जसवंत सिंह ने पूरा करवाया था। किले की दीवारें करीब 10 किमी के क्षेत्र में फैली हुई है। इस दीवार की ऊंचाई 20 फीट से 120 फीट और चौड़ाई 12 से 70 फीट तक है।
किले तक पहुंचने के लिए शहर के अंदर से होकर गुजरने वाला घुमावदार रास्ता लेना पड़ता है। किले में कुल 7 दरवाजे हैं, जिन्हें मारवाड़ के राजाओं ने अपनी जीत की खुशी में बनवाया था। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि इस किले में 8वां दरवाजा भी है, जो रहस्यों से भरा हुआ है। किले के एक हिस्से को आज संग्रहालय बना दिया गया है जिसमें राज परिवार से जुड़ी वस्तुएं, कपड़े और अस्त्र-शस्त्र भी देख सकते हैं।

किले पर हर वक्त मंडराती रहती है चील
मेहरानगढ़ किले पर हर वक्त चीलें मंडराती रहती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये चील देवी मां का रूप हैं जो लोगों की रक्षा करने के लिए इस किले के ऊपर मंडराती रहती है। हर दिन सुबह 4 बजे इन चीलों को भोजन करवाया जाता है, जिसकी पूरी व्यवस्था राज परिवार की ओर से ही की जाती है।
कहा जाता है कि जोधपुर में मेहरानगढ़ किला ही ऐसी जगह है जहां से पाकिस्तान साफ नजर आता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब राव जोधा किला बनवाने के लिए जगह की तलाश कर रहे थे, तब इस जगह पर उन्होंने एक बकरी को बाघ से लड़ते हुए देखा था। इसे देखकर ही उन्होंने फैसला लिया कि किला इसी स्थान पर बनाया जाएगा।

साधु ने दिया श्राप, जिंदा दफन हुआ इंसान
मेहरानगढ़ किला जिस स्थान पर बनाया गया, वहां पहले एक साधु निवास करते थे। कहा जाता है कि राव जोधा ने जब यहां किला बनवाने का फैसला लिया तो पानी के सोते के पास रहने वाले उक्त साधु ने श्राप देते हुए कहा कि अगर तुम मुझे इस जगह से हटाओगे तो यहां का सारा पानी सुख जाएगा और किले के आसपास के क्षेत्र में पानी की हमेशा कमी बनी रहेगी। जब महाराज राव जोधा ने साधु से माफी मांगी और श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि राज्य के किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से किले की नींव में जिंदा दफन होना पड़ेगा।
आज भी राज परिवार करता है देख-रेख

राव जोधा जब किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढने में असफल रहे जो स्वेच्छा से अपनी जान दे सकें, तब मेघवाल समाज का एक युवक राजाराम मेघवाल आगे आया। वह अपनी जान देने के लिए तैयार हो गया ताकि मेहरानगढ़ किला को खड़ा किया जा सकें। कहा जाता है कि शुभ दिन और मुहूर्त पर राजाराम मेघवाल को किले की नींव में जिंदा गाड़ दिया गया।
इसके बाद उसकी कब्र पर बलुआ पत्थर का स्मारक बना दिया गया, जिसमें राजाराम मेघवाल के नाम, बलिदान की तारीख के साथ अन्य जानकारियां भी लिखी हुई हैं। कहा जाता है कि जोधपुर का राजघराना आज भी राजाराम मेघवाल के परिवार की देखभाल करता है।



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