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राजस्थान के इन 16 जगहों पर बनेंगे रोपवे, नहीं करनी पड़ेगी कमर-तोड़ चढ़ाई

राजस्थान को किलों और मंदिरों का राज्य कहा जाता है। अब दुर्गम पहाड़ियों पर बने किले या मंदिरों तक पहुंचने में पर्यटकों को ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। राज्य के विभिन्न मंदिरों और किलों समेत कुल 16 जगहों पर जल्द ही रोपवे बनाएं जाएंगे। ताकि देसी पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी इन जगहों के लिए आकर्षित किया जा सकें।

बता दें, विदेशों से आने वाले पर्यटक आमतौर पर ऊंचाई पर स्थित उन जगहों पर जाना अधिक पसंद करते हैं जहां रोपवे की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में राजस्थान के किलो और मंदिरों में अगर रोपवे तैयार हो जाता है तो निश्चित रूप से इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

ropeway in rajasthan

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान की सार्वजनिक निर्माण विभाग की मंत्री और डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी को लिखे एक पत्र में उन 16 जगहों की सूची सौंपी है, जिन्हें पहले चरण में रोपवे बनाने के लिए प्रस्तावित किया जा रहा है।

रोपवे निर्माण के लिए प्रस्तावित 16 जगहें

1. त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथंभौर - सवाई माधोपुर

विश्व धरोहर सूची में शामिल त्रिनेत्र गणेश दुनिया का एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान गणेश अपने पूरे परिवार दो पत्नियों - रिद्धि और सिद्धि, दो पुत्र - शुभ और लाभ के साथ विराजमान हैं।

2. रामेश्वर महादेव मंदिर - बूंदी

हाड़ौती क्षेत्र में स्थित रामेश्वर महादेव के मंदिर में राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों जगहों से लोग आते हैं। मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।

3. आमेर नाहरगढ़ रोपवे - जयपुर

नाहरगढ़ किले का निर्माण सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। कहा जाता है कि भटकती प्रेतात्मा नाहर सिंह के नाम पर इस किले का नाम रखा गया था।

4. चौथ का बरवाड़ा - सवाई माधोपुर

चौथ का बरवाड़ा का इतिहास चौथ माता शक्ति पीठ के इर्द-गिर्द घूमता है। अरावली शक्ति गिरी पहाड़ श्रृंखला पर 1100 फीट की ऊंचाई पर स्थित चौथ भवानी का मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने 1451 में करवाया था।

5. रूठी रानी महल से हवामहल, जयसमंद - उदयपुर

जैसलमेर के राजा राव लूणकरण की पुत्री रानी उमादे शादी के बाद पहली रात को अपने पति मारवाड़ के राजा मालदेव को अपनी दासी भारमली के साथ देखकर रूठ गयी। वह नाराज होकर तारागढ़ दुर्ग में रहने लगी और जीवनभर उन्होंने अपने पति का मुंह नहीं देखा।

6. कुंभलगढ़ किला, लाखेला - राजसमंद

15वीं शताब्दी में इस किले का निर्माण राणा कुंभा ने करवाया था। इसे बनाने में लगभग 15 सालों का समय लग गया था। 16वीं शताब्दी में महाराणा प्रताप का जन्म इसी किले में हुआ था।

7. राजसमंद झील के आसपास की पहाड़ी

यह एक कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण मेवाड़ के राणा राज सिंह प्रथम ने करवाया था। यह झील गोमती, केलवा और ताली नदी पर बनाया गया है।

8. बिजासन माता मंदिर, इंदरगढ़ - बूंदी

पहाड़ी के ऊपर बिजासन माता के मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 700-800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। इस स्थान पर देवी ने रक्तबीज को समाप्त किया था।

ropeway rajasthan 16 places

9. जीण माता मंदिर से काजल शिखर मंदिर - सीकर

जंगल के बीचोंबीच तीन छोटी पहाड़ियों पर स्थित मंदिर है। औरंगजेब की सेना को भगाने के लिए जीणमाता ने उनपर मधुमक्खियों की सेना छोड़ दी थी। जब उसने क्षमायाचना की तब दिल्ली वापस लौट सका। उसके बाद से जीणमाता को भंवरों की देवी कहा जाने लगा।

10. सिद्धनाथ महादेव मंदिर, कल्याणा - जोधपुर

कायलाना झील के किनारे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 2 किमी का रास्ता पैदल चलना पड़ता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 355 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है।

11. श्री गढ़ गणेश जी मंदिर, ब्रह्मपुरी - जयपुर

अरावली पर्वतमाला पर स्थित देश का एकमात्र मंदिर है, जहां बिना सूंड वाले भगवान गणेश की पूजा होती है।

12. भैरव मंदिर, मेहंदीपुर बालाजी - दौसा

मेंहदीपुर बालाजी का मंदिर सियाराम और भगवान हनुमान को समर्पित एक मंदिर है। बुरी आत्माओं से मुक्ति पाने के लिए भक्त बालाजी को बूंदी के लड्डू और भैरव बाबा को उड़द दाल और चावल चढ़ाते हैं।

13. कृष्णाई माता, रामगढ़ - बारां

अन्नपूर्णा-कृष्णाई माता का मंदिर है। हजारों साल पहले गिरे उल्कापिंड से 3.2 किमी व्यास के क्रेटर का निर्माण हुआ था। क्रेटर की पहाड़ी चोटी पर प्राकृतिक चट्टानों से बना है मंदिर।

14. समाई माता, भांदरिया हनुमान जी मादरेश्वर - बांसवाड़ा

शहर से लगभग 4 किमी दूर पहाड़ की चोटी पर मौजूद मंदिर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है।

15. राजा जी का तालाब, तारागढ़ किला - अजमेर

अजमेर की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला पर मौजूद तारागढ़ किले में स्थित है राजाजी का तालाब। इस तालाब के बारे में कहा जाता है कि इसका पानी कभी नहीं सुखता है।

16. चित्तौड़गढ़ किला - चित्तौड़गढ़

राजपूती रानी पद्मावती के जौहर के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

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